पुलिस पर भारी अपराधी:32 दिन में चोरी-लूट की 38 वारदातें, 50% मामलों में सीसीटीवी फुटेज पर अटकी जांच

लुधियाना4 दिन पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
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  • फैक्ट्रियों और घरों में चोरियों के सबसे ज्यादा मामले
  • फैक्ट्री मालिक सबसे ज्यादा लूटे, पुलिस कमिश्नर को दे चुके हैं शिकायत

शहर में चोर और लुटेरों का बोलबाला है। ये हम नहीं बल्कि पिछले 32 में हुई 38 वारदातों का आंकड़ा बताता है। जिसमें से कुछ को पुलिस ने सॉल्व किया, लेकिन बहुत से अभी भी कतार में है। हालात ये हैं कि पुलिस अभी वारदात को सॉल्व करती ही है कि दो और हो जाती हैं। जिससे जाहिर होता है कि पुलिस पर चोर-लुटेरे भारी पड़ रहें है। मगर ये गंभीर मामला है क्योंकि इन वारदातों में 60 लाख से ज्यादा सामान और कैश चोरी हो चुका है।

जो मामले बड़े हैं, उसमें पुलिस की जांच में सीसीटीवी पर आकर ब्रेक लग जाती है। 50 फीसदी मामलों में पुलिस की जांच सीसीटीवी फुटेज पर आकर रुक जाती है। हैरानी इस बात की है कि रोज रात सभी थानों की पुलिस नाकाबंदी करती है और पीसीआर के 100 से ज्यादा मुलाजिम पेट्रोलिंग कर रहे हैं, इतना सबकुछ होने के बावजूद वारदातों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। अब चुनाव का बोझ पड़ने की वजह से पुलिस का ध्यान भी वारदातें ट्रेस करने से ज्यादा चुनाव सही ढंग से हो जाएं, इस पर लगा है।

फैक्ट्री मालिक सबसे ज्यादा लूटे, पुलिस कमिश्नर को दे चुके हैं शिकायत

इंडस्ट्री एरिया, काकोवाल रोड, दरेसी, बस्ती जोधेवाल, डाबा, फोकल पॉइंट इन इलाकों में होजरी और लोहा फैक्टरियों में चोरों ने सबसे ज्यादा डैमेज किया है। किसी में वर्करों को बंधक बनाया गया तो कहीं सेंधमारी कर लोहा, कपड़ा और कैश लूटा गया। यही वजह थी कि पिछले दिनों कारोबारियों ने मिलकर सीपी को शिकायत दी थी कि वारदातें हो रहीं है और पुलिस का कंट्रोल नहीं है। लेकिन वहां के हालात वैसे ही हैं। क्योंकि उक्त चोरियां करने वाले दो मामले अभी भी अनसाॅल्व हैं।

बेलगाम हुए स्नेचर, रोज छिन रहे मोबाइल

स्नेचरों की बात करें तो दिन रात दोनों ही समय में लोग सड़क पर फोन करते हुए सेफ नहीं है। इसी समय में आकंड़ों को देखे तो लेबर क्लास के सबसे ज्यादा मोबाइल छीने गए और उसके बाद महिलाओं से इस समय में 10 मोबाइल, एक स्कूटी, एक बाइक और अन्य सामान छीनने के मामले हैं। पुलिस ने कुछ स्नेचर पकड़ें हैं, लेकिन इन मामलों में कुछ नहीं बना।

जेल से बाहर आकर दोबारा करने लगे वारदातें

पुलिस द्वारा पकड़े गए 80 फीसदी स्नेचर और चोरों पर पहले पर्चे दर्ज हैं। जोकि जेल से बाहर आने के बाद फिर वारदातें करने लगे। हालांकि कुछ समय पहले पुलिस ने जेल से बाहर आने अपराधियों पर नजर रखने के लिए पंचिंग सिस्टम शुरू किया था। लेकिन सीपी राकेश अग्रवाल के जाते ही वो व्यवस्था बंद कर दी गई। जिसकी वजह से अपराधियों का कोई स्टेट्स पता नहीं चल पाता कि वो जेल से कब आए और कहां है?

ये मामले अनट्रेस, जिसमें सीसीटीवी तक अटकी जांच

  • डेहलों के गांव रणियां में आश्रम में फर्जी पुलिस मुलाजिम बनकर सेवादारों को बंधक बनाकर 1.65 लाख की नकदी और सामान ले गए थे।
  • गांव भुट्टां में एटीएम मशीन से 18 लाख लूटने का मामला अनसाॅल्व।
  • सदर इलाके में इलेक्ट्रोनिकस गोदाम से 25 लाख का सामान लूटने का मामला
  • अरोड़ा पैलेस के नजदीर महिला की एक्टिवा लूटने का मामला
  • मेहरबान इलाके में राहगीर से बाइक लूटने का मामला
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