यूपीएससी 2020 रिजल्ट:जमालपुर के डॉ राजदीप खैरा का 495वां, सतिंदर कौर का 563वां रैंक

लुधियाना25 दिन पहले
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राजदीप सिंह और सतिंदर कौर - Dainik Bhaskar
राजदीप सिंह और सतिंदर कौर
  • फैमिली सपोर्ट, नेवर गिव अप एटीट्यूड से मिली सफलता
  • शादी के बाद 51 हजार की नौकरी छोड़ी, पति के हौसले से 4 साल की तैयारी और किया सपना पूराृ

यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा 2020 का फाइनल रिजल्ट शुक्रवार को घोषित कर दिया गया, जिसमें जमालपुर के 28 साल के डॉ राजदीप सिंह खैरा ने 495वां ऑल इंडिया रैंक हासिल किया। इसका श्रेय वह अपने बड़े भाई अमनदीप सिंह और मेंटोर सरबजीत सिंह को देते हैं। राजदीप ने बताया कि सेक्रेट हार्ट कॉन्वेंट स्कून, सराभा नगर से 12वीं की पढ़ाई के बाद गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और राजिंदरा हॉस्पिटल पटियाला से पढ़ाई की।

2017 से सिविल अस्पताल कूमकलां में मेडिकल ऑफिसर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। नौकरी के साथ इस सपने को पूरा करना आसान नहीं था। जब भी समय मिलता पढ़ाई करने लगता। इस बीच पिता का मई में निधन हो गया। मेरा सितम्बर में इंटरव्यू था। मेरे लिए बहुत मुश्किल समय था, लेकिन नेवर गिव अप एटीट्यूड और फैमिली के सहयोग से सफलता हासिल कर पाया। मैं पंजाब में ही हेल्थ या एजुकेशन सेक्टर में सेवाएं देना चाहता हूं।

शादी के बाद 51 हजार की नौकरी छोड़ी, पति के हौसले से 4 साल की तैयारी और किया सपना पूरा

दुगरी की रहने वाली 36 साल की सतिंदर कौर ने 563वां ऑल इंडिया रैंक हासिल किया है। सतिंदर ने बताया कि बीसीएम शास्त्री नगर में 12वीं करने के बाद लुधियाना कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी कटानी कलां से ग्रेजुएशन की। फिर एमबीए की पढ़ाई करने के लिए दिल्ली चली गई। सपना हमेशा से सिविल सर्विस में जाने का था, लेकिन पूरा नहीं हो पाया, क्योंकि स्टडी लोन लिया हुआ था उसे भी चुकाना था। 2016 में शादी हो गई तो एक बार फिर से पति ध्रुव शर्मा ने इस सपने को जीने में मदद की और अपना पूरा सहयोग देने के साथ ही हौंसला बढ़ाया। इसके लिए 2017 में 7 साल से कर रही प्राइवेट सेक्टर की जॉब छोड़ दी, जिसमें प्रतिमाह 51 हजार सैलरी मिलती थी।

32 साल उम्र होने के बावजूद एक गोल रखा बस कि यूपीएससी की परीक्षा क्रैक करनी है। हालांकि चौथे अटेंप्ट में क्लियर कर पाई, लेकिन इस बात की खुशी है कि मेहनत सफल हुई। इसके लिए मैंने 12 से 14 घन्टे रोजाना पढ़ाई की, क्योंकि पढ़ाई छोड़े लम्बा समय हो गया था। कोचिंग पर पूरा फोकस किया। टीचर्स की गाइडेंस को फॉलो किया। मेरे दिमाग में बस एक ही बात थी कि अब नहीं तो कभी नहीं। मैंने अपना बेस्ट देना है। नहीं तो जिंदगी भर पछतावा रहेगा कि अपने सपने को पूरा करने के लिए मैंने कोशिश तक नहीं की।

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