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भास्कर स्टिंग:दबने से 5 की मौत, सीएम ने जांच बैठाई, अगले ही दिन जैक से 2.25 लाख में लेंटर उठाने का ऑफर देते मिले बेखौफ ठेकेदार

लुधियाना13 दिन पहलेलेखक: गगनदीप रत्न
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पांच लोगों की मौत और 33 के दबने के मामले के बाद भी प्रशासन और लेंटर उठाने वालों ने नसीहत नहीं ली। - Dainik Bhaskar
पांच लोगों की मौत और 33 के दबने के मामले के बाद भी प्रशासन और लेंटर उठाने वालों ने नसीहत नहीं ली।

डाबा रोड स्थित बाबा मकंद सिंह नगर इलाके में ऑटो पार्ट्स फैक्ट्री का लेंटर उठाते समय गिरने से हुई पांच लोगों की मौत और 33 के दबने के मामले के बाद भी प्रशासन और लेंटर उठाने वालों ने नसीहत नहीं ली। इस हादसे के बारे में जानते हुए भी बुकिंग कर रहे हैं। यही नहीं हादसा न होने की गारंटी तक ली जा रही है, लेकिन काम उसी जुगाड़ू तरीके से यानी ट्रक के जैक की मदद किया जा रहा है।

शहर के बहुत से इलाके ऐसे हैं, जहां इसी जुगाड़ के सहारे लैंटर उठाने का काम चल रहा है। ये लोग डाबा, ग्यासपुरा, जुगियाना, कंगनवाल, फोकल प्वाइंट, काकोवाल रोड समेत बहुत से इलाके हैं। जहां ये काम बेधड़क चल रहा है। लेकिन दूसरों को जिम्मेदार ठहराने वाले प्रशासनिक अधिकारियों को न तो ये नजर आ रहा है और न ही इनपर कोई कार्रवाई हो रही है। होता है तो सिर्फ हादसा।

भास्कर टीम ने ऐसे ही काम करने वाले ठेकेदारों का टेलिफोनिक स्टिंग किया, जिनसे लेंटर उठवाने के काम की डील की गई। आप भी पढ़िए मौत के सौदे की पूरी बातचीत।...

ठेकेदार बोला- ट्रक का जैक लगाकर एक महीने का काम 3 दिन में कर देंगे

रिपोर्टर : भाई साहब एक फैक्ट्री का लेंटर उठाना है...
ठेकेदार : हांजी, बोलिए कहां उठाना है, उठा देंगे, जगह कितनी है..?
रिपोर्टर : 150 से 175 गज का प्लॉट है, उसमें एक छोटा-सा ऑफिस भी है..
ठेकेदार : हां, तो 1400 या 1500 स्कवेयर फीट बनेगा, उठाना कितना है..?
रिपोर्टर : 6 फीट का है, 8 फीट करना है
ठेकेदार : हो जाएगा...60 रुपए स्कवेयर फीट के हिसाब से लेंगे। आपका 90 हजार के आसपास बनेगा।
रिपोर्टर : घर और मजदूरों की सिक्योरिटी के लिए कोई किट या उपकरण का इस्तेमाल करेंगे...?
ठेकेदार : वो हमारी जिम्मेदारी है, उसकी टेंशन आप मत लो, कुछ नहीं होगा।
रिपोर्टर : लेंटर उठाओगे कैसे...?
ठेकेदार : वो तो ट्रक के जैक से उठेगा, पहले काम 30 दिन में होता था, लेकिन हमारी गारंटी है कि 3 दिन में काम पूरा हो जाएगा। मगर पैसे में देरी नहीं होनी चाहिए।
रिपोर्टर : मजदूर कितने लगेंगे और वो आपकी टीम मेंबर हैं?
ठेकेदार : 25 से 30 मजदूर लगेंगे, क्योंकि हर जैक पर एक मजदूर का होना जरूरी है। बाकी मजदूरों का क्या है, वो तो मंडी से ले आएंगे।
रिपोर्टर : अगर निगम की तरफ से कोई आ जाए तो फिर क्या करेंगे.?
ठेकेदार : वो जिम्मेदारी आपकी होगी, कुछ नहीं है, पैसे दे दो और कुछ नहीं होगा।
रिपोर्टर : ठीक है, फिर मैं काम करवाने के लिए फोन करता हूं..
ठेकेदार : बता दीजिएगा अभी मैं हिमाचल में हूं, 2 दिन बाद आऊंगा।

शहर में दर्जनों लेंटर उठाने वालों ने इश्तिहार सड़कों पर चिपकाएं हैं, बिना डर-खौफ के इस काम को पूरा करने की गारंटी उठा रहे हैं। (भास्कर के पास बातचीत की ऑडियो है)

नगर निगम की मंजूरी नहीं फिर भी प्रचार के लिए बनाए पेज

बिल्डिंग बॉयलाज के मुताबिक लेंटर उठाने के लिए निगम मंजूरी नहीं देता, क्योंकि ऐसा कोई प्रावधान ही नहीं। ऐसा करने से रिस्क फैक्टर ज्यादा है। इस वजह से इसे मंजूरी नहीं मिल सकती। मगर बावजूद इसके लेंटर उठवाने के लिए ऑनलाइन पेज बनाकर लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। इसमें निर्माणाधीन बिल्डिंग की तस्वीरें डालने के साथ ही अपने फोन नंबर भी नीचे लिखे हैं, ताकि लोग आसानी से संपर्क कर सकें। हैरानीजनक है कि पाबंदी के बाद भी कैसे खुलेआम ये कारोबार चल रहा है और उसे कोई रोक नहीं रहा।

60 रुपए स्कवेयर फीट का होता है हिसाब: ट्रकों के जैक से जुगाड़ू ढंग से लेंटर उठाने वाले ठेकेदार 60 रुपए स्कवेयर फीट के हिसाब से पैसे लेते हैं। जबकि कुछ लमसम हिसाब से पैसे लेते हैं। ये रेट 90 हजार से 2.25 लाख तक का है। इसमें से जान पर खेलने वाले मजदूर को 550 रुपए दिहाड़ी मिलती है। इनका काम एक से तीन दिन का ही होता है। जबकि जैक लगाने से पहले 7 से 8 मजदूरों की ही जरूरत होती है, क्योंकि जैक की गिनती के साथ ही मजदूरों की गिनती बढ़ती है। जितने जैक लगेंगे, उतने ही मजदूर भी, क्योंकि जहां मजदूर नहीं हुआ, वहां जैक खिसकने के चांस बढ़ जाते हैं और हादसे का कारण बनते हैं।

कुछ इस तरह छपवाए इश्तिहार लैंटर उठाण वाले...

इसके अलावा जो पंफलेट और स्टिकर चिपकाए गए हैं, उसपर लिखा है कि 75 फीसदी तक बचत करो, लैंटर तोड़न तो बचो, 30 दिन दा कम्म 3 दिनां च करवाओ। लैंटर आरसीसी होवे या आरबी, वड्डा होवे या छोटा, चक्के अते डाउन किते जांदे हन। जमीन तों इक मंजिल तों दो मंजिल तक बिल्डिंग तक उच्चा करवाउंणदे लई संपर्क करो।

नोट: मकान नीह तो चकण वाला, डबल होवे या सिंगल होवे।

इधर, हादसे के बाद निगम को याद आए बिल्डिंग बायलॉज

​​​​​​​शहर में जैक लगा छतों को ऊंचा उठाने का अवैध धंधा काफी समय से चल रहा है। अब तक निगम अफसरों को बिल्डिंग बायलॉज के नियम याद नहीं आए कि ये काम अवैध है।

इस जुगाड़ू सिस्टम के कारण बड़ा हादसा होने पर नियम की आड़ में बचने की तैयारी चल रही है। मेयर बलकार संधू और कमिश्नर प्रदीप सभ्रवाल से लेकर एमटीपी का तर्क है कि बिल्डिंग बायलॉज में ये ऐसा कोई नियम नहीं कि कोई भी शहरवासी जैक लगाकर छत्तों को ऊपर कर सकता है।

ऐसे में अगर कोई ऐसा करता है तो वह अवैध माना जाएगा। हैरानीजनक है कि शहर में सैकड़ों इमारतों को अवैध तरीके से जैक लगाकर ऊंचा किया जा चुका है। इस बारे में नगर निगम के पास ऐसा काेई रिकॉर्ड नहीं है। जबकि अब निगम के अधिकारियों को भी ये नियम तब याद आए हैं, जब नियमों के उल्ट जैक लगाकर छत्त को ऊंचा करते समय हुए हादसे में 5 लोग मारे गए।

अब अफसर सारी जिम्मेदारी बिल्डिंग मालिक और ठेकेदार पर डाल बचाव के रास्ते ढूंढ़ रहे हैं, लेकिन बिल्डिंग ब्रांच के इंस्पेक्टरों की ये जिम्मेदारी तय होती है कि उसके अधीन आने वाले इलाकों में अगर कोई अवैध इमारत बनती है तो उसके लिए वह सीधे तौर पर जिम्मेदार होगा। जहां हादसा हुआ है, ठीक उसी के सामने एक कॉमर्शियल इमारत और बन रही है, जिसे भी अब नोटिस दिया गया है कि वहां पर पार्किंग की जगह की वॉयलेशन हुई है।

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