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कोरोनाकाल में आयुष्मान योजना का सच:आयुष्मान भारत योजना के 7.2 लाख कार्डधारक, मात्र 2 कोरोना मरीजों को मिल पाया इलाज

लुधियानाएक महीने पहलेलेखक: रागिनी कौशल
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  • किसी को बेड भरे होने तो किसी को पैनल पर न होने की बात कहकर लौटाया
  • कार्ड पर आईसीयू बेड की रोज 5 हजार लिमिट, बिना कार्ड 18 हजार तक वसूली

आयुष्मान भारत सरबत सेहत बीमा योजना के तहत होने वाले 5 लाख तक के कैशलेस इलाज का फायदा जिले के कार्डधारकों को मिल नहीं पा रहा है। हैरानीजनक है कि कोरोना की पहली लहर में जिले के एक भी कार्ड होल्डर और दूसरी लहर में अब तक महज 2 ही कार्ड होल्डरों का इलाज निजी अस्पतालों में हो सका है। यही नहीं ये अस्पताल भी राड़ा साहिब में है। यानी शहर के अंदर किसी भी अस्पताल में कार्ड होल्डर मरीज का इलाज नहीं हुआ। जिले में 725169 कार्ड होल्डर हैं। यही नहीं जिले में आयुष्मान भारत सरबत सेहत बीमा योजना के तहत जिले के 72 अस्पताल हैं। इनमें से कई अस्पतालों में कोविड मरीजों का इलाज भी चल रहा है।

बड़े अस्पतालों में नहीं मिल पा रहा योजना का लाभ
इस स्कीम के तहत कैशलेस इलाज की घोषणा तो सरकार ने कर दी है। वहीं, कोविड-19 के इलाज को भी इसमें शामिल कर दिया गया है, ताकि कार्ड होल्डर मरीजों का कैशलेस इलाज हो सके, लेकिन इसका फायदा जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा। पहले तो जिले के बड़े-प्रमुख अस्पतालों में इस योजना के तहत खुद को रजिस्टर ही नहीं करवाया गया। ऐसे में इस योजना का लाभ बड़े अस्पतालों में मिल ही नहीं पा रहा। वहीं, जिन अस्पतालों में इस योजना का लाभ लिया जा सकता है, वहां पर मरीजों को पहले पूछ लिया जाता है कि क्या वो कैश इलाज करवाएंगे या कार्ड पर। इसके बाद बेड न होने की बात कह उन्हें टाल दिया जाता है।

कार्डधारकों से निजी अस्पतालों की संवेदनहीनता पढ़िए...
केस-1: स्टाफ बोला- हमारे बेड खाली नहीं, दूसरे अस्पताल जाएं

मुझे कुछ दिनों पहले हार्ट अटैक हुआ था। इसके बाद सांस लेने में कुछ समस्या का सामना करना पड़ा। बड़े अस्पतालों में पूछा तो वहां आयुष्मान कार्ड नहीं चलता था। ऐसे में हमने उन अस्पतालों में संपर्क किया, जहां पर कैशलेस इलाज कार्ड के तहत हो सकता था। हमसे पहले सारी जानकारी, सारी रिपोर्ट मांगी गई, जब उन्हें बताया कि हमारे पास कार्ड है तो कहा कि अभी हमारे पास बेड उपलब्ध नहीं है। आप किसी अन्य अस्पताल में पता कर लें। ऐसे में हमने घर पर ही डॉक्टर की सलाह लेकर इलाज करवाना बेहतर समझा। -राम लाल वर्मा

केस-2: कार्ड के बारे में सुनते ही सिविल जाने को कहा
मेरे पिता की रिपोर्ट कोविड-19 पॉजिटिव आई थी। उनके नाम पर आयुष्मान का कार्ड बना हुआ है। वो कार्ड लेकर हम 2-3 अस्पतालों में गए। पहले तो सभी एडमिट करने के लिए तैयार हो रहे थे, लेकिन जब हमने ये बताया कि कार्ड है तो उन्होंने कहा कि सिविल अस्पताल में जाकर इलाज करवा सकते हैं। हमारे पास अभी लेवल-3 का बेड खाली नहीं है और रिपोर्ट के मुताबिक लेवल-3 का बेड चाहिए होगा। ऐसे में हमें सिविल अस्पताल में आना पड़ा। सरकार के सुविधा देने के बाद भी हम उसका लाभ तक नहीं ले पा रहे। ऐसी सुविधा का क्या फायदा है। -बलविंदर सिंह

एक माह बाद मिलती है पेमेंट इसलिए भर्ती ही नहीं करते
कैशलेस स्कीम के तहत कार्ड होल्डर 5 लाख तक का इलाज साल में करवा सकते हैं। वहीं, इसके लिए हर ट्रीटमेंट का रेट भी तय है। अगर मरीज को आईसीयू बेड में रखना है तो अस्पताल को एक दिन का 4-5 हजार का ही बिल पास होगा। इसी तरह हर इलाज का अलग रेट तय है। जबकि कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए बड़े अस्पतालों 10 से 18 हजार तक, नाभ मान्यता प्राप्त अस्पताल में 9 हजार से 16.5 हजार तक और बिना नाभ मान्यता वाले 8 से 15 हजार तक रोज ले सकते हैं। यही नहीं लक्षण हल्के हों और ऑक्सीजन की जरूरत हो तो अस्पताल के अनुसार 4500-6500 तक ले सकते हैं तो ऐसे में निजी अस्पतालों में कैशलेस की जगह कैश को महत्व देकर सिर्फ बिना कार्ड होल्डर वाले मरीजों का ही इलाज किया जा रहा है।

कार्ड होल्डर ऐसे ले सकते हैं योजना का लाभ
कार्ड धारक या उसके पारिवारिक सदस्यों (जिनका नाम कार्ड में शामिल है) को अस्पताल में दाखिल होना होता है। लाभार्थी की रजिस्ट्रेशन के लिए हर अस्पताल जहां पर इस स्कीम के तहत इलाज होता है, वहां पर आयुष्मान मित्र होते हैं। वे रजिस्ट्रेशन का प्रोसेस करते हैं। इलाज शुरू होने से पहले अनुमति लेने के बाद इलाज शुरू होता है। इस कार्ड के तहत एक परिवार 5 लाख तक का इलाज करवा सकता है। अस्पताल की ओर से पूरा इलाज करने के बाद मरीज को डिस्चार्ज कर दिया जाता है। इसके बाद सरकार महीने के अंदर बिल क्लियर कर देती है।

ऐसे अस्पतालों की लिखित में दें शिकायत
अगर निजी अस्पताल इस तरह से मरीजों के साथ कर रहे हैं तो ये सही नहीं है। जिन भी मरीजों को इस तरह की समस्या आती है तो वो हमारे साथ संपर्क कर लिखित में शिकायत दे सकते हैं। हम उन अस्पतालों के खिलाफ एक्शन जरूर लेंगे। लोगों को सुविधा जो दी गई है, उसके तहत उन्हें लाभ भी मिलना चाहिए। -डॉ. किरन आहलुवालिया, सिविल सर्जन

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