पंजाब में NHM कर्मियों की हड़ताल:सरकार से नाराज हैं 12000 कर्मचारी; TB और HIV के की न जांच हो रही न दवा मिल रही

लुधियाना2 महीने पहले
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लुधियाना के सिविल अस्पताल में प्रदर्शन करते NHM मुलाजिम। - Dainik Bhaskar
लुधियाना के सिविल अस्पताल में प्रदर्शन करते NHM मुलाजिम।

पंजाब सरकार से नाराज नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के 12000 मुलाजिम हड़ताल पर चल रहे हैं। जिस कारण पंजाब में TB और HIV के मरीजों का चेकअप और इलाज बुरी तरह से प्रभावित हो गया है। यह मुलाजिम पिछले 1 माह से हड़ताल चल रहे हैं। वह पक्की नौकरी की मांग कर रहे हैं और अलग-अलग जगहों पर रोष प्रदर्शन कर रहे हैं। मगर सरकार कोई सुनवाई नहीं कर रही है। स्थानीय सिविल अस्पताल में NHM के मुलाजिम हड़ताल पर हैं।

TB सेंटर में काम करने वाले लैब टेक्निशियन अमित कुमार ने बताया कि लुधियाना में जिला स्तर की हड़ताल 20 दिन से चल रही है। वह विभाग के अधीन ठेके पर 20-20 साल से काम कर रहे हैं और हमारा वेतन बेहद कम है, जिससे घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। सभी मुलाजिमों ने कोविड काल के दौरान ड्यूटी दी है और अब हमारी ही सुनवाई नहीं हो रही है। इसलिए हमें पहल के आधार पर पक्का करना चाहिए, ताकि वह अपने परिवार का पालन पोषण कर सकें।

लुधियाना के सिविल अस्पताल में प्रदर्शन करते NHM के मुलाजिम।
लुधियाना के सिविल अस्पताल में प्रदर्शन करते NHM के मुलाजिम।

रोजाना 10 हजार लोग हो रहे परेशान

NHM मुलाजिमों की हड़ताल के कारण रोजाना प्रदेश के 10 हजार लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। पंजाब में NHM के तहत आने वाले डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ के अलावा अन्य स्टाफ भी हड़ताल पर चल रहा है। अकेले लुधियाना में रोजाना 150 मरीज TB सेंटर और इतने ही HIV मरीज अपना चेकअप करवाने, फॉलोअप देने और दवा लेने के लिए आते हैं।

NHM कर्मियों के अनुसार, सरकार की तरफ से 36 हजार मुलाजिमों को पक्का करने का दावा किया गया है, मगर वह लंबे समय से बेहद कम वेतन पर काम कर रहे हैं। इसलिए सरकार को सेहत विभाग के कर्मचारियों को जरूर पक्का करना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने हमारे जख्मों पर नमक डाला

NHM के कच्चे मुलाजिमों ने कहा कि कल ही मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने ऐलान किया है कि वह नगर निगम के अधीन सभी कच्चे मुलाजिमों को पक्का कर रहे हैं, जबकि वह भी स्टेट लेवल पर एक माह से और जिला स्तर पर पिछले 20 दिन से हड़ताल पर हैं। मगर सरकार उनकी कोई सुनवाई नहीं कर रही। अगर हमारी बात नहीं सुनी जाती है तो वह संघर्ष को और तेज करेंगे।

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