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कैप्टन का वादा चन्नी ने किया पूरा:किसान आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों के रिश्तेदारों को सौंपे नियुक्ति पत्र, गांव चौंता में एक दूसरे से लेटर छीनते नजर आए कांग्रेसी

लुधियाना25 दिन पहले
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गांव चौंता में नियुक्ति पत्र को लेकर छीना झपटी करते कांग्रेस नेता। - Dainik Bhaskar
गांव चौंता में नियुक्ति पत्र को लेकर छीना झपटी करते कांग्रेस नेता।

कृषि कानून के दौरान जान गंवाने वाले किसानों और मजदूरों के परिवारों को नौकरी देने के कैप्टन अमरिंदर सिंह के वादे को मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने पूरा करना शुरू कर दिया है। सीएम चन्नी रविवार को बठिंडा के मंडी कलां पहुंचे और किसान आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले मजदूर सुखपाल सिंह के भाई को नियुक्ति पत्र सौंपा। वहीं गांव चौंता में आप छोड़ कांग्रेस में आए जगदेव सिंह कमालू ने एक परिवार को नियुक्ति पत्र सौंपा। इस दौरान कमालू और कांग्रेस नेता गुरदेव गोरा के बीच फूट साफ नजर आई। दोनों एक दूसरे के हाथ से नियुक्ति पत्र छीनते नजर आए।

किसान आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों और मजदूरों को सरकार और किसान संगठनों की तरफ से शहीद का दर्जा दिया गया है। मुख्यमंत्री रविवार को उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा के साथ बठिंडा जिले के गांव मंडी कलां में मृतक खेत मजदूर सुखपाल सिंह (30) के घर गए थे। सुखपाल सिंह टिकरी बॉर्डर पर धरने के दौरान बीमार हो गया था। इसके बाद वह पीजीआई में उपचाराधीन भी रहा। 31 मार्च, 2021 को सुखपाल का निधन हो गया था। मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए मृतक मजदूर के भाई नत्था सिंह ने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा किए गए ऐलान के अंतर्गत परिवार को 5 लाख रुपए की वित्तीय सहायता दी गई थी और इस राशि को वह अपने खस्ता हाल घर के पुर्ननिर्माण पर खर्च कर रहे हैं।

किसान आंदोलन में जान गंवाने वाले मजदूर के भाई को नियुक्ति पत्र देते सीएम चन्नी।
किसान आंदोलन में जान गंवाने वाले मजदूर के भाई को नियुक्ति पत्र देते सीएम चन्नी।

गांव चौंता के किसान के पिता को भी सौंपा नियुक्ति पत्र
इसी कड़ी में बठिंडा जिले की रामपुरा तहसील के गांव चौंता गुरमेल सिंह को भी नियुक्ति पत्र सौंपा गया। इस दौरान आम आदमी पार्टी से कांग्रेस में आए जगदेव सिंह कमालू और अन्य कांग्रेसी नेता गुरमेल सिंह को नियुक्ति पत्र देने आए थे। दोनों में मतभेद साफ दिखा और वे एक दूसरे से नियुक्ति पत्र छीनते नजर आए थे। गुरमेल सिंह के इकलौते पुत्र जशनप्रीत सिंह (18) की इसी साल 2 जनवरी को टिकरी बॉर्डर पर मौत हो गई थी। पीड़ित परिवार से मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उनको संकट की घड़ी में से बाहर निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। इन किसानों और खेत कामगारों ने कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ाई के दौरान अपने प्राण कुर्बान कर दिए। चन्नी ने कहा कि यह कितनी शर्मनाक बात है कि केंद्र सरकार की किसान विरोधी नीतियों के कारण भारत को खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने वाले राज्य के किसान आज सड़कों पर हैं।

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किया था नौकरी का ऐलान
पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की तरफ से इसी माह ऐलान किया गया था कि किसान संघर्ष के दौरान जान गंवाने वाले किसानों और मजदूरों को नौकरी देंगे। इसके लिए एसडीएम के जरिए डिप्टी कमिश्नर ने 194 का चयन भी कर लिया गया था। मुख्यमंत्री पद से हटते ही उन्होंने दर्द भी जाहिर किया है कि उन्हें दुख है कि वह अपने हाथ से नियुक्ति पत्र नहीं सौंप सके हैं।

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