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  • Before, After And Now Of The Green Revolution, Information About The Challenges And Achievements Of PAU Will Be Available At One Place.

पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी:हरित क्रांति से पहले, बाद में और अब की खेती, चुनौतियों और पीएयू की हासिल उपलब्धियों की मिलेगी एक जगह जानकारी

लुधियाना20 दिन पहले
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  • पीएयू के कम्युनिकेशन सेंटर में बन रहा म्यूजियम, 15-20 दिन में पहला हॉल बनकर हो जाएगा तैयार

पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (पीएयू) के कम्युनिकेशन सेंटर में म्यूजियम की स्थापना की जा रही है, जोकि 15-20 दिन में पहला हॉल बनकर तैयार हो जाएगा। पीएयू ने हरित क्रांति में अहम किरदार निभाया है, लेकिन यूनिवर्सिटी की ओर से हासिल इस उपलब्धि के लिए न सिर्फ यूनिवर्सिटी के साइंटिस्ट, बल्कि अधिकारियों, खेतीबाड़ी विभाग के मुलाजिमों, किसानों ने भी पूरी मेहनत की है।

यूनिवर्सिटी की मेहनत के दम पर ही पंजाब को भारत का अन्न भंडार कहा जाता है, लेकिन खेतीबाड़ी और इससे जुड़े व्यवसायों को वैज्ञानिक तरीकों से करने के लिए यूनिवर्सिटी को लोगों तक पहुंच बनाने में काफी परेशानियां भी आई हैं। किसानों को वैज्ञानिक तरीकों से खेती करने के लिए साइंटिस्ट किसानों के खेतों में रात को जाकर खाद और अन्य तरीके लागू करके आते थे, लेकिन ये वो कहानियां हैं, जिन्हें शायद हर कोई नहीं जानता। यूनिवर्सिटी की इन्हीं चुनौतियों, उपलब्धियों और फसलों की किस्मों हर चीज के बारे में इस म्यूजियम से जानकारी मिल सकेगी।

डॉ. बलदेव ढिल्लों का है आइडिया, तीन हॉल में तैयार हो रहा म्यूजियम
एडिशनल डायरेक्टर कम्युनिकेशन डॉ. टीएस रियाड़ ने बताया कि इस म्यूजियम को स्थापित करने का आइडिया डॉ. बलदेव सिंह ढिल्लों का था। जो ये चाहते थे कि यूनिवर्सिटी के कामों और उपलब्धियों के बारे में एक ही जगह से आसानी से जानकारी मिल सके। इसके लिए हम म्यूजियम में तीन हॉल तैयार कर रहे हैं। पहले हॉल में हरित क्रांति से पहले की स्थिति, दूसरे हॉल में हरित क्रांति का दौर और तीसरे हॉल में हरित क्रांति के बाद की स्थिति के बारे में जानकारी दी जाएगी।
अब तक कितनी वैरायटी आ चुकी, इस बारे में भी पता चलेगा
डॉ. रियाड़ ने बताया कि इस म्यूजियम में फोटोज के जरिए ही सारी जानकारी मिल जाएगी। हर दौर के बारे में तस्वीरें ही बताएंगी, ताकि लोग आएं और आसानी से सारी चीजों को समझ सकें। इस म्यूजियम में हर उपलब्धि जैसे कौन-सी फसल कहां से आई, ट्रैक्टर कहां से आया, पानी कैसे पहुंचाया गया, इसके बारे में पूरी विस्तार से बताया जाएगा। अब तक कितनी वैरायटी आ चुकी है, इसके बारे में भी पता चल सकेगा। खेती के सारे इतिहास के बारे में एक ही जगह से जानकारी मिल जाएगी।

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