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  • Big Farmer Leaders Divided On The Siege Of Political Parties, We Will Oppose Only BJP Ugraha, All Parties Are The Same For Us Rajewal

सियासी दलों के घेराव पर किसान यूनियनों में मतभेद:BKU उग्राहां के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह ने कहा- हम सिर्फ भाजपा का विरोध करेंगे; बलवीर सिंह राजेवाल बोले- हमारे लिए सारी पार्टियां एक जैसी

लुधियाना।11 दिन पहले
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पंजाब में चुनावी साल के दौरान अपने-अपने तरीके से प्रचार में लगीं राजनीतिक पार्टियों के घेराव को लेकर किसान यूनियनों में मतभेद हैं। किसान यूनियनों के नेता इस मुद्दे पर दो धड़ों में बंटे नजर आ रहे हैं। दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन की अगुवाई कर रहे संयुक्त किसान मोर्चे में भी बिखराव दिख रहा है।

भारतीय किसान यूनियन (BKU) उग्राहां के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उग्राहां का मानना है कि पंजाब में सिर्फ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का विरोध होना चाहिए क्योंकि नए खेती कानून भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने ही बनाए हैं। उग्राहां ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि पंजाब में उनकी यूनियन से जुड़े लोग सिर्फ भाजपा नेताओं का विरोध करेंगे। दूसरी तरफ भारतीय किसान यूनियन राजेवाल समेत दूसरे कई संगठन सभी सियासी दलों का विरोध करने की बात पर अड़े हैं। जाहिर है कि इस मुद्दे पर पंजाब के 32 किसान संगठनों की अलग-अलग राय है और आने वाले समय में जमीनी स्तर पर काम कर रहे किसानों में भी बिखराव दिख सकता है। अगर ऐसा हुआ तो इसका सीधा असर दिल्ली में चल रहे संघर्ष पर पड़ेगा।

कानून भाजपा लाई इसलिए विरोध भी उसी का : उग्राहां

जोगिंदर सिंह उग्राहां ने फोन पर हुई बातचीत में कहा कि नए खेती कानून भाजपा की अगुवाई वाली सरकार ही लेकर आई है। प्रधानमंत्री और भाजपा के दूसरे तमाम नेता इस बात पर अड़े हैं कि कानून रद्द नहीं होंगे इसलिए उनका ही विरोध होना चाहिए। पंजाब के विधानसभा चुनाव के दौरान भाकियू उग्राहां यही काम करेगा।

पिछले दिनों चंडीगढ़ में संयुक्त किसान मोर्चे के नेताओं की राजनीतिक पार्टियों के साथ हुई बैठक और उसमें सभी सियासी दलों का विरोध करने का फैसला लेने संबंधी सवाल पर जोगिंदर सिंह उग्राहां ने कहा कि जिस बैठक में यह फैसला लिया गया, वह उसमें मौजूद नहीं थे। उग्राहां ने स्पष्ट किया कि चंडीगढ़ में जो फैसला लिया गया, वह संयुक्त किसान मोर्चा का फैसला नहीं था क्योंकि संयुक्त किसान मोर्चे में फैसले राष्ट्रीय स्तर पर लिए जाते हैं। चंडीगढ़ में जो फैसला पंजाब के संगठनों ने लिया, उससे वह इत्तेफाक नहीं रखते। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन में शामिल बहुत से संगठन ऐसे हैं, जो किसी न किसी तरह किसी न किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े हैं।

राजनीतिक पार्टियों के प्रचार का विरोध होगा : राजेवाल
दूसरी तरफ भाकियू (राजेवाल) के नेता बलबीर सिंह राजेवाल सभी सियासी दलों का विरोध करने के अपने स्टैंड पर अडिग हैं। फोन पर हुई बातचीत में राजेवाल ने कहा कि सभी राजनीतिक पार्टियों को अपना प्रचार बंद कर देना चाहिए क्योंकि इससे गांवों में भाईचारक सांझ खत्म होगी और दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे संघर्ष पर असर पड़ेगा।

राजेवाल ने कहा कि किसान संगठनों ने राजनीतिक पार्टियों को रविवार को ही स्पष्ट कर दिया था कि वह राजनीतिक सभाएं न करें। अब अगर शिरोमणि अकाली दल बादल समेत कोई भी दूसरी पार्टी जनसभाएं करेगी तो उसका विरोध होना लाजिमी है।

किसान यूनियन के दो बड़े नेताओं बलवीर सिंह राजेवाल और जोगिंदर सिंह उग्राहां में मतभेद सामने आने के बाद बाकी किसान संगठन भी बंटे हुए नजर आ रहे हैं। किरती किसान यूनियन के प्रधान रजिंदर सिंह दीपसिंहवाला ने कहा कि वह शुरू से कहते आ रहे हैं कि सभी राजनीतिक पार्टियां एक सी हैं और सभी का विरोध होना चाहिए।

मोगा में लाठीचार्ज के बाद पैदा हुआ बिखराव
दरअसल खेती कानूनों के खिलाफ आंदोलन के दौरान किसान संगठनों में मतभेद पहले भी देखने को मिल चुके हैं। पहले दिल्ली कूच, फिर पश्चिम बंगाल में भाजपा के खिलाफ प्रचार करने और अब यूपी में जनसभाएं करने को लेकर किसान संगठनों में मतभेद रहे हैं। दिल्ली में सिंघु बॉर्डर पर होने वाली बैठकों में भी किसान नेताओं के मतभेद सामने आते रहे हैं लेकिन ये पहली बार है जब एक-दूसरे के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बयानबाजी हो रही है।

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