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स्पेशल स्लो इंवेस्टिगेशन टीम:54 करोड़ की नशीली दवाइयों के मामले में भाजपा नेता नागर की भूमिका का आज तक पता नहीं कर पाए, कोर्ट के मालखाने से चोरी हुए 76 सैंपलों में 2 माह बाद भी जांच जारी

लुधियाना7 महीने पहले
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पुलिस कमिश्नर राकेश अग्रवाल की फोटो। - Dainik Bhaskar
पुलिस कमिश्नर राकेश अग्रवाल की फोटो।

बड़े मामले में गंभीरता से जांच के लिए स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) का गठन किया जाता है। मगर लुधियाना पुलिस के लिए इसके मायने नहीं हैं। पुलिस ने जिन मामलों में भी एसआईटी बनाई, वो महीनों बाद भी बेनतीजा ही रही। इसी वजह से अभी तक भी इन मामलों में टीम कोई हल नहीं निकाल पाई।

एसआईटी का गठन उन मामलों में किया जाता है, जोकि संवेदनशील होते हैं। इनमें किसी एक अपराधी की कितनी भूमिका है भी या नहीं। केस के हल एंगल को जांचने के लिए सीनियर और काबिल अफसरों को लगाया जाता है। उन्हें रिपोर्ट कुछ दिनों में पेश करनी होती है, लेकिन यहां के हालात बिल्कुल अलग हैं। रिपोर्ट पेश करना तो दूर अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया ही नहीं।

केस 1 : सियासी दबाव में एसआईटी बनाई, अफसरों का तर्क: एसीपी वरयाम सिंह के मुताबिक मामले की जांच एडीसीपी कर रहे हैं। उनके आने के बाद ही इंवेस्टिगेशन का पता चलेगा। अभी तक इंवेस्टिगेशन जारी है।

केस 2: सिर्फ नाजर को सस्पेंड कर की खानापूर्ति, चोरों का सुराग तक नहीं मिला

कोर्ट परिसर में बने ज्युडिशियल मालखाने में नशा तस्करी के मामलों के सैंपल रखे जाते हैं। 9 फरवरी को उसके अंदर से बिना ताले टूटे अंदर से नशे के 76 सैंपल चोरी हो गए। इसमें 12 सैंपल बड़े तस्करों और रिकवरी से जुड़े हैं। इसमें सरपंच गुरदीप राणो और अन्य केस शामिल रहे। पुलिस ने इस मामले में 27 दिन बाद एफआईआर रजिस्टर कर खानापूर्ति की और एसआईटी बना दी गई। इसमें नाजर को सस्पेंड किया गया।
स्टेट्स : मामले में एसआईटी नाजर की भूमिका का पता नहीं चला सकी। जबकि न तो गेट का ताला टूटा था और न कहीं और से कोई घुसा था। फिर भी पुलिस इस मामले में दो महीने बीत जाने के बाद भी जांच सिर्फ कागजों में हैं।

अफसरों का तर्क: एसआईटी प्रमुख डीसीपी सिमरतपाल ने फोन नहीं उठाया। दूसरे मेंबर एसीपी जतिंदर सिंह ने कहा कि डीसीपी इसे डील कर रहे हैं। तीसरे मेंबर एसएचओ कुलदीप सिंह ने कहा कि जांच जारी है।

केस 3: प्लॉट से मिली सिर कटी लाश बच्चे की पहचान तक नहीं कर पाए

गत दो जनवरी को जोधां के गांव सहिजाद के एक खाली प्लॉट से आठ महीने के बच्चे का सिर और धड़ दोनों अलग-अलग मिले थे। इस मामले में एक हफ्ते की जांच के बाद पुलिस को कुछ पता नहीं चला। इसके बाद एसएचओ की अगुवाई में एसआईटी बनाई गई थी, क्योंकि बच्चे की बलि तंत्र विद्या के लिए दी गई थी।
स्टेट्स : तीन महीने बीत जाने के बाद पुलिस को सिर्फ पुलिस को इतना ही पता चल पाया है कि बच्चा यहां का नहीं है, लेकिन कहां का ये भी नहीं पता कर पाए। न किसी दूसरे राज्य में बच्चे के बारे में कोई फोटो शेयर की गई। सिर्फ यहीं से हाथ खड़े कर दिए कि बच्चे की पहचान नहीं हो पा रही।

अफसरों का तर्क: एसएचओ अमृतपाल सिंह के मुताबिक बच्चे की पहचान नहीं हो पाई। सोशल मीडिया के जरिए बच्चे के परिवार के बारे में पता लगाया जा रहा है।

पुलिस कमिश्नर राकेश अग्रवाल से सीधी बात- सवाल: एसआईटी बनाने के बाद अधिकारी गंभीरता नहीं दिखाते और न ही मामलों की इंवेस्टिगेशन होती है? ऐसा नहीं है। ऐसा बड़े मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों को लगाया जाता है, जोकि जांच पूरी होने के बाद ही रिपोर्ट जमा करते हैं। सवाल: नागर के किराए के घर से मिली नशीली गोलियों के मामले में उसकी भूमिका पुलिस स्पष्ट क्यों नहीं कर रही? मामले में हमने 54 करोड़ की नशीली दवाइयां पकड़ ली। कई अपराधियों को गिरफ्तार किया। नागर की भूमिका की जांच एसआईटी कर रही है। जल्द रिपोर्ट पेश की जाएगी। सवाल: कोर्ट के ज्युडिशियल मालखाने से 76 सैंपल चोरी होने के बाद भी इस मामले को हल्के में लिया जा रहा है, कोई बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की? मामला ज्युडिशरी से जुड़ा है। लिहाजा हर सबूत जुटाने और जांच ढंग से की जानी है। इस मामले में काफी हद तक सबूत जुटाए जा चुके हैं।

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