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बस संचालकों की मनमानी:नियम तोड़ संचालक बसें भर सवारियां यूपी बिहार ले जा रहे, ओवरचार्जिंग भी जारी

लुधियानाएक महीने पहलेलेखक: अमित कुमार
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बस स्टैंड के पास बसों से गांव जाने के लिए जुटे मजदूर। - Dainik Bhaskar
बस स्टैंड के पास बसों से गांव जाने के लिए जुटे मजदूर।

प्राइवेट बस चालक कोरोना गाइडलाइन फॉलो नहीं कर रहे। यूपी-बिहार जाने वाले लोगों से ओवरचार्जिंग कर रहे हैं। सरेआम बस स्टैंड स्थित नजदीक एरिया से बसें भरकर ले जाई जा रही हैं। 1800 रुपए से 2500 रुपए तक एक व्यक्ति का किराया वसूला जा रहा है। ये प्राइवेट बसें रात में नहीं, बल्कि दिन में भरी जा रही हैं। इन बस चालकों के पास परमिट तक नहीं होता। प्रवासियों से मोटी रकम वसूल सरकारी खजाने को चूना लगा रहे हैं। इस गुंडागर्दी पर पुलिस और आरटीए भी कार्रवाई में असमर्थ है। एसीपी जतिंदर कुमार ने बताया कि निजी बस चालकों पर पर्चा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। इसके लिए एसएचओ की ड्यूटी लगा दी गई है।

50 हजार जुर्माना भरकर फिर छूट जाती हैं बसें : प्राइवेट बस चालक धड़ल्ले से बसें चला रहे हैं। अगर आरटीए की तरफ से इन बसों का चालान किया भी जाता है तो 50 हजार का जुर्माना भरकर और बसों को छुड़वा लेते हैं और फिर से इसी रूट पर बसें दौड़ाते हैं। वह जुर्माने प्रवासियों से ही वसूल करते हैं।

गांवों को लौटने के लिए प्रवासी मजबूर: लुधियाना से यूपी-बिहार को प्रवासी मजबूरी में जा रहा है। इसका कारण कोरोना, लॉकडाउन का खतरा और, काम न होना है। प्रवासी फैक्ट्रियों, कारखानों, खेतों में काम करते हैं। कोरोना के कारण कारोबार पूरी तरह से प्रभावित है। फैक्ट्रियों में पड़ा माल लोग उठाने को तैयार नहीं हो रहे हैं। वहीं, लेबर को भी छुट्टी कर दी गई है, ताकि मालिक को पैसे न देने पड़ें। प्रवासियों की मजबूरी का फायदा प्राइवेट बस चालक उठा रहे हैं। उधर, शाहकोट से बिहार जा रहे अजय ने बताया कि वह मंडी का काम करता है। मंडी में काम खत्म होने के कारण वह बिहार को वापस जा रहा है। इसके लिए उसने 2200 रुपए दिए हैं।

बस स्टैंड के बाहर से टिकट ली थी, उसके बाद यहां पार्क में बैठा दिया। पिछले 3 घंटे से बस का इंतजार कर रहे हैं। बिहार जा रहे सुनील कुमार शर्मा ने बताया कि वह मंडी में बोरी सिलाई का काम करता है। साल में 2 बार लुधियाना गेहूं-धान के सीजन में आते हैं। पहले 1400 के करीब किराया होता था, अब 2200 कर दिया है। मजबूरी में गांव जाना है। सुरेंद्र कुमार ने बताया कि वह टाइलें बनाते हैं। पिछले 10 दिनों से टायल बनाने का ऑर्डर नहीं मिला। मालिक ने कहा कि अभी काम बंद है, जब काम होगा आपको बुला लेंगे। बिना काम के बच्चे पालने मुश्किल हो रहे थे ,इसलिए गांव यूपी में जाना मजबूरी बन गया है। आरटीए सेक्रेटरी संदीप सिंह ने कहा नियमों की उल्लंघन करने और बिना परमिट के चलने वाली बसों पर कार्रवाई की जा रही है। शुक्रवार को फिर से इन पर कार्रवाई तेज की जाएगी।

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