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ऐसी लापरवाही:चार साल में बनाया पुल, फिर लाइटें लगाना भूले, रेलवे ने मंजूरी से किया इनकार; अब रस्सी के सहारे लगाईं लाइटें

लुधियाना8 महीने पहले
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जगराओं पुल पर रस्सियों से बांधकर लगाई गई लाइटें। - Dainik Bhaskar
जगराओं पुल पर रस्सियों से बांधकर लगाई गई लाइटें।
  • ट्रेनों के आवागमन पर असर पड़ने का हवाला दे रेलवे नहीं दे रहा काम की स्वीकृति

जगराओं पुल के भारत नगर चौक जाते हिस्से का काम पूरा करने में निगम-रेलवे को चार साल से ज्यादा समय लग गया। इस दौरान कई डेडलाइन मिस हुईं। आखिरकार लंबे इंतजार के बाद पुल को पब्लिक के लिए खोला तो जल्दबाजी के चक्कर में नगर निगम वहां पर स्ट्रीट लाइटें लगाना ही भूल गया। जब पुल पर रात के समय अंधेरा दिखने लगा तो निगम को फिर याद आई कि वहां पर पोल गाड़ स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएं।

मगर सूत्रों से पता चला है कि देरी से जागे निगम को रेलवे ने अब पुल पर किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक्स के काम की मंजूरी नहीं दी हैं, क्योंकि इससे ट्रेनों के आवागमन पर असर पड़ने का खतरा है। ऐसे में निगम की इस फूल के कारण नतीजा ये सामने आया है कि पुल पर टेंपरेरी तौर पर रस्सियों के सहारे स्ट्रीट लाइटें तारें लटकाकर लगा दी गई हैं।

अब निगम अपनी हद में पोल लगाने की कर रहा है तैयारी

उधर, एसडीओ बलविंदर से इस बारे में बात की गई तो उन्होंने ये तर्क दिया कि अब निगम अपनी हद में पोल गाड़कर स्ट्रीट लाइटें लगाएगा। जबकि स्ट्रक्चर पर पोल कैसे लगाए जाएंगे, इसके लिए अभी प्लानिंग करनी बाकी है। इसी तरह जब रेलवे में फिरोजपुर डिवीजन के एक अधिकारी से बात की तो उन्होंने ये बताया कि गाड़ियों को बार-बार बंद नहीं किया जा सकता है, जब रेलवे ने उन्हें पहले शेड्यूल दिया था तो तभी वे स्ट्रीट लाइट लगाने का काम भी पूरा कर सकते थे। ऐसे में रेलवे की तरफ से बार-बार ट्रेनें नहीं रोकी जा सकती।

इस पर निगम ने स्ट्रक्चर से दूर अपनी हद में ही पोल लगाने की तैयारी की है। ये काम निगम इसी हफ्ते में शुरू होगा। गौर हो कि निगम और रेलवे के बीच पुल बनाने को लेकर एकमत शुरू से ही नहीं बन पाया था। इसके चलते इस पुल के निर्माण में चार से ज्यादा का समय लग चुका है। जबकि निगम के इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट ने भी अपनी लापरवाही दिखाई और स्ट्रीट लाइटें लगाना ही भूल गया है।

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