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  • Calling The Names Of 6 Farmers From 4 Villages, They Shied Away From Giving Phone Numbers, Instead Of The Experts, Talking To The Peasants Of Kisan Morcha

मीटिंग के नाम पर खानापूर्ति:4 गांवों से बुलाए 6 किसानों के नाम बताए पर फोन नंबर देने से कतराते रहे, माहिरों की बजाय किसान मोर्चा के ओहदेदारों से की बात

लुधियाना6 दिन पहले
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कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब में आंदोलित किसान संगठनों से केंद्र सरकार के मंत्रियों द्वारा संपर्क अभियान के तहत शुक्रवार को जिले की वर्चुअल मीटिंग रखी गई। भाजपा दफ्तर में चली मीटिंग में शामिल 4 गांवों के 6 किसानों के नाम तो बताए लेकिन उनके फोन नंबर देने से पार्टी ओहदेदार अंत तक कतराते रहे।

जबकि खेतीबाड़ी माहिरों के नाम पर भी भाजपा के किसान मोर्चा के ओहदेदारों के नाम ही बताए। वहीं इस मुद्दे पर पार्टी का स्टैंड रखते हुए केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने कुल मिलाकर मोदी सरकार की उपलब्धियां गिनवाईं। ज्यादातर तीखे सवालों के उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिए।

मंत्री ने वित्तीय आंकड़ों में मोदी सरकार किसान हमदर्द बताई

मीटिंग के पहले चरण में पार्टी का पक्ष रखते हुए केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने वित्तीय आंकड़े दोहरा दावा किया कि मोदी सरकार ही किसानों की असली हमदर्द है। नए किसान कानून “अन्नदाता’ के हितों की रक्षा में मील का पत्थर साबित होंगे। साथ ही आरोप जड़ते चुनौती दी कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी व पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह कानूनों को लेकर किसानों को गुमराह कर रहे हैं।

वे मोदी सरकार द्वारा किसानों के हक में लागू योजनाओं के आंकड़ों को गलत साबित करके दिखाएं। उन्होंने आग्रह किया कि किसान केंद्र की नीतियां आंकड़ों की कसौटी पर परखें व मोदी पर भरोसा रखें कि वो किसान का अहित कभी भी नहीं होने देंगे। नए कानून में किसानों को बिचौलियों से मुक्त किया है। उन्होंने राहुल-कैप्टन की सूबे में खेती बचाओ यात्रा पर कटाक्ष करते कहा कि सोफे वाले ट्रैक्टरों पर बैठकर नहीं हितकारी नीतियों से किसानों का भला होगा।

मोदी सरकार ने मंडियों के सुधार के लिए 2500 करोड़ रुपए की अलग से व्यवस्था की। स्वामीनाथन कमेटी की सिफ़ारिशों को लागू किया। फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में भारी बढ़ोतरी की। जबकि केंद्र में मनमोहन सरकार व पंजाब में कैप्टन सरकार ने चुनावी घोषणापत्र के मुताबिक भी किसानों के हक में योजनाएं लागू नहीं कीं।

माना-अहम कदम उठाने से पहले सरकार को किसानों से लेनी चाहिए थी सहमति

इस मुद्दे पर पार्टी का स्टैंड रखते हुए केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर पहले चरण में मीडिया कर्मियों से रू-ब-रू हुए। उन्होंने ज्यादातर कई तीखे सवालों के घुमावदार जवाब दिए। मसलन, किसान संगठनों को दिल्ली मिलने के लिए बुला कृषि मंत्री क्यों नहीं मिले, इस पर उन्होंने तर्क दिया कि मिलने वाले विभागीय सचिव को पूरे मसले की बेहतर जानकारी थी।

अब खफा किसान संगठनों से क्या फिर बता करेंगे, इस पर भी दोहराया कि केंद्र सरकार किसान हमदर्द है, भला उनसे क्यों नहीं मिलेगी। बेशक एक-दो सवालों पर उन्होंने माना कि इतना अहम कदम उठाने से पहले किसानों व उनके संगठनों के बीच जाकर सहमति का माहौल बनाना चाहिए था। भाजपा भी संगठनात्मक स्तर पर इस कमी को दूर करेगी।

कथित किसानों-एक्सपर्ट को लेकर गोलमोल जवाब-दावे

वर्चुअल मीटिंग में आए किसानों के बारे में भाजपा के छोटे-बड़े नेता सही जानकारी देने से बचते रहे। ये चुनिंदा “किसान’ भी अपने बारे में कुछ भी बताने की बजाए चुप्पी साधे रहे। भाजपा जिला महासचिव कांतेंदु शर्मा के पास जानकारी देने का जिम्मा बताया, वहीं उन्होंने दावा किया कि खेतीबाड़ी के नामचीन माहिर डॉ.एसएस जौहल व भाजपा में आ चुके पूर्व सांसद हरमिंदर खालसा समेत कई एक्सपर्ट अपने घरों-दफ्तरों से वर्चुअल मीटिंग में जुड़े।

बाकी एक्सपर्ट बतौर भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव सुखमिंदर पाल सिंह गरेवाल समेत मोर्चे के कई छोटे-बड़े ओहदेदारों के नाम गिनवा दिए, जो पार्टी दफ्तर में आए थे। आंदोलित किसान संगठनों के प्रतिनिधि न बुलाने पर तर्क दिया कि उनमें शामिल कुछ विपक्षी दलों के लोग बेवजह मीटिंग का माहौल बिगाड़ते।

आए किसानों के बारे में कई घंटे बाद भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी ने चार गांवों के छह किसानों के नाम बताए, मगर संपर्क के लिए उनके फोन नंबर नहीं बताए। लिहाजा यह तस्दीक ही नहीं हो सकी कि किसान कौन थे। जबकि मीटिंग में ही चर्चा रही कि मौजूद कथित किसान पहले से ही भाजपा व उसके सहयोगी संगठनों से जुड़े थे।

विपक्ष की सियासी साजिश बता किए राजनीतिक हमले

इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस समेत अन्य दलों पर चुनावों के मद्देनजर सियासी साजिश रचने का आरोप लगाया। लगे हाथों उनके साथ मौजूद भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने आरोप जड़ा कि पंजाब भाजपा के अध्यक्ष अश्वनी शर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय सांपला पर और अमृतसर व लुधियाना के भाजपा दफ्तरों में कांग्रेसियों ने परोक्ष-अपरोक्ष हमले किए। विपक्ष भाजपा के विरोध में किसानों को बरगला व साजिशें कर पंजाब में फिर आतंकवाद जैसा माहौल पैदा करना चाहता है। सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने विवादित बयान देकर ये साबित भी कर दिया।

अहम मीटिंग, मगर रही अव्यवस्था

तकनीकी खामियों के कारण वर्चुअल मीटिंग करीब आधे घंटे देरी से शुरू हो सकी। लिहाजा केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर को बीच में कई बार रुकावट के बाद महज पौन घंटे में पहला सत्र निपटाना पड़ा। इस दौरान भाजपा जिला अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंघल व वरिष्ठ ओहदेदार भी अव्यवस्था से नाराज दिखे। मीटिंग शुरू होते ही लाइट चले जाने के बाद पहले से तैयारी न होने के कारण जेनरेटर चालू करने में भी समय लगा।

मीटिंग में जुड़े वरिष्ठ नेता

दिल्ली में केंद्रीय मंत्री के साथ भाजपा महासचिव तरुण चुघ व प्रवक्ता संबित पात्रा मौजूद थे। जबकि चंडीगढ़ में प्रांतीय संगठन मंत्री दिनेश कुमार, प्रदेश महामंत्री डॉ.सुभाष शर्मा रहे। जबकि लुधियाना में प्रदेश महामंत्री जीवन गुप्ता, प्रदेश कोषाध्यक्ष गुरदेव शर्मा देबी के अलावा पार्टी व सहयोगी संगठनों से रविंदर अरोड़ा, विपन महाजन, बिक्रमजीत सिंह चीमा, राम गुप्ता, दविंदर सिंह घुम्मन आदि उपस्थित थे।

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