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कैप्टन के करीबी पटियाला के मेयर सस्पेंड:नगर निगम हाउस की बैठक में जबर्दस्त हंगामा, अब अविश्वास और विश्वास प्रस्ताव को लेकर पेंच

लुधियाना2 महीने पहले
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पंजाब में पूर्व CM कैप्टन अमरिंदर सिंह के गृहनगर पटियाला में उनके करीबी और नगर निगम मेयर संजीव शर्मा उर्फ बिट्टू को राज्य सरकार ने सस्पेंड करने की बात कही है। इसकी जानकारी पंजाब के लोकल बॉडीज मिनिस्टर ब्रह्म महिंद्रा ने दी।

महिंद्रा के अनुसार, पटियाला नगर निगम के पार्षदों ने मेयर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए लोकल बॉडीज महकमे को लिखा था। इस पर महकमे की ओर से मेयर को नोटिस दिया गया। नोटिस मिलने के बाद मेयर संजीव शर्मा बिट्‌टू ने गुरुवार को विश्वास मत हासिल करने के लिए हाउस की मीटिंग बुलाई। पटियाला नगर निगम हाउस में 60 पार्षदों के अलावा 3 विधायकों के वोट हैं। बहुमत के लिए संजीव शर्मा को कम से कम 31 वोट की जरूरत थी मगर उनके पक्ष में महज 25 पार्षदों ने वोट दिया। बहुमत साबित न कर पाने की वजह से विभाग ने मेयर को सस्पेंड कर दिया।

दूसरी तरफ पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि एक धड़े की ओर से अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने की वजह से मेयर संजीव शर्मा को 60 पार्षदों वाले सदन में सिर्फ एक तिहाई बहुमत यानि 20 वोट की जरूरत थी जबकि उनके पक्ष में 25 पार्षदों ने वोट दिए। ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव गिर गया और संजीव शर्मा बिट्टू मेयर बने रहेंगे। अगर राज्य सरकार या लोकल बॉडीज महकमे की ओर से मेयर के खिलाफ कोई कार्रवाई की जाती है तो वह हाईकोर्ट जाएंगे।

पटियाला नगर निगम हाउस की गुरुवार को हुई बैठक के बारे में जानकारी देते मेयर संजीव शर्मा उर्फ बिट्टू।
पटियाला नगर निगम हाउस की गुरुवार को हुई बैठक के बारे में जानकारी देते मेयर संजीव शर्मा उर्फ बिट्टू।

अपनी गलती से फंसे संजीव शर्मा

पटियाला नगर निगम के पार्षद जब मेयर संजीव शर्मा बिट्‌टू के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए तो मीटिंग उसी पर बुलाई जानी थी। मगर लोकल बॉडीज महकमे के नोटिस के जवाब में मेयर ने अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ मीटिंग बुलाने की बजाय विश्वास प्रस्ताव के लिए मीटिंग बुला ली। विरोधी उनकी इसी गलती का फायदा उठाते हुए मेयर को सस्पेंड करवाने में कामयाब हो गए। अब मेयर मान रहे हैं कि कोई टेक्नीकल गलती हो सकती है।

पटियाला नगर निगम हाउस की बैठक से पहले हुए हंगामे के दौरान मुंह पर रुमाल बांधे हुए कुछ लोग पार्षद को ले जाते हुए। इस दौरान मूकदर्शक बने पुलिसकर्मी।
पटियाला नगर निगम हाउस की बैठक से पहले हुए हंगामे के दौरान मुंह पर रुमाल बांधे हुए कुछ लोग पार्षद को ले जाते हुए। इस दौरान मूकदर्शक बने पुलिसकर्मी।

मीटिंग से पहले खूब हंगामा
मीटिंग से पहले पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह अपने पार्षदों को एक बस में लेकर नगर निगम हाउस पहुंचे। कैप्टन बस में ही हाउस गेट तक जाना चाहते थे मगर उन्हें रोक दिया गया। इसके बाद उन्हें पैदल निगम हाउस जाना पड़ा। जब कैप्टन हाउस की बैठक में जाने लगे तो उनके तीन पार्षदों को उठा लिया गया। मेयर संजीव शर्मा बिट्‌टू ने इस पर हंगामा किया। जब पार्षद और हाउस के मेंबर रहे तीनों विधायक हाउस बैठक में पहुंचे तो मेयर की कुर्सी पर सीनियर डिप्टी मेयर जोगिंदर सिंह जोगी बैठ गए। इस पर खूब हंगामा हुआ। इसके बाद हाथ उठाकर वोट डलवाए गए।

अकाली विधायक ने नहीं डाली वोट

सनौर के अकाली विधायक हरिंदर सिंह चंदूमाजरा भी पटियाला नगर निगम हाउस के मेंबर है। गुरुवार को मीटिंग में मौजूद चंदूमाजरा ने वोटिंग नहीं की। उनका कहना था कि यह समय कांग्रेस की गुटबाजी का नहीं है बल्कि काम करने का है। चुनाव में कुछ ही समय बाकी है और नगर निगम को काम करने चाहिए जबकि यहां कांग्रेसी आपस में लड़ रहे हैं।

कभी साथ-साथ थे कैप्टन और महिंद्रा, अब रास्ते अलग

पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और कैबिनेट मंत्री ब्रह्म महिंद्रा लंबे समय तक साथ-साथ रहे। महिंद्रा को हमेशा से कैप्टन का करीबी माना गया। कैप्टन सरकार में उन्हें अहम मंत्रालय मिले। जब नवजोत सिद्धू पंजाब प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष बने तब भी महिंद्रा कैप्टन के साथ नजर आए। उन्होंने यहां तक कह दिया कि सिद्धू को कैप्टन से माफी मांगनी चाहिए। मगर जैसे ही कैप्टन मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटे, महिंद्रा ने पलटी मार ली और नए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के कैंप में चले गए। पटियाला नगर निगम के मेयर संजीव शर्मा बिट्‌टू कैप्टन के करीबी हैं और इस लिहाज से उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग के दौरान महिंद्रा की साख दांव पर लगी थी। काफी हद तक महिंद्रा अपनी साख बचाने में कामयाब रहे।