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मिशन एडमिशन:पेरेंट्स की शैक्षिक योग्यता के मांग रहे सर्टिफिकेट, अगर क्वालिफिकेशन सर्टिफिकेट से मां का नाम नहीं करता मैच तो भी स्कूल कर रहे हैं परेशान

लुधियाना2 महीने पहले
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सरकार ने जारी नहीं की नेशनल एजुकेशन पॉलिसी की गाइडलाइंस, प्राइवेट स्कूलों की मनमानी जारी। - Dainik Bhaskar
सरकार ने जारी नहीं की नेशनल एजुकेशन पॉलिसी की गाइडलाइंस, प्राइवेट स्कूलों की मनमानी जारी।

नर्सरी में शहर के टॉप स्कूलों में अपने बच्चों की एडमिशन करवाना बड़ा लक्ष्य बन चुका है। सूबा सरकार की तरफ से नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 को राज्य में लागू न करने का खामियाजा पेरेंट्स भुगत रहे हैं। ये पॉलिसी कई राज्यों ने लागू की है। इस पॉलिसी के तहत नर्सरी क्लास से फॉर्मल एजुकेशन की शुरुआत की है, जोकि पहले की पॉलिसी में नहीं थी। अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन (ईसीसीई) के तहत नर्सरी की शिक्षा 3 साल से शुरू होगी, लेकिन स्कूलों ने 2.5-3.5 साल के बच्चे की एडमिशन नर्सरी में की जा रही है। यही नहीं अगर बच्चा एक भी दिन बड़ा पाया जाता है तो बच्चे को नर्सरी में एडमिशन ही नहीं मिलती। यही नहीं पेरेंट्स की शैक्षिक योग्यता भी बच्चों की एडमिशन में एक बड़ी बाधा बन रही है।

पिछले सालों के रिकॉर्ड के अनुसार देखा जाए तो अधिकतर टॉप स्कूलों की ओर से उन्हीं पेरेंट्स के बच्चों को एडमिशन दी जाती है, जिनकी या तो शैक्षिक योग्यता उच्च होती है या फिर उनका जॉब प्रोफाइल ऊंचा है। यानी अगर कोई पेरेंट अपने बच्चे को प्राइवेट स्कूल में शिक्षा दिलवाना चाहता है और उसके पास उच्च शिक्षा और अच्छी नौकरी नहीं है तो उन्हें दाखिला नहीं मिल सकेगा। वहीं, अगर किसी पेरेंट द्वारा कोई सवाल उठाया जाता है तो एडमिशन के लिए बैठे अध्यापकों द्वारा उन्हें सरकारी स्कूल में अपने बच्चों की एडमिशन करवाने के लिए कह दिया जा रहा है। सरकार की कोई गाइडलाइंस न होने के कारण पेेरेंट्स अपनी शिकायत भी नहीं दर्ज करवा पा रहे।

अगर रजिस्ट्रेशन फॉर्म में दिया बच्चे की मां का नाम शैक्षिक योग्यता सर्टिफिकेट से अलग तो नाम बदलने का देना होगा सबूत
पेरेंट्स को एडमिशन फॉर्म भरने से पहले कम से कम 10 तरह के सर्टिफिकेट तैयार करने पड़ रहे हैं। कई स्कूलों की ओर से रजिस्ट्रेशन प्रोसेस में ये साफ किया गया है कि अगर बच्चे की मां का नाम रजिस्ट्रेशन फॉर्म और उनकी शैक्षिक योग्यता के सर्टिफिकेट से अलग है तो ऐसे केस में मां का नाम बदलने का प्रूफ जरूर देना होगा। इस नियम के कारण कई पेरेंट्स के फॉर्म तक नहीं लिए जा रहे हैं।

एक्ट के तहत आती हैं पहली से 8वीं तक की क्लासें

  • ​​​​​​​प्री-प्राइमरी क्लासों की एडमिशन आरटीई एक्ट के तहत नहीं आती। इसके तहत पहली से आठवीं तक की क्लासें हैं। अभी नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 के नियम को लागू करने के बारे में कोई आदेश नहीं हैं। सरकार की घोषणा के बाद ही उन्हें लागू किया जा सकेगा। - जसविंदर कौर, डीईओ, एलिमेंट्री
जसविंदर कौर, डीईओ, एलिमेंट्री
जसविंदर कौर, डीईओ, एलिमेंट्री

​​​​​​​सिर्फ योग्यता पूछते हैं पर क्राइटेरिया नहीं रखना चाहिए

  • नर्सरी-एलकेजी में एडमिशन के लिए हम पेरेंट्स की शैक्षिक योग्यता पूछते हैं। लेकिन इसे एडमिशन का क्राइटेरिया नहीं रखना चाहिए। स्कूल में एडमिशन बच्चे के विकास के लिए की जाती है। अगर पेरेंट्स की शैक्षिक योग्यता को अहम रखा जा रहा है तो ये सही नहीं है। बाकी स्कूलों को एडमिशन के लिए नियमों का ख्याल ज़रुर रखना चाहिए। - गुरमंत कौर गिल, लुधियाना सहोदय स्कूल कॉम्प्लेक्स सेंट्रल जोन, डायरेक्टर
गुरमंत कौर गिल, लुधियाना सहोदय स्कूल कॉम्प्लेक्स सेंट्रल जोन, डायरेक्टर
गुरमंत कौर गिल, लुधियाना सहोदय स्कूल कॉम्प्लेक्स सेंट्रल जोन, डायरेक्टर
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