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चन्नी के सामने सिद्धू का ‘पंजाब-मॉडल’ लागू करने की चुनौती:नए CM के पास 18 सूत्री एजेंडा पूरा करने को महज साढ़े 3 महीने, आसान नहीं बिजली समझौते रद्द करना और नशे के सौदागरों को जेल भेजना

लुधियानाएक महीने पहलेलेखक: दिलबाग दानिश
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नवजोत सिद्धू का खेमा पूर्व CM कैप्टन को घेरने के लिए जिस पंजाब मॉडल और 18 सूत्री एजेंडे की बात करता रहा, मुख्यमंत्री बन चुके चन्नी के सामने अब उसे पूरा/लागू करने की चुनौती होगी। चन्नी के जरिए सिद्धू कैंप के पास खुद को साबित करने के लिए लगभग साढ़े 3 महीने का ही समय है। पंजाब में फरवरी 2022 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं और अमूमन डेढ़ महीने पहले चुनाव आचार संहिता लग जाती है। यानि सिद्धू कैंप के पास दिसंबर 2021 तक का ही समय है।

नवजोत सिद्धू जिस पंजाब मॉडल के जरिए इस बॉर्डर स्टेट को दोबारा अपने पैरों पर खड़ा करने का दावा करते रहे हैं, उसमें बहुत से मुद्दे ऐसे हैं जिन्हें लागू करना आसान काम नहीं है। इसमें सबसे अहम है खनन माफिया को खत्म कर तेलंगाना-तमिलनाडु की तर्ज पर सरकारी निगम बनाकर रेत निकलवाकर मार्केट में बेचना। सिद्धू दावा करते रहे हैं कि सिर्फ इतना करने से पंजाब का सारा आर्थिक संकट खत्म हो सकता है।

इसके अलावा सिद्धू के पंजाब मॉडल में सूबे को ड्रग्स-फ्री करना, बादल सरकर के कार्यकाल में निजी कंपनियों के साथ हुए पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) रद्द कर बिजली सस्ती करना, शराब माफिया पर लगाम, घर-घर रोजगार देना और प्रदेश के आंदोलनरत कर्मचारियों की मांगें पूरी करना भी शामिल है।

सिद्धू तीनों नए खेती कानून रद्द करने और पंजाब सरकार के लेवल पर किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी देने का मुद्दा भी उठाते रहे हैं। नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का प्रधान बनाते समय पार्टी हाईकमान ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को 18 सूत्री विशेष कार्यक्रम भी दिया था। इन तमाम मुद्दों में से कितने किस तरह हल होंगे? इसका लेखा-जोखा कैप्टन खेमा चन्नी सरकार से जरूर मांगेगा। विपक्षी दलों की भी इस पर नजर रहेगी।

1. ड्रग तस्करों पर सख्ती, क्या मजीठिया पर होगी कार्रवाई
नशा पंजाब में बड़ा मुद्दा रहा है। 2017 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था। नवजोत सिंह सिद्धू और डिप्टी सीएम बने सुखजिंदर रंधावा तो पंजाब में नशे खासकर चिट्टे के लिए पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रमजीत सिंह मजीठिया को सीधे दोषी ठहराते हुए उन्हें जेल में डालने की मांग करते रहे हैं। सिद्धू खेमा कैप्टन अमरिंदर सिंह पर आरोप लगाता रहा है कि वह जानबूझकर मजीठिया के खिलाफ सख्ती बरतने के ऑर्डर नहीं दे रहे। अब देखना है कि सिद्धू, चन्नी और रंधावा की तिकड़ी पंजाब को कैसे ड्रग-फ्री स्टेट बनाती है? ड्रग तस्करों व मजीठिया के खिलाफ कैसे और कितनी कार्रवाई करती है?

2. निजी कंपनियों से समझौते रद्द कर बिजली सस्ती करना
पंजाब में पिछली अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल में निजी कंपनियों के साथ पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) साइन किए गए थे। इसके तहत कंपनियों ने तलवंडी साबो, राजपुरा और गोइंदवाल साहिब में नए थर्मल प्लांट लगाए। इन प्लांट की बिजली प्रदेश सरकार खरीदती है। सिद्धू आरोप लगाते रहे हैं कि इन पीपीए की वजह से पंजाब को मजबूरन महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है और खजाने को इस बोझ से बचाने के लिए यह पीपीए तुरंत रद्द कर देने चाहिए। तब बतौर CM कैप्टन ने सवाल उठाया था कि अगर पीपीए रद्द कर दिए जाते हैं तो पंजाब को उसकी जरूरत की 14 हजार मेगावाट बिजली कहां से मिलेगी? हालांकि पिछले धान सीजन में बिजली संकट के बाद कैप्टन इन समझौतों की समीक्षा के आदेश पावरकॉम को दे चुके हैं।

3. खनन माफिया खत्म कर पंजाब का खजाना भरना
नवजोत सिंह सिद्धू और उनका खेमा इस बात को पूरी ताकत से उठाता रहा है कि पंजाब सरकार के पास रेत के अवैध खनन को रोकने के लिए न तो कोई पॉलिसी है और न ही सरकार ऐसी कोई पॉलिसी बनाना चाहती है। 2017 में कैप्टन की कैबिनेट में मंत्री बनते ही सिद्धू तेलंगाना और तमिलनाडू का मॉडल समझने के लिए खुद वहां गए थे और उसके बाद अपनी रिपोर्ट भी सरकार के सामने रखी थी मगर कैप्टन ने उसे मंजूरी नहीं दी। सिद्धू कहते रहे हैं कि अगर पंजाब में सरकारी निगम बनाकर रेत का खनन करवाया जाए और उसे मार्केट में बेचा जाए तो पंजाब को इतना रेवेन्यू मिल सकता है कि उसकी सारी आर्थिक तंगी खत्म हो जाए। कैप्टन अमरिंदर सिंह की विदाई के बाद सिद्धू नई सरकार से अपने इस महत्वाकांक्षी कदम पर क्या-कुछ करवा पाते हैं? यह देखना दिलचस्प रहेगा।

4. ट्रांसपोर्ट माफिया को खत्म करना
अकाली नेताओं पर आरोप लगते रहे हैं कि अपनी सरकार में उन्होंने बड़े लेवल पर परमिट जारी कर अपनी प्राइवेट बसें चलाईं। सिद्धू अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल पर अवैध ढंग से बसें चलाने के आरोप लगाते रहे हैं। अब सिद्धू और चन्नी के सामने गलत ढंग से जारी रूट परमिट रद्द कर ट्रांसपोर्ट माफिया पर नकेल कसने की चुनौती है। महत्वपूर्ण बात ये है कि पंजाब में अकाली नेताओं के साथ-साथ कांग्रेस के भी कई नेताओं की प्राइवेट बसें चलती हैं।

5. किसानों का सारा कर्ज माफ करना
कांग्रेस ने 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले सत्ता में आने पर सभी किसानों-मजदूरों के सारे कर्ज माफ करने का वादा किया था। कैप्टन सरकार ने कर्ज माफी की दिशा में काम तो किया मगर इसमें कई शर्तें लगा दी गई थी। नतीजा-कांग्रेस सरकार के साढ़े 4 साल के कार्यकाल में मात्र 5.64 लाख किसानों का 4 हजार 623 करोड़ रुपए का कर्ज माफ हो पाया। 2.68 लाख मजदूरों का भी सिर्फ 526 करोड़ रुपए का लोन माफ किया गया। यह मुद्दा भी कांग्रेस के 18 सूत्री कार्यक्रम में शामिल है। इस पर अब चन्नी सरकार क्या करती है? वह देखने वाली बात रहेगी।

6. किसानों को फसलों पर पंजाब में MSP देना
नए कृषि कानूनों का विरोध करते हुए राहुल गांधी जब मोगा आए थे तो वहां रैली के दौरान सिद्धू ने स्टेज से ही कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार पर सवाल उठा दिए थे। सिद्धू ने कहा था कि अगर केंद्र सरकार किसानों को उनकी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं देती है तो पंजाब सरकार को अपने लेवल पर MSP देना चाहिए। सिद्धू ने यह भी कहा था कि प्रदेश सरकार को किसानों को उन फसलों की तरफ ले जाना चाहिए जिसकी लोगों को जरूरत है। ऐसे में अब देखना होगा कि सिद्धू नए सीएम चन्नी और उनकी सरकार से इसकी व्यवस्था कैसे करवाते हैं?

7. शराब माफिया पर नकेल कसना
कैप्टन सरकार के कई कैबिनेट मंत्री और नवजोत सिंह सिद्धू कहते रहे हैं कि प्रदेश में शराब माफिया हावी है। जगह-जगह अवैध शराब बिक रही है। घर-घर में नकली फैक्ट्रियां लगाकर शराब निकाली और बेची जा रही है। इससे पंजाब का खजाना बर्बाद हो रहा है। कांग्रेस हाई कमान ने इस मुद्दे पर कैप्टन अमरिंदर सिंह को काम करने के लिए कहा था। अब देखना है कि सिद्धू और चन्नी की जोड़ी शराब माफिया से कैसे निपटती है।

शपथ ग्रहण समारोह के बाद चरणजीत चन्नी को बधाई देते गर्वनर बीएल पुरोहित, राहुल गांधी, हरीश रावत और नवजोत सिद्धू।
शपथ ग्रहण समारोह के बाद चरणजीत चन्नी को बधाई देते गर्वनर बीएल पुरोहित, राहुल गांधी, हरीश रावत और नवजोत सिद्धू।

8. घर-घर रोजगार देने का वादा पूरा करना
कांग्रेस 2017 के विधानसभा चुनाव में घर-घर रोजगार देने का वादा करके सत्ता में आई थी। कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनकी सरकार पर ये वादा पूरा नहीं करने का आरोप लगता रहा है। जुलाई-2021 में सोनिया गांधी के बुलावे पर दिल्ली पहुंचे कैप्टन को जो 18 सूत्री कार्यक्रम दिया गया था, उसमें यह मुद्दा शामिल था। सिद्धू भी इसे लेकर कैप्टन सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं। अब चन्नी को ये वादा पूरा करने का रास्ता निकालना होगा।

9. हडताली कर्मचारियों की मांगें पूरी करना
पंजाब में इस समय अध्यापक, आशा वर्कर, एएनएम, ठेका मुलाजिम, रोडवेड व पनबस मुलाजिम और डीसी कार्यालय के कर्मचारी अपनी-अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इन कर्मचारियों की संख्या एक लाख से अधिक है। सिद्धू कहते रहे हैं कि कैप्टन सरकार को हड़ताली कर्मचारियों की मांगों को पूरा करना चाहिए। अब देखना है कि वह चन्नी से इनकी मांगें पूरी करवा पाते हैं या नहीं?

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