घरों में बैठे लुधियाना के हारे हुए कांग्रेसी:संगरूर उप चुनाव में सिर्फ आशू और तलवाड़ दिखे, जिला प्रधान और मेयर डयूटियां लगाने में असमर्थ

विवेक शर्मा4 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
संगरूर उप चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार दलबीर सिंह गोल्डी के प्रचार करने पहुंचे हलका भारत भूषण आशु व संजय तलवाड़। - Dainik Bhaskar
संगरूर उप चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार दलबीर सिंह गोल्डी के प्रचार करने पहुंचे हलका भारत भूषण आशु व संजय तलवाड़।

पंजाब में 23 जून को होने जा रहे संगरूर में उपचुनाव को लेकर जिला लुधियाना की कांग्रेस बिल्कुल सक्रिय नजर नहीं आ रही। आज से पूरे 10 दिन बाद संगरूर में उपचुनाव होने जा रहे हैं। बाकी सभी राजनीतिक पार्टियों ने कमर कस ली है, लेकिन लुधियाना जिला कांग्रेस के हारे हुए विधायक अभी तक हार के गम से बाहर नहीं निकल पा रहे।

बता दें कि संगरूर में लुधियाना शहर से हलका पश्चिमी से उम्मीदवार और पंजाब कांग्रेस कमेटी के वर्किंग प्रधान भारत भूषण आशु और हलका पूर्वी से उम्मीदवार संजय तलवाड़ ही संगरूर पहुंचे हैं, जिन्होंने संगरूर पहुंचकर कांग्रेस के उम्मीदवार दलबीर सिंह खंगूड़ा (गोल्डी) के हक में मीटिंग करनी शुरू की हैं।

बता दें कि चुनाव से 11 दिन पहले ही पंजाब यूथ कांग्रेस के प्रधान बरिंदर सिंह ढिल्लों, जालंधर से विधायक प्रगट सिंह, पंजाब प्रदेश कमेटी के उप प्रधान इंद्रजीत सिंह बुलारीया पहुंचे हैं। वहीं लुधियाना जिला कांग्रेस की बात की जाए तो जिला प्रधान अश्वनी शर्मा और मेयर बलकार सिंह ने उपचुनाव को लेकर अभी तक शहर के जमीनी स्तर के वर्करों और पार्षदों से कोई बैठक नहीं की।

जिला में कांग्रेस की उपचुनाव को लेकर कोई गतिविधि न होना कहीं न कहीं कांग्रेस को शहर में कमजोर कर रहा है। हारे उम्मीदवारों द्वारा उपचुनाव में किसी तरह की कोई संजीदगी न दिखाना यह साबित कर रहा है कि हम तो हारे ही हैं, अब तुम्हें क्यों जीतने दें। वहीं दूसरी तरफ भाजपा शहर में गतिविधियों के मामले में लगातार ऊपर उठ रही है। भाजपा के प्रदेश नेता आए दिन शहर में कहीं न कहीं बैठकें कर रहे हैं। आज भी भाजपा के प्रदेश प्रधान अश्वनी शर्मा उपचुनाव पर अपने वर्करों से बैठक और रैली करने लुधियाना पहुंच रहे हैं।

चुनाव के बाद यह उम्मीदवार नहीं नजर आए

विधानसभा चुनाव 2022 के बाद जिला कांग्रेस के उम्मीदवार लोगों से दूरी बनाए हैं। न ही मीडिया में उनकी एक्टिविटी नजर आ रही है और न ही कभी शहर के किसी मुद्दे पर घरों से बाहर निकल विपक्ष की भूमिका निभा रहे। जब कभी कोई प्रदेश स्तरीय नेता लुधियाना पहुंचता है तो फिर जरूर इन हारे नेताओं को प्रदेश स्तरीय बैठकों में देखा जा सकता है।

चुनाव के बाद सुरिंदर डाबर, राकेश पांडे, कुलदीप वैद, ईश्वरजोत सिंह, विक्रम बाजवा, कमलजीत कड़वल हैं, जो जमीनी स्तर पर एक्टिव नहीं चल रहे। बता दें कि यदि जिला कांग्रेस के हारे उम्मीदवारों अभी से घरों में बैठ गए तो निगम चुनाव में लुधियाना में कांग्रेस का मेयर दोबारा बनना आसान नहीं। कई पार्षद जो कांग्रेस पार्टी से जुड़े हैं, वह खुद इस बात पर चिंतित हैं कि उनके नेता घरों में बैठे हैं।

उन पार्षदों को अभी से निगम चुनाव की टेंशन सताने लगी है। दबी जुबान में पार्षद भी कह रहे हैं कि जाखड़, वेरका के भाजपा में जाने के बाद और नवजोत सिंह सिद्धू के पटियाला जेल जाने के बाद कांग्रेस काफी कमजोर हो गई है।