ओलिंपिक से गांव लौटी डिस्कस थ्रो खिलाड़ी कमलप्रीत:पटियाला, बठिंडा और फिर काबरवाला में हुआ सम्मान, बोलीं- मेडल से चूक जाने का है मलाल, जमीनी स्तर पर खेलों पर ध्यान दे सरकार

लुधियाना/बठिंडा2 महीने पहले
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सम्मान समारोह के दौरान डिस्कस थ्रो खिलाड़ी कमलप्रीत। - Dainik Bhaskar
सम्मान समारोह के दौरान डिस्कस थ्रो खिलाड़ी कमलप्रीत।

ओलिंपिक में पदक लेने से चूकी डिस्कस थ्रो खिलाड़ी कमलप्रीत कौर वापस घर लौट आई हैं। उनका पहले पटियाला, बठिंडा और फिर श्री मुक्तसर साहिब में स्थित उनके गांव काबरवाला में सम्मान किया गया। इस दौरान अलग-अलग शख्शियतों से सम्मान पाकर वह उत्साहित तो थीं, मगर उनके मन में बिना पदक लिए लौटने का मलाल साफ दिख रहा था। पटियाला में उनका सम्मान समारोह हुआ और वह कुछ समय के लिए वहां रुकीं। इसके बाद वह बठिंडा खेल स्टेडियम पहुंचीं। यहां पर खेल विभाग की तरफ से उनका सम्मान समारोह किया गया।

मायूसी मगर मिले सम्मान ने मनोबल बढ़ाया

मीडिया से बात करते हुए कमलप्रीत ने कहा कि उन्हें मायूसी तो है कि वह पदक नहीं जीत सकी हैं। मगर खुशी इस बात की है कि उन्हें इसके बावजूद बेहद प्यार मिल रहा है। इससे उनका हौसला बढ़ा है और आने वाले टूर्नामेंट में बढ़िया प्रदर्शन करने का मनोबल बढ़ा है। उनका कहना है कि वह उस गांव में पैदा हुईं, जहां गांव में डिस्कस थ्रो जैसे खेल को कोई जानता नहीं है। मगर मेरे लक्ष्य को परिवार ने समझा और मेरा सहयोग किया। मैंने भी उनकी विश्वास की लाज रखी है और यह जरूरी भी है।

सरकार से अपील- जमीनी स्तर पर हो खेलों के लिए काम

कमलप्रीत पुराने समय को याद करते हुए वह कहती हैं कि एक समय था कि उनके पास जूते खरीदने भर के ही पैसे होते थे। मगर पिता के सहयोग और मेहनत के कारण वह विश्व स्तर की इस प्रतियोगिता में हिस्सा ले सकी हैं। वह कहती हैं कि जब उनका मैच था, उस दिन बारिश थी। इस कारण वह बढिया प्रदर्शन नहीं कर पाईं। वह स्वीकार करती हैं कि वह चूक गईं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि सरकार को जमीनी स्तर पर प्रयास करना चाहिए, ताकि बच्चों को शुरू से ही अच्छे ग्राउंड और कोच मिल सकें। उन्होंने कहा कि वह अब आने वाली विश्व चैंपियनशिप, एशिआई खेलों और कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए तैयारी करेंगी।

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