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हेल्थ टिप्स:स्मार्टफोन के ज्यादा इस्तेमाल से, बच्चों के दिमाग के विकास पर पड़ रहा असर

लुधियाना16 दिन पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • स्मार्टफोन का अधिक इस्तेमाल बच्चों की सेहत को कर रहा प्रभावित
  • स्मार्टफोन के ज्यादा इस्तेमाल से बच्चों के दिमाग का विकास प्रभावित हो रहा

एक तरफ कोविड-19 के बीच ऑनलाइन क्लासों का दबाव, दूसरी तरफ माता-पिता की सुविधा के लिए बच्चों को मोबाइल दे देना। इससे छोटे बच्चों को मोबाइल की ऐसी लत लगी है कि वे घंटों तक इस पर गेम खेलते रहते हैं, जो बच्चों की सेहत के लिए काफी खतरनाक साबित हो रहा है। स्मार्टफोन के ज्यादा इस्तेमाल से बच्चों के दिमाग का विकास प्रभावित हो रहा है। बच्चे मोटापे का शिकार हो रहे हैं।

वहीं, आलसी भी हो रहे हैं। आंखों की रोशनी पर भी असर पड़ रहा है। सिरदर्द की शिकायतें बढ़ रही हैं। अगर आपका बच्चा भी मोबाइल का आदी हो चुका है तो उसकी आदत को अभी से सुधार लें, वर्ना भविष्य में बड़ी परेशानी झेलनी पड़ सकती है। इसके लिए जरूरी है कि बच्चों को मोबाइल से दूर रख फिजिकली एक्टिविटी की तरफ रुझान बढ़ाएं।

बच्चों के लिए मोबाइल का निश्चित समय बना बरतें सख्ती

मोबाइल फोन, कंप्यूटर पर गेम खेलने के बजाय उन्हें फिजिकल एक्सरसाइज वाले खेल खेलने के लिए कहें। इनमें बैडमिंटन, टेनिस, रस्सी कूद शामिल हैं। रनिंग, साइकिलिंग और स्विमिंग भी अच्छे वर्कआउट हैं। इससे उनका ध्यान मोबाइल की तरफ थोड़ा कम होगा। बच्चों को मोबाइल देने के लिए टाइम टेबल बनाएं और इसे लेकर सख्ती भी बरतें। बच्चों के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं। उनसे बातें करें, कहानियां सुनाएं और क्विज वगैरह खेलें। बच्चों को आउटडोर एक्टिविटी में भी व्यस्त कराएं। साथ ही उनकी डाइट का भी ध्यान रखें। जंक फूड के बजाय उन्हें खाने-पीने में न्यूट्रिएंट्स वाली डाइट दें। बच्चों को खाना खाते समय मोबाइल देखने की आदत भूलकर भी डालें। संक्रमण के चलते फिलहाल स्कूल बंद हैं। बच्चे सुबह देर से उठ रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि उन्हें रोज सुबह जल्दी उठने के साथ एक्सरसाइज करवाएं। कुछ दिन लगातार ऐसा करने से वह आदत में शुमार हो जाएगा। इसमें माता-पिता को भी उनके साथ लगना होगा।

-डॉ. राजिंदर सिंह सीबिया, चाइल्ड स्पेशलिस्ट

माता-पिता बच्चों को फिजिकली एक्टिव रखने के सिखा रहे योग

बच्चे स्मार्टफोन की दुनिया में इतने व्यस्त हो गए हैं कि दिनोंदिन आलसी होते जा रहे हैं। इस वजह से मोटापा भी बढ़ रहा है। ऐसे में चिंतित माता-पिता बच्चों को फिजिकली एक्टिव रखने के लिए योग क्लासें जॉइन करा रहे हैं। कई बच्चे ऑनलाइन तो कई क्लासों में आकर योगासन सीख रहे हैं। इससे बच्चों में फुर्ती आ रही है। बच्चों के हिसाब से अलग अलग योगासन करवाए जा रहे हैं। इससे बच्चों का योग की तरफ रुझान बढ़े। दिनभर कंप्यूटर पर काम या देर तक पढ़ाई के दौरान आंखें सिर्फ थक ही नहीं जाती हैं, बल्कि स्ट्रेस का असर उनकी रोशनी पर भी पड़ सकता है। इसके लिए भी खास तरह की योग एक्सरसाइज करवाई जा रही हैं। योगासन करने से बच्चों का बिगड़ चुका स्लीपिंग ऑर्डर भी ठीक हो रहा है।

-संजीव त्यागी, योगाचार्य

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