मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED की कार्रवाई:'आम आदमी' से कांग्रेसी बने खैहरा गिरफ्तार; दिल्ली में हो सकती है पूछताछ

लुधियाना10 महीने पहले
सुखपाल सिंह खैहरा की फाइल फोटो।

विधानसभा हलके भुलत्थ से पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैहरा को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चंडीगढ़ से गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि उनकी गिरफ्तारी ड्रग्स से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में की गई है। खैहरा दो दिन से ED के चंडीगढ़ स्थित कार्यालय में जांच में शामिल हो रहे थे। गिरफ्तारी के बाद चंडीगढ़ सिविल अस्पताल में उनका मेडिकल करवाया गया।

सुखपाल सिंह खैहरा 2017 में आम आदमी पार्टी से विधानसभा चुनाव लड़कर विधायक चुने गए थे। इससे पहले उन्होंने पंजाब एकता पार्टी भी बनाई थी। इसी साल अगस्त में पूर्व CM कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में खैहरा कांग्रेस में शामिल हो गए थे।

मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग्स से जुड़ा मामला
सुखपाल सिंह खैहरा के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग्स से जुड़ा मामला चल रहा है। सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद उनसे अगली पूछताछ दिल्ली स्थित प्रवर्तन निदेशालय के कार्यालय में होगी। इससे पहले खैहरा के घर पर भी ED ने जांच की थी।

कांग्रेस में शामिल होने के समय कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ खैहरा।
कांग्रेस में शामिल होने के समय कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ खैहरा।

ED ने खैहरा के घर मारे थे छापे
केंद्रीय जांच एजेंसी़ ने 9 मार्च 2021 को सुखपाल खैहरा के चंडीगढ़, भुलत्थ स्थित घर समेत उनके तमाम ठिकानों पर दबिश दी थी। छापों से पहले ही उनकी बेटी की शादी हुई थी। तब खैहरा ने आरोप लगाया था, 'विरोधी पक्ष के लोग उनके खिलाफ षड्यंत्र रचकर फंसाने का प्रयास कर रहे हैं।' खैहरा ने बताया कि ईडी के अधिकारी उनके घर से मोबाइल फोन और बेटी की शादी के लिए खरीदे सामान की रसीद तक ले गए।

नशे के मामले में चल रही थी कार्रवाई
सुखपाल खैहरा के खिलाफ फाजिल्का की अदालत ने केस चलाने की मंजूरी दी थी। इसके बाद से वह सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर थे। हालांकि, अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि अदालत में पेश करने के दौरान ही ED इसका खुलासा करेगी। इस मामले के कारण ही खैहरा को नेता प्रतिपक्ष का पद छोड़ना पड़ा था।

खैहरा ने यूथ कांग्रेस से शुरू किया राजनीतिक सफर
सुखपाल सिंह खैहरा ने अपना राजनीतिक सफर कपूरथला की रामगढ़ पंचायत से 1994 में शुरू किया था। उनके पारिवारिक सदस्य अकाली दल से जुड़े थे और पिता सुखजिंदर सिंह खैहरा अकाली सरकार में शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। खैहरा ने कांग्रेस से अपना सियासी करियर शुरू किया। उन्हें 1996 में कपूरथला यूथ कांग्रेस का उपप्रधान बनाया गया। 1999 में खैहरा पंजाब कांग्रेस कमेटी के सचिव बने। 2005 में कपूरथला कांग्रेस प्रधान बने।

2006 में वह को-ऑपरेटिव बैंक के डायरेक्टर बने। 2007 में कांग्रेस की टिकट पर भुलत्थ से खैहरा ने विधानसभा चुनाव जीता। 2009 में वह पंजाब कांग्रेस के प्रवक्ता बने। 2012 में खैहरा भुलत्थ सीट से चुनाव हार गए। चुनाव हारने के बाद कैप्टन और खैहरा में दूरियां बढ़ीं और खैहरा ने 2015 में कांग्रेस छोड़कर आम आदमी पार्टी ज्वाइन कर ली। बाद में पंजाब एकता पार्टी बनाई और फिर AAP में शामिल हुए। 2019 में उन्होंने बठिंडा सीट से हरसिमरत कौर के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए।

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