• Hindi News
  • Local
  • Punjab
  • Ludhiana
  • Even After 7 Days, The Parents Did Not Get The Answer To The Questions, Now They Will Knock The Door Of The High Court

ट्यूशन फीस के अलावा कोई फीस नहीं जमा करवाई:7 दिन बाद भी पेरेंट्स को नहीं मिला सवालों का जवाब, अब खटखटाएंगे हाईकोर्ट का दरवाजा

लुधियाना8 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
डीसी दफ्तर पर यह बोर्ड लगाया गया था, इसे तोड़ दिया गया है। - Dainik Bhaskar
डीसी दफ्तर पर यह बोर्ड लगाया गया था, इसे तोड़ दिया गया है।
  • फीसों को लेकर स्कूलों के दबाव बनाने के बाद डीसी दफ्तर पर लगाया था बोर्ड

लुधियाना पेरेंट्स एसोसिएशन ने 5 अप्रैल को डीसी दफ्तर के बाहर 10*8 बोर्ड लगा पेरेंट्स के सवालों को उठाया। मगर इनका जवाब लंबे समय से पेरेंट्स को स्कूलों से नहीं मिल पा रहा। इनके जवाब के लिए पेरेंट्स ने जिला प्रशासन को 7 दिनों का समय दिया था, लेकिन पेरेंट्स के इन सवालों का जवाब 7 दिनों बाद भी प्रशासन का कोई अफसर नहीं दे सका। मनमानी इस कद्र बढ़ती जा रही है कि उन पेरेंट्स को स्कूलों ने ऑनलाइन पढ़ाई के लिए लिंक ही नहीं भेजा।

उन्होंने ट्यूशन फीस के अलावा कोई फीस नहीं जमा करवाई। पेरेंट्स के अनुसार अब कोर्ट के जरिए ही सारे सवालों के जवाब मांगे जाएंगे। इसमें पेरेंट्स ने प्रशासन से 2 सबसे अहम सवाल उठाए थे और उनके जवाब मांगे थे। पेरेंट्स ने प्रशासनिक अफसरों को 12 अप्रैल सुबह 10 से 12 बजे तक जवाब देने के लिए कहा था, भारत नगर चौक पर पेरेंट्स पंडाल लगा बैठे रहे, लेकिन किसी भी प्रशासनिक अधिकारी ने जवाब नहीं दिया।

सूबे के सभी 22 डीसी-डीईओ को बनाएंगे केस में पार्टी
पेरेंट्स एसोसिएशन के सदस्य संजीव प्रधान ने कहा कि एसोसिएशन ने बोर्ड इसलिए डीसी दफ्तर के बाहर लगाया था कि आते-जाते समय डीसी बोर्ड पढ़ सकें। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेशों को नहीं माना जा रहा। ऐसे में अब सात दिनों में कोर्ट में कार्रवाई करवाएंगे। केस के लिए उन सभी लोगों को शामिल किया जाएगा, जिनका बोर्ड में नाम लिखा गया है। यही नहीं सूबे के 22 जिलों के डीसी और डीईओ को कोर्ट केस में पार्टी बनाएंगे और अब कोर्ट के जरिए ही ये पूछा जाएगा कि आखिर कितने जिलों में और कितने स्कूलों में कोर्ट के दिए गए आदेशों का पालन हुआ है।

कोरोनाकाल में भी स्कूलों ने भरी जेबें
पेरेंट्स एसोसिएशन लुधियाना के प्रधान राजिंदर घई, रमन कुमार, संजीव जैन, रुपेश जैन ने कहा कि कोविड-19 की महामारी के दौरान हर वर्ग परेशान रहा, लेकिन प्राइवेट स्कूलों ने जेबें भरी हैं। ऑनलाइन पढ़ाई के लिए भी पेरेंट्स पर ही खर्चों का बोझ आया एडमिशन व एनुअल फीस के नाम पर ही स्कूलों ने करोड़ों की फीस ली है। पेरेंट्स पर अब भी लगातार दबाव बनाया जा रहा है। इस मौके पर उमेश सोनी, जसवंत मक्कड़, सतीश कोहली, बलजीत सिंह, दिनेश कुमार, नवदीप कुमार, राज बहादुर, योगेश शर्मा, गौरव जैन, दीपक कश्यप, राकेश जुल्का, कमलदीप, विजय कुमार मौजूद रहे।

पेरेंट्स ने पूछे ये सवाल

  • आखिर स्कूलों की ओर से बिल्डिंग फंड, एनुअल चार्ज, रि-एडमिशन, मिसलेनियस चार्ज, एमेलगामेटेड फंड, डेवलपमेंट चार्ज पेरेंट्स से हर साल क्यों लिए जाते हैं?
  • इनका ब्योरा दिया जाए और इन्हें कहां खर्च किया जाता है?
  • ट्यूशन फीस में कौन-से चार्ज लिए जाते हैं?
  • स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर चार्ज हर महीने क्यों लिए जाते हैं?
  • एनसीईआरटी की किताबें क्यों नहीं लगाई जाती?
  • हर साल यूनीफॉर्म क्यों बदली जाती है?
खबरें और भी हैं...