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  • Extended The Date Of Delivery Of Vehicles To 24 October, The Employees Of 80 Vehicles Were Unable To Find Themselves

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परेशानी बढ़ी:वाहनों की सुपुर्दगी की तारीख बढ़ाकर की 24 अक्टूबर, 80 वाहनों के मालिक ही नहीं ढूंढ पाए कर्मचारी

लुधियानाएक महीने पहले
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(गगनदीप रत्न) केस प्राॅपर्टी और बरामद किए गए वाहनों की वजह से कबाड़ बने थानों के हालत सुधारने में जुटी पुलिस के लिए नई मुसीबत खड़ी हो गई है। कुछ थानों ने वाहन तो जुटा लिये, लेकिन उनके मालिकों का अता-पता नहीं, ऐसे में अगर नाम ही नहीं पता तो वाहन देंगे किसे? जिनके नंबर व एड्रेस मिले, वो अब उन ठिकानों पर नहीं रहते और नंबर बंद हैं। ऐसे में मुलाजिमों की परेशानी बढ़ गई है कि जो कुछ वाहन मिले है, उन्हें किन्हें सौंपे।

थानों के मालखानों में पड़े करीब 5 हजार वाहनों को उनके मालिकों तक पहुंचाने के लिए पहले 10 अक्टूबर का समय रखा गया, लेकिन वाहनों की डिटेलिंग न होने से तारीख को बढ़ा कर 20 अक्टूबर कर दिया गया। अब फिर तारीख बढ़ा कर 24 अक्टूबर की गई है। विभागीय सूत्रों की मानें तो तैयारी अभी भी पूरी नहीं, लिहाजा तारीख दोबारा बढ़ सकती है। फिलहाल पुलिस कमिश्नर राकेश अग्रवाल ने 24 तारीख को कैंप लगाने की बात कही है।

नहीं हो पा रही वाहन और मालिकों की ट्रेसिंग

असलियत में इस समय बात सिर्फ यहां अटकी है कि वाहनों की संख्या ही नहीं बढ़ पा रही, जिनके मालिकों का पता चल गया हो। वहीं, अधिकारी इस बात का प्रेशर डाल रहे हैं कि अगर वो सुपुर्दगी के लिए कैंप का आयोजन करें तो वहां वाहनों की संख्या 100-150 से ज्यादा होनी चाहिए। अब वो ही नहीं हो पा रही।

हालांकि वकीलों को हायर कर लिया गया है और कैंप लगाने की लोकेशन्स भी तय कर ली गई है, मगर कुछ वाहनों के मालिक मिल गए और जिन वाहनों का सामान पूरा नहीं, उनके मालिक वाहन लेने से कतरा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि अभी तक 28 थानों में से सिर्फ 80 के करीब वाहनों की ही पहचान हो पाई है लेकिन पुलिस इनके मालिकों के बारे में नहीं पता कर पाई है।

वाहनों पर लगाने लगे केस नंबर

पिछले दिनों भास्कर ने प्रमुखता से एक खबर को प्रकाशित किया था कि थानों में पड़े वाहनों में ज्यादातर पर केस नंबर ही नहीं लिखा, जिसकी वजह से भी उनके मालिकों की पहचान नहीं हो पा रही। जिसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने उक्त वाहनों का चयन कर उस पर नंबरिंग करनी भी शुरू कर दी है।

पुलिस को टरकाने लगे लोग

  • एक मुलाजिम ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनके थाने की तरफ से जब वाहन के मालिक को फोन किया गया तो उसका सवाल था कि वाहन में सामान तो पूरा है न, सर वो चलना चाहिए तभी लेकर जाएंगे।
  • कुछ लोगों ने ये तर्क दिया कि उक्त वाहन में उनका एक्सीडेंट हुआ है, लिहाजा वो उनके लिए ठीक नहीं।
  • अभी इस पर काम चल रहा है, वाहनों की संख्या बढ़ाई जा रही है। उसके बाद ही कैंप का आयोजन होगा। हमारी टीमें इस पर तेजी से लगी हुई है।

-भागीरथ सिंह मीना, जाॅइंट सीपी

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