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किसान संगठनों की कमेटी गृह मंत्रालय से करेगी बात:सरकार से भेजे ड्रॉफ्ट को सही करने की मांग करेंगे, केस वापसी पर चाहते हैं ठोस आश्वासन

लुधियाना6 महीने पहले
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सिंघु बॉर्डर पर पत्रकारवार्ता के दौरान SKM की 5 सदस्य कमेटी के सदस्य। - Dainik Bhaskar
सिंघु बॉर्डर पर पत्रकारवार्ता के दौरान SKM की 5 सदस्य कमेटी के सदस्य।

केंद्र सरकार के साथ संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) की अभी सहमति नहीं बन पाई है। केंद्र की तरफ से भेजे गए मांगें मानने के ड्राफ्ट पर किसान संगठनों को आशंकाएं हैं। इसको लेकर बुधवार को दोपहर 2 बजे की मीटिंग से पहले पांच सदस्य कमेटी गृह मंत्रालय से वार्तालाप करेगी। SKM नेताओं ने साफ कर दिया है कि MSP गारंटी बिल की कमेटी कैसे बनेगी इसकी पारदर्शिता के साथ-साथ पूरे देश में दर्ज आपराधिक मामलों को रद्द करने के लिए सरकार समय निश्चित करे। इसके बाद SKM की तरफ से आंदोलन को खत्म करने का फैसला लिया जाएगा।

पांच घंटे तक चली बैठक के बाद पांच सदस्य कमेटी में शामिल बलवीर सिंह राजेवाल, शिव कुमार कक्का, अशोक धावले, युद्धवीर सिंह और गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने अपना रुख सरकार के समक्ष साफ कर दिया है। बहरहाल SKM की तरफ से सरकार के खिलाफ किए गए सभी ऐलान उसी तरह रहेंगे।

केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए ड्राफ्ट पर विचार विमर्श करते हुए किसान संगठनों के नेता।
केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए ड्राफ्ट पर विचार विमर्श करते हुए किसान संगठनों के नेता।

पांच घंटे सरकार के ड्राफ्ट पर हुई चर्चा

SKM की तरफ से सिंघु बार्डर पर सभी संगठनों की बैठक बुलाई गई थी। इस दौरान सरकार द्वारा पांच मांगें मानने का भेजे गए ड्राफ्ट पर चर्चा हुई है। MSP गारंटी बिल की ड्राफ्ट कमेटी में केंद्र व राज्य सरकार, SKM के सदस्यों को लेने के साथ-साथ अन्य किसान संगठनों को लेने की बात कही गई है। जिसे मोर्चा ने नामंजूर किया है। अशोक धावले ने कहा कि किसान नेताओं को लग रहा है कि उन संगठनों के नेताओं को इस कमेटी में लिया जा सकता है जो पहले ही कृषि कानूनों के पक्ष में और MSP के विरोध में बोल रहे थे। इस पर पारदर्शिता की मांग की गई है।

दूसरी मांग में सरकार ने कहा था कि सभी केस वापस ले लिए जाएंगे, लेकिन पहले आंदोलन समाप्त करना होगा। इस पर SKM ने फैसला लिया है कि यह सही नहीं है, सरकार पहले यह बताए कि वह कितने समय के भीतर मामले रद्द करेगी और इसका मापदंड क्या होगा। इसके अलावा केंद्र सरकार संवैधानिकक तौर पर मुआवजा देने की बात कह रही है, जबकि वह मांग रख रहे हैं कि पंजाब सरकार की तर्ज पर पांच लाख रुपए और परिवार को सरकारी नौकरी दी जाए। इन सभी बातों को लेकर वह बुधवार को गृह मंत्रालय से बात करेंगे। इसके बाद वार्तालाप पर बुधवार को दोपहर 2 बजे मीटिंग बुलाई गई है।

मंदसौर गोलीकांड का उदाहरण देकर कहा- केस वापस होने तक संघर्ष जारी रहेगा

किसान नेता शिव कुमार ने 2018 में हुए मंदसौर गोलीकांड का हवाला देते हुए कहा कि इस हादसे के दौरान 12 किसानों को गोली लगी थी। छह किसानों की मौत हुई थी। इस दौरान हुए संघर्ष में आपराधिक मामले दर्ज हुए थे। सरकार ने विधानसभा में ऐलान किया था कि सभी केस वापस लिए जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जब सरकार विधानसभा में दिए बयान को पूरा नहीं कर पा रही तो इस तरह लिखकर देने भर से कैसे मान सकते हैं। इसके अलावा जाट आंदोलन जैसे कई मामले हैं, जो अभी भी लटक रहे है। ऐसे में वह इस तरह आंदोलन वापस नहीं ले सकते हैं।

कल भी आंदोलन वापस लेने की गारंटी नहीं

पत्रकारवर्ता के दौरान गुरनाम चढ़ूनी ने साफ कर दिया है कि बिना वजह अफवाहें उड़ाई जा रही हैं कि आंदोलन समाप्त हो रहा है। बुधवार की बैठक में भी साफ नहीं है कि आंदोलन समाप्त हो रहा है। अभी तो पांच सदस्य कमेटी की सरकार से वार्तालाप शुरू हुई है। हमारा लंबा तजुर्बा है। सरकार से सभी बातें सही ढंग से मनवा लेने के बाद आंदोलन को समाप्त करने पर फैसला लिया जाएगा।

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