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दोस्तों ने लाॅकडाउन में बनाया गैंग:दोस्त ने लाकर दिया पुलिस का स्टिकर, गाड़ी पर लगा बने फर्जी सीआईए स्टाफ, 6 को ठगा

लुधियाना9 दिन पहले
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आरोपी और उनसे बरामद सामान की जानकारी देती पुलिस। - Dainik Bhaskar
आरोपी और उनसे बरामद सामान की जानकारी देती पुलिस।
  • दसवीं पास दोस्तों ने लाॅकडाउन में बनाया गैंग, सरगना समेत चारों गिरफ्तार
  • कार, पुलिस की पगड़ी, जूते, हूटर, लोगो और मास्क बरामद

फर्जी सीआईए स्टाफ के मुलाजिम बनकर लोगों से ठगी करने वाले चार दोस्तों के गिरोह को थाना डाबा की पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान सरगना मनप्रीत सिंह(25), संतोष कुमार(27), राकेश कुमार(26) और अजय तिवाड़ी(24) के रूप में हुई है।

उनके कब्जे से एक वेन्यू कार, हूटर, फ्रीकिंग लाइट, पुलिस की खाकी पगड़ी, लाल रंग के जूते, पंजाब पुलिस का लोगो, पुलिस का मास्क और 50 हजार की नकदी बरामद हुई है। इस संबंध में जाॅइंट सीपी सचिन गुप्ता, एसीपी संदीप वढेरा और एसएचओ मनजिंदर कौर ने प्रेस काॅन्फ्रेंस की। पुलिस को सूचना मिली थी कि आरोपी जोकि आपस में दोस्त हैं।

फर्जी पुलिस मुलाजिम बनकर लोगों से ठगी मारते हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने आरोपियों को उनकी गाड़ी समेत काबू कर लिया। तब वो पुलिस की वर्दी में ही थे। जिनसे पुलिस ने सारा सामान रिकवर कर लिया। अब तक उक्त मामले को लेकर पुलिस के पास 6 के करीब शिकायतें आ चुकीं है।

नशे का पर्चा, लाॅकडाउन में दुकान खोलने वालों पर कार्रवाई के नाम ठगते थे

पुलिस पड़ताल में पता चला है कि आरोपी मनप्रीत सिंह उर्फ कैप्टन जिसकी टेलीकाॅम शाॅप है। सभी आरोपी 10वीं तक ही पढ़े हुए हैं। कुछ महीने पहले उसने अपने दोस्तों के साथ मिलकर गैंग बनाने का प्लान किया। जिसके बाद एक अन्य दोस्त की मदद ली, जिसके पुलिस मुलाजिम दोस्त हैं, उससे पुलिस का लोगो और स्टिकर मंगवाया।

जिसे गाड़ी पर लगा लिया। फिर पुलिस के जूते, गाड़ी पर लाइट लगाकर वो सीआईए मुलाजिम बनकर उन इलाकों में जाते थे, जहां लोग नशा करते हैं, कर्फ्यू में दुकाने खोलते हैं और जो लोग बिना मास्क और ट्रैफिक नियम फाॅलो नहीं करते, उन्हें घेर लेते थे। फिर उन पर पर्चा दर्ज करने का डरावा देकर पैसे एेंठ लेते थे। अभी तक 6 के करीब लोगों को शिकार बनाया, जिसमें से एक ने पैसे नहीं दिए तो उसे पीट-पीट कर भगा दिया था।

एक्टिंग कर दिखाई- साहब बंदे चिट्टा वेचदे ने, लै आंवा या कर लां हिसाब

सूत्र बताते हैं कि आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को फर्जी पुलिस की एक्टिंग कर दिखाई। जिसके लिए उन्हें एक डम्मी फोन दिया गया। जिस पर आरोपी बोला, साहब चिट्टे वाले बंदे फड़े सी, लैं आंवा या एेत्थे ही कर लां हिसाब। फिर वो सामने वाले से 50 हजार की डिमांड करते थे। लेकिन ज्यादातर लोग पैसे नहीं दे पाते थे तो उनके वाहन रख लेते थे और जब वो पैसे लेकर आते थे तो उन्हें वाहन दे दिया जाता था।

लोगों ने की शिकायत, पुलिस ने ट्रैप लगाकर पकड़े आरोपी

आरोपी डाबा इलाके में गाड़ी लेकर घूमते थे। कुछ दिनों से उन्होंने एक इलाके में दुकान के सामने गाड़ी लगानी शुरू कर दी थी। जहां खड़े होकर लोगों को घेरते थे। वहां के लोगों को शक हुआ तो उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस से की। जिसके बाद पुलिस ने भी उनका ट्रैप लगाया और देखा कि वो क्या करते हैं। जब उन्हें पकड़ा, तब आरोपी एक शख्स को घेर कर पैसे मांग रहे थे।

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