झटका / सरकार अपना पक्ष रखने में फेल साबित हुई, हक के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएंगे

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  • पेरेंट्स को हाईकोर्ट से झटका
  • फैसले पर दी अपनी प्रतिक्रिया

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

लुधियाना. हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों को राहत हुए ट्यूशन फीस की वसूली के साथ एडमिशन फीस भी लेने को मंजूरी दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि निजी स्कूल 2020-21 सत्र में फीस बढ़ाने से बचें और वह 2019-20 का फीस स्ट्रक्चर ही लागू रखेें।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि स्कूल की फीस देने में अक्षम अभिभावक अपनी वित्तीय स्थिति की जानकारी देकर स्कूलों को फीस में कटौती या फीस माफी के आवेदन दे सकते हैं।

फीस पर स्कूलों से रियायत न मिलने पर अभिभावक रेगुलेटरी बॉडी को भी शिकायत दे पाएंगे। वहीं, दूसरी तरफ हाई कोर्ट के फैसले पर पेरेंट्स का गुस्सा भी सामने आया है। पेरेंट्स के मुताबिक यह दूसरी बार हुआ है कि कोर्ट ने स्कूलों के पक्ष में फैसला सुनाया है।

इससे उनका अब कोर्ट से भरोसा ही उठ गया है। इससे साफ जाहिर होता है कि कोर्ट सिर्फ स्कूलों का पक्ष सुन कर डिसिजन ले रही है।

लॉकडाउन में कई लोगों के रोजगार छिन गए, किसी के बिजनेस में लाॅस हुआ तो कोई कर्ज लेकर अपने घर का गुजारा कर रहा है। एेसे में पेरेंट्स कहां से स्कूल फीस अौर एडमिशन फीस दे। 

पेरेंट्स का पक्ष भी सुनना चाहिए

लुधियाना स्कूल पेरेंट्स एसोसिएशन के वाइस प्रधान स्वरुप सिंह ने बताया कि कोर्ट ने एक तरफा फैसला सुनाया है। जबकि उन्हें पेरेंट्स के पक्ष को भी सुनना चाहिए था। कोर्ट के इस फैसले से अब पेरेंट्स का विश्वास ही उठा गया है।

कई पेरेंट्स ऐसे हैं जो रेंट पर रह रहे हैं तो कइयों की जाॅब चली गई है। छोटी व्यापारी जिनका लॉकडाउन में काम ही बंद हो गया है। 

हाईकोर्ट का फैसला एक तरफा  

पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रधान राजिंदर घई ने बताया कि हाई कोर्ट ने जो फैसला सुनाया है वह गलत है और एक तरफा है। जिस पर सभी पेरेंट्स में रोष भी है।

पेरेंट्स अब अपने हक के लिए डबल बैंच के पास जाएंगे। अगर वहां भी अपील न सुनी गई तो सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटकटाएंगे। स्कूलों के खिलाफ पीअाईएल लगाई जाएगी। 

पेरेंट्स विरोधी फैसला, सहमत नहीं

पंजाब पेरेंट्स एसो. के कन्वीनर कृष्ण गोपाल शर्मा ने बताया कि कोर्ट ने जो फैसला सुनाया है वह समूह पेरेंट्स विरोधी है। चार महीने से लोग फ्री बैठे हैं। दुकानों और फैक्ट्रियों में काम नहीं है।

राज्य सरकार कोर्ट में अपना पक्ष रखने में फेल रही है। सरकार को चाहिए कि वह कोर्ट में अपना पक्ष रखे। पेरेंट्स की शुरू से ही डिमांड रही है कि खर्चे सरकार दें। क्योंकि पेरेंट्स तो घरों में लाॅक है अौर लाॅकडाउन में खुलने के बाद काम के भी मंदे हालात है। 

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