जीएसटी नंबरों का फर्जीवाड़ा:लोगों के पैन-आधार कार्ड एडिट कर ले रहे जीएसटी नंबर, फिर फर्जी फर्में बना 10 करोड़ तक की हुई बोगस बिलिंग

लुधियाना2 महीने पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
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  • लुधियाना, अमृतसर, मोगा समेत दूसरे राज्यों में केस आ रहे सामने पुलिस और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को ई-मेल से भेज रहे शिकायतें
  • किसी को रिटर्न भरने के समय तो किसी को लोन लेने के दौरान पता चला

इन दिनों सूबे में जीएसटी नंबरों का फर्जीवाड़ा चल रहा है। इसमें लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल करने के बाद उनकी मदद से फर्जी फर्में तैयार कर करोड़ों रुपए की बिलिंग की जा रही है। इन मामलों की शिकायतें इनकम टैक्स (आईटी) डिपार्टमेंट और पुलिस को ई-मेल के जरिए भेजी जा रही हैं। हालांकि महकमे ने भी माना है कि ये फ्राॅड बड़े स्तर पर चल रहा है।

इसके तहत पंजाब में पिछले दिनों कई फर्जी फर्मों के संचालकों को गिरफ्तार किया गया है। आंकड़ों की बात करें तो पिछले 2 साल में अभी तक ऐसी फर्मों ने 900 करोड़ से ज्यादा की फर्जी बिलिंग कर सरकार को चूना लगाया है। इसमें करीब 28 आरोपियों को पकड़ा जा चुका है। ऐसे 95 फीसदी मामलों में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जा चुका है। ऐसी ही हर जिले में ई-मेल और अफसरों को निजी तौर पर 2-3 शिकायतें आ रही हैं। इसमें लुधियाना, अमृतसर, मोगा समेत अन्य जिले शामिल हैं।

ऐसे समझिए ठगी का तरीका- कंपनी से 10 हजार के लिए जुटा रहे डाटा

दिल्ली में बैठे जीएसटी का फर्जीवाड़ा करने वाले ठगों ने पंजाब पर फोकस कर रखा है। पंजाब के सभी जिलों में उन्होंने अपने स्लीपर सैल तैयार कर रखे हैं, जोकि कंपनियों से वर्करों का रिकॉर्ड (पैन-आधार कार्ड) इकट्ठा कर ठगों को दे रहे हैं। एक आईडी के बदले 10 हजार रुपए मिल रहे हैं। इस आईडी को स्कैनर से एडिट किया जाता है। इसमें एक पता पीड़िता का होता है और दूसरा उस कंपनी का जो बोगस करती है। इसके बाद उसका बिना केवाईसी (नो युअर कस्टमर) किए फर्जी कंपनियां तैयार कर ली। इसके माध्यम से करोड़ों रुपए की फर्जी बिलिंग की जा रही है। हैरानीजनक है कि इसमें ई-मेल आईडी तक फर्जी तैयार की गई हैं, ताकि पकड़ में न आ सकें। इसमें न कुछ खरीदा जा रहा और न कुछ बेचा जा रहा। सिर्फ हवा में बिल दिखाकर सरकार से जीएसटी आईटीसी वसूली जा रही है। इसके बारे में पीड़ित को तब पता चल रहा है, जब वो रिटर्न भरने, लोन लेने या बैंक से संबंधित बाकी काम करने के लिए जा रहे हैं।

इन मामलों में करोड़ों रुपए की ठगी

केस 1- प्राइवेट कंपनी के सेल्स अफसर की 5 करोड़ की रिटर्न, लोन लेने गया तो खुलासा

मुंडियां के सिमरनजीत सिंह ने बताया कि वो एक स्टेबलाइजर बनाने वाली कंपनी में सेल्स अफसर का काम करता है। उन्होंने मकान बनाने के लिए लोन लेना था। इसके लिए वो अकाउंटेंट के पास गए थे, जब रिटर्न चेक की तो अकाउंटेंट ने उन्हें कहा कि उन्हें लोन की क्या जरूरत है, उनके खाते में तो 5-5 करोड़ की ट्रांजेक्शन होती है। इसे सुनने के बाद उनके पैरों तले से जमीन खिसक गई। उन्होंने जब चेक करवाया तो पता चला कि उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल कर दिल्ली में फर्जी जीएसटी नंबर जेनरेट कर वहां से करोड़ों को व्यापार हो रहा है। इसकी शिकायत उन्होंने आईटी विभाग और पुलिस दोनों को की है।

केस 2- अकाउंटेंट के नाम पर फर्जी फर्म, घर पहुंची पुलिस को पता चला

अमृतसर में पिछले दिनों गत्ता फैक्ट्री में अकाउंटेंट का काम करने वाले जगदीशपाल ने भी वहां के अधिकारियों को शिकायत दी थी कि दिल्ली में उनके नाम से होजरी फैक्ट्री खोलकर वहां पर 10 करोड़ की बिलिंग की जा रही है। उन्होंने शिकायत विभाग को ई-मेल की, लेकिन उनके घर विभाग की टीमें और पुलिस पहुंची तो उन्होंने विभाग से की हुई शिकायत दिखाई। हालांकि मामले का अभी तक कुछ बन नहीं पाया। मामले में ठगों ने आधार कार्ड का इस्तेमाल कर कंपनी तैयार की थी।

केस 3- लेबर के नाम पर बना डाली कंपनी

393 करोड़ की फर्जी बिलिंग के मामले में विभाग को एक आधार कार्ड राकेश कुमार के नाम से मिला था। जब उसे ट्रेस किया गया तो पता चला कि वो होजरी फैक्ट्री में लेबर का काम करता है। उससे ठगों ने दो हजार में आधार कार्ड की काॅपी और फोटो ली थी। उसे कहा गया था कि कंपनी का सर्वे चल रहा है।

साइबर सेल में भेजेंगे शिकायतें

शिकायतें साइबर सेल में भेजी जाएंगी, ताकि पता चले कि कैसे ये फ्रॉड हो रहा है। जीएसटी के पहले मामले की जांच एडीसीपी क्राइम कर रहे हैं।

-जे.एलनचेजियन, जॉइंट सीपी

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