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गुरनाम चढूनी की अमरकोट में रैली 16 को:मिशन पंजाब के तहत होने वाली रैली से किसान यूनियनों में बढ़ सकता है विवाद, राजनीतिक पार्टियों को जनसभाएं करने से रोक चुका है संयुक्त किसान मोर्चा

लुधियाना।10 दिन पहले
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करनाल में संयुक्त किसान मोर्चे का धरना खत्म होने के बाद हरियाणा के किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी फिर पंजाब आ रहे हैं। इस बार बड़ी रैली तरनतारन के अमरकोट की अनाजमंडी में रखी गई है। मजदूर किसान एकता के तले हो रही यह रैली 16 सितंबर को है और इसमें संबोधन करने के लिए चढूनी के साथ कई अन्य नेता विशेष तौर पर पहुंच रहे हैं। यह रैली ऐसे समय में हो रही है जब पंजाब के किसान चुनाव लड़ने से मना कर चुके हैं और दूसरी पार्टियों को अपनी चुनावी सभाएं नहीं करने के लिए कह रहे हैं। इस बीच चढूनी की यह रैली फिर से सियासी घमासान मचा सकती है।

चढूनी की तरफ से 'मिशन पंजाब' चलाने के लिए पंजाब के किसान संगठनों पर दबाव बनाया गया था। जब पंजाब के किसान संगठनों से साथ नहीं मिला तो वह लगातर पंजाब में एक्टिव हैं और उनकी इस सरगर्मी पर ही राजनीतिक पार्टियां संयुक्त किसान मोर्चा पर सवाल उठा रही हैं। अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर वीडियो शेयर करते हुए चढूनी ने कहा कि यह रैली संघर्ष के लिए काफी अहम होगी और इसमें बड़ी संख्या में किसानों को पहुंचना चाहिए।

अमरकोट किसान मजदूर रैली संबंध में प्रचार करते गुरनाम सिंह चढूनी।
अमरकोट किसान मजदूर रैली संबंध में प्रचार करते गुरनाम सिंह चढूनी।

मुख्यमंत्री कर चुके हैं पंजाब में प्रदर्शन न करने की अपील
प्रदेश के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने होशियारपुर दौरे के दौरान किसान संगठनों से अपील की थी कि वह पंजाब में अब संघर्ष नहीं करें। कृषि कानून भाजपा की केंद्र सरकार ने लागू किए हैं और पंजाब सरकार शुरू से इसके खिलाफ रही है। किसानों के प्रदर्शन से पंजाब को आर्थिक नुकसान हो रहा है। अब गुरनाम सिंह चढूनी यहां पर रैली करने आ रहे हैं, तो इस पर सवाल उठने तो लाजिमी हैं।

चीमा भी कर चुके सवाल- क्या किसान लडेंगे चुनाव?
आम आदमी पार्टी के नेता विपक्ष हरपाल चीमा भी सवाल कर चुके हैं कि क्या किसान पंजाब विधानसभा चुनाव में लड़ने जा रहे हैं। क्योंकि जिस तरह का माहौल बन रहा है, हो सकता है किसान नेता भी चुनाव मैदान में उतर आएं। किसान संगठनों को इस पर अपना स्टैंड सपष्ट करना चाहिए।

बीजेपी ने पहले ही कर रखा है हमलावर रुख अख्तियार
किसानों द्वारा इस तरह से रैलियां करने और दूसरी पार्टियों को रैलियां नहीं करने देने पर भारतीय जनता पार्टी पहले भी हमलावर रुख अख्तियार किए हुए है। भाजपा नेता अनिल सरीन का कहना है कि यह सरासर गलत है। किसान संगठन चुनावी माहौल खराब कर रहे हैं और हो सकता है कि वह अपने लिए जमीन तैयार कर रहे हों। जिस तरह से किसानों का राजनीतिक दखल बड़ा है, यह इसी तरफ इशारा करता है।

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