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कोरोना की मार:होजरी इंडस्ट्री का गर्मी का 4 हजार करोड़ से अधिक का माल फंसा

लुधियाना2 महीने पहलेलेखक: वैवस्वत वेंकट
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  • अभी सर्दियों की प्रोडक्शन को लेकर इंडस्ट्री में असमंजस बरकरार, अब जून में कोई फैसला ले पाएंगे कारोबारी

कोरोना की मार के चलते होजरी इंडस्ट्री मुश्किलों से जूझ रही है। मार्च से गर्मियों का सीजन शुरू हुआ तो इंडस्ट्री को इस बार अच्छे कारोबार की उम्मीद थी। मगर कोरोना की दूसरी लहर ने हाहाकार मचा दी। कई राज्यों में लॉकडाउन लगने से रिटेल काउंटरों पर होने वाली गर्मियों के कपड़ों की बिक्री प्रभावित हुई। अब हालात ये हैं कि गर्मियों का 4 हजार करोड़ तक का तैयार माल फैक्ट्रियों, शोरूम, होलसेल और रिटेल काउंटरों पर फंसा है।

हालांकि 7000 करोड़ का माल तैयार किया गया था। एक तरफ जहां कटाई के लिए गांव गई लेबर पूरी तरह से नहीं लौटी। वहीं, राज्य में लॉकडाउन और कोरोना के बढ़ते केसों के चलते यहां की लेबर भी गांव का रुख कर रही है। ऐसे में मई से ही सर्दियों के कपड़ों की प्रोडक्शन शुरू हो जाती है तो अधिकांश होजरी इंडस्ट्री ने अभी तक काम शुरू नहीं किया। इसे लेकर फैसला जून में होगा।

तीसरी लहर को ध्यान में रख शुरू करेंगे प्रोडक्शन, लेबर की कमी के कारण और गहरा सकता है संकट

  • हमारी गर्मियों की सेल ठीक रही। कुछ माल जरूर फंसा है, लेकिन सर्दियों की सैंपलिंग की तैयारी शुरू कर दी है। सर्दी की प्रोडक्शन के बारे में फैसला हम जून में ही ले पाएंगे। अभी लेबर पर ध्यान रख रहे हैं। कोरोना की तीसरी लहर का डर है, अगर सब ठीक रहा तो हम मौके के मुताबिक प्रोडक्शन शुरू करेंगे। -कुंतल जैन, डायरेक्टर, ड्यूक
  • दुकानें बंद होने से गर्मी के माल का स्टॉक फंसा है। अभी 10% लेबर की कमी है। आने वाले समय का कुछ कहा नहीं जा सकता। -संदीप जैन, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, मोंटे कार्लो
  • शोरूम के किराए, मुलाजिमों की सैलरी कहा से निकालें। फैक्ट्रियां भी बंद नहीं कर सकते। इसके अलावा हमारे पास और कोई चारा भी हैं। -राज अवस्थी, चेयरमैन, स्पोर्टकिंग
  • हम तो जैसे चारों तरफ से जकड़े गए हैं। केवल कहने को ही हफ्ते के सातों दिन 24 घंटे इंडस्ट्री चल रही है। लुधियाना की 90 फीसदी इंडस्ट्री एमएसएमई सेक्टर में है। लेबर को रोकने और मिनिमम बिजली खर्चे के हिसाब से ही फैक्ट्रियों में मजबूरन काम चल रहा है। -विनोद थापर, चेयरमैन, लुधियाना निटवियर क्लब
  • इंडस्ट्री का सिर्फ 20% माल ही बिक पाया है। केवल गर्मियों का माल बनाने वालों को घाटा है। बाकियों की उम्मीद सर्दियों के सीजन से है। -सुदर्शन जैन, अपैरल एंड निटवियर मैन्यु.एसोसिएशन
  • हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में कुछ राहत मिलेगी। इस बार गर्मियों का सीजन तो खराब हो गया। केवल 20-30% ही माल निकल पाया है। -बलबीर कुमार, डायरेक्टर, ऑक्टेव

लुधियाना की होजरी एंड टैक्सटाइल इंडस्ट्री
{टोटल 14000 यूनिट्स {इनमें से 11000 रजिस्टर्ड {5 लाख लोग एम्प्लॉयड हैं ,अभी सिर्फ 35 प्रतिशत ही काम कर रहे हैं।{15000 करोड़ टोटल टर्न ओवर {100 पर्सेंट ऑटोमेटेड

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