लगातार गिर रहा रुपया:डॉलर महंगा होने से 4 महीने में पंजाबियों की जेब में 500 करोड़ रुपए ज्यादा आए

लुधियाना5 महीने पहलेलेखक: गुलशन कुमार/ वैवस्वत वेंकट
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पंजाब में विदेशों से चार महीने में आए 1.32 बिलियन डॉलर (10 हजार 200 करोड़ रुपए) - Dainik Bhaskar
पंजाब में विदेशों से चार महीने में आए 1.32 बिलियन डॉलर (10 हजार 200 करोड़ रुपए)

डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिरता जा रहा है। महंगा होता डॉलर आयात होने वाली चीजों को महंगा कर रहा है, वहीं उन लोगों को फायदा हो रहा है जिनके परिजन विदेश से उन्हें हर माह डॉलर भेजते हैं। जनवरी से अप्रैल तक पंजाब में करीब 1.32 बिलियन डॉलर (10,200 करोड़ रुपए) आया। इन महीनों में डॉलर लगभग 5% महंगा हुआ है और इस प्रकार से पंजाब में परिवारों को उसी डॉलर की एवज में 500 करोड़ रुपए अधिक मिला। एक्सपोर्ट में पंजाब 8वें स्थान पर है।

यहां से 45 हजार करोड़ का सालाना एक्सपोर्ट होता है। वहीं आयात इससे ज्यादा लगभग 60 हजार करोड़ होता है। पंजाब में फार्मा, केमिकल, खाद्य तेल, लुब्रिकेंट्स, इंजीनियरिंग गुड्स, साइकिल पार्ट, कॉटन यार्न, फैब्रिक्स, वुल, स्क्रैप, स्पेशल स्टील्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पार्ट्स और किट, मशीनरी आदि आयात होती है। उद्योग से जुड़े लोगों ने कहा, अगर डॉलर ऐसे ही बढ़ता रहा तो इससे जुड़े प्रोडक्ट्स की कीमतों में वृद्धि होनी तय है।

देश में विदेश से भेजे जाने वाले रुपए में करीब 4.5 फीसदी पंजाब में...
वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के अनुसार 2021 में भारत 87 बिलियन डॉलर के रेमिटेंस के साथ पूरी दुनिया में टॉप पर है। अलग अलग मनी एक्सचेंज कंपनियों की रिपोर्ट्स के अनुसार देश में आए इस कुल रेमिटेंस में से 4.5 फीसदी यानि करीब 4 बिलियन डॉलर पंजाब में आए हैं। वहीं करीब इतनी ही राशि हवाला जैसे अन्य चैनलों से भी आई है। विदेश से आने वाले रेमिटेंस में केरल, गुजरात, तमिलनाडु आदि के पंजाब का ही नाम आता है।

गुजरात में अमेरिका से और केरल में खाड़ी देशों से डॉलर मनी आती है जबकि पंजाब में अमेरिका, कैनेडा, ऑस्ट्रेलिया और खाड़ी देशों से पैसा आता है। साल 2020 में भारत में 83 बिलियन डॉलर आए तो 2022 में ये आंकड़ा 90 बिलियन डॉलर से अधिक होने की उम्मीद है।

डॉलर महंगा होने पर प्रवासी परिवारों को पहले से अधिक डॉलर भेजते हैं और इन महीनों में ये ट्रेंड देखा गया है। वहीं भारतीय शेयर बाजारों के रिटर्न को देखते हुए भी काफी प्रवासी भारतीय फाइनेंशियल मार्केट में भी निवेश बढ़ा रहे हैं। उमा शंकर मेहता, चार्टर्ड अकाउंटेंट, चंडीगढ़

चिंता भी - अगर और महंगा हुआ डॉलर तो महंगे हो सकते हैं गारमेंट्स, साइिकल पार्ट्स...
होजरी-टेक्सटाइल इंडस्ट्री यहां वुल और बहुत से यार्न और फैब्रिक इंपोर्ट करती है। ऐसे में डॉलर नुकसान पहुंचा रहा है। आने वाले समय में गारमेंट्स महंगे हो सकते हैंं। चाह कर भी इंडस्ट्री एक हद से ज्यादा नुकसान नहीं झेल सकती। उपकार आहूजा,चेयरमैन, चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कॉमर्शियल अंडरटेकिंग्स, लुधियाना

डॉलर की कीमतें चढ़ती घटती रहती हैं। हां अगर यूक्रेन-रूस युद्ध चलता रहा तो डॉलर की कीमत और बढ़ सकती है। इससे इंपोर्ट में नुकसान होगा। फिर इनसे जुड़े प्रोडक्ट्स की कीमत बढ़नी तय है। ओंकार सिंह पाहवा ,सीएमडी, एवन साइकिल