'सतलुज बचाओ पंजाब बचाओ':मेधा पाटकर बोलीं- चुनाव घोष्णा पत्र में पर्यावरण संरक्षण का वादा अपने चुनाव घोषणा पत्र में शामिल करें राजनीतिक पार्टियां

लुधियाना9 महीने पहले
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लुधियाना पहुंचने पर मेधा पाटकर को सम्मानित करते समाज सेवी। - Dainik Bhaskar
लुधियाना पहुंचने पर मेधा पाटकर को सम्मानित करते समाज सेवी।

नर्मदा बचाओ आंदोलन की प्रवर्तक और सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने कहा है कि राजनीतिक पार्टियों को पर्यावरण संरक्षण संबंधी वादा भी अपने चुनाव घोषणा पत्र में दायर करना चाहिए। मेधा पाटकर रविवार को 'सतलुज बचाओ पंजाब बचाओ मुहिम' का आगाज करने यहां पहुंची थीं। उन्होंने सतलुज को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे शहरवासियों की ओर से तैयार ग्रीन मेनिफेस्टो भी जारी किया।

ग्रीन मेनिफेस्टो में लिखित मांगों को पार्टियों से अपने चुनाव घोषणा पत्र में दायर करने के लिए कहा है। समाज सेवी रणजोध सिंह ने मांग की है कि सभी पार्टियों को वादा करना चाहिए कि आज पर्यावरण के क्या हालात हैं और पांच साल बाद वह कैसे हालात देंगे।

ग्रीन मेनिफेस्टो जारी करते हुए मेधा पाटकर और लुधियाना के समाजसेवी।
ग्रीन मेनिफेस्टो जारी करते हुए मेधा पाटकर और लुधियाना के समाजसेवी।

मेधा पाटेकर यहां सतलुज दरिया के पास बन रहे इंडस्ट्रियल पार्क के पास के जंगल देखने के लिए आई थीं। उन्होंने गांव सेखोवाल के लोगों से भी बातचीत की। ग्रामीणों ने बताया कि यह गांव 1962-63 में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के आह्वान पर आबाद किया गया। लंबी लड़ाई के बाद जमीन को सुप्रीम कोर्ट से गांव के नाम करवाया था। सरकार एक साजिश के तहत दोबारा इस पर कब्जा करना चाहती है।

तीन राज्यों में नर्मदा बचाने में कर रहीं संघर्ष, सतलुज काे भी बचाना

मेधा पाटकर ने कहा कि वह नर्मदा को बचाने के लिए तीन राज्यों गुजराज, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में लड़ाई लड़ रही हैं। क्योंकि वह नर्मदा को अपनी मां मानती हैं। पंजाब में सतलुज दरिया भी इसी सम्मान का हकदार है। उन्होंने कहा कि वह सतलुज में प्रदूषण की रिपोर्ट बना कर केंद्र सरकार को भेजेंगी। सतलुज का पानी एक करोड़ लोग पी रहे हैं। सरकार जो प्रयास कर रही है वह नाकाफी हैं, प्रदूषण से लोगों की मौतें हो रही हैं।

उन्होंने कहा कि बुड्ढा दरिया के पानी से पंजाब से लेकर राजस्थान तक के लोग प्रभावित हो रहे हैं। हम महामारी से भी सबक नहीं ले रहे। मेधा पाटकर ने कहा कि पंजाब की वजह से किसान आंदोलन की जीत हुई है। गौरतलब है कि लुधियाना के मत्तेवाड़ा जंगल के करीब बन रहे इंडस्ट्रियल पार्क का स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं।

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