हाईकमान की दो टूक के बाद मान गए सिद्दू:लड़ाई झगड़े में बीते तीन माह, हाईकमान ने दिए संगठन बनाने के आदेश

लुधियाना8 महीने पहले
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चुनाव सिर पर हैं और कांग्रेस के पास संगठनातमिक ढांचा ही नहीं है। जबकि नवजोत सिंह सिद्दू प्रधान बनने के तीन माह बाद संगठन को ही खड़ा नहीं कर पाए हैं और अपनी ही सरकार से झगड़ते रहे हैं। मगर अब हाईकमान से बैठक के दौरान उन्हें साफ निर्देश हुए हैं कि वह पार्टी का संगठन बनाने की तरफ ध्यान दें। काम कैसे करना है यह हाईकमान देखेगी। पहले हरीश रावत और केसी वेणुगोपाल के साथ बैठक में इस पर गंभीर चर्चा हुई है। जब दोनों नेताओं को लगा कि नवजोत सिंह सिद्दू इसके लिए मान रहे हैं तो राहुल गांधी से मिलने का नवजोत सिंह सिद्दू को मिला है। वहां से भी साफ निर्देश हुए हैं कि वह संगठन को खड़ा करने की तरफ ध्यान दें नाकि सरकार चलाने की तरफ। इसके बाद अब नवजोत सिंह सिद़्दू को स्टेट बॉडी से लेकर निचले स्तर तक काम करना होगा। यह इस लिए भी जरूरी हो गया है क्योंकि कांग्रेस हाईकमान के पास सूचनाएं पहुंची हैं कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के संपर्क में कई पूर्व मंत्री और मौजूदा विधायक हैं।
जुलाई में प्रधान बने मगर संगठन की तरफ ध्यान नहीं
नवजोत सिंह सिद्दू को 18 जुलाई को प्रदेश का अध्यक्ष एलान दिया गया था। इसके बाद 23 जुलाई को उन्हें पद संभाल लिया था। मगर अक्टूबर का माह आधा बीत जाने के बाद भी वह संगठन की तरफ ध्यान नहीं दे पाए हैं। जबकि सितंबर का पूरा माह तो कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाने और चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाने में ही गुजर गया। इसके बाद 28 सितंबर को उनकी ओर से सरकार में नहीं चल पाने के कारण उनकी ओर से इस्तीफा दे दिया गया। सिद्धू के साथ नवनियुक्त जनरल सेक्रेटरी योगेंद्रपाल ढींगरा और कैशियर गुलजार इंदर चहल भी इस्तीफा दे गए। पंजाब में संगठन के नाम पर अब 4 वर्किंग प्रधान और एक महासचिव परगट सिंह बचे हुए थे। इनमें भी वर्किंग प्रधान संगत सिंह गिलजियां और परगट मंत्री बन चुके हैं। यह समय बेहद कीमती था, क्योंकि दूसरी पार्टियां इस दौरान लोगों के बीच जाकर अपना कद बढ़ा रही हैं।
पंजाब में जनवरी 2020 से भंग कांग्रेस संगठन
पंजाब में कांग्रेस के संगठन के लिहाज से हालात बुरे हैं। जनवरी 2020 में कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब में सभी इकाइयों को भंग कर दिया था। हालांकि सुनील जाखड़ को प्रधान पद संभालते रहने के लिए कहा गया। लेकिन पंजाब में कांग्रेस के भीतर मची कलह को देखते हुए जाखड़ को हटा सिद्धू को प्रधान लगा दिया गया। सिद्धू ने जुलाई महीने में पंजाब कांग्रेस प्रधान का पद संभाला था। उन्होंने संगठन को मजबूत करने की बात कहते हुए पंजाब कांग्रेस भवन में ही बिस्तर लगाने की बात कही थी, मगर पिछले महीने इस्तीफा देने के बाद से वह कांग्रेस भवन में नहीं गए।

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