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  • In The Lockdown, When Someone Taught Him To Make Cartoons Through Animation, Many Of Them Got The Students' Mobile Recharge At Their Expense.

संकट में समाधान के गुरु:लॉकडाउन में किसी ने एनिमेशन के जरिए कार्टून बना पढ़ाया तो कई ने अपने खर्च पर स्टूडेंट्स के मोबाइल रिचार्ज तक करवाए

लुधियानाएक वर्ष पहले
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  • कोरोनाकाल में घर बैठे स्टूडेंट्स को पढ़ाने और मुश्किलें हल करने के लिए अध्यापकोंे ने किए विशेष प्रयास

(अमित कुमार) कोविड-19 जैसे मुश्किल दौर में घर बैठे स्टूडेंट्स को पढ़ाना और उनकी मुश्किलें हल करने के लिए टीचर्स ने कड़ी मेहनत और प्रयास किए। इसके बाद यह काम आसान बन पाया। कई स्टूडेंट्स के पास पढ़ने को सामग्री नहीं। एजुकेशन डिपार्टमेंट से तालमेल कर उन्हें ये सुविधाएं दिलाई गई। टीचर्स ने कोरोनाकाल में बच्चों को समझा और उनकी समस्या का समाधान किया। इसमें पढ़ाई करवाने के अलावा उनकी आर्थिक तौर पर मदद करने में भी टीचर्स ने अहम योगदान दिया। टीचर्स डे के मौके ऐसे ही कुछ अध्यापकों के प्रयासों के बारे में पढ़िए।

पहली से 5वीं तक के स्टूडेंट्स के लिए बनाई 300 से अधिक वीडियो, डीईओ से मिला प्रशंसा पुरस्कार

सरकारी प्राइमरी स्कूल जरग कन्या और सरकारी प्राइमरी स्कूल जरगड़ी खन्ना-1 ब्लॉक के टीचर (पति-पत्नी) गुरभगत सिंह और परविंदर कौर ने बच्चों को सिलेबस से संबंधित वीडियो अलग से बनाकर भेजी हैं। इसमें एनिमेशन के जरिए कार्टून बना पढ़ाई कराई गई। पहली से 5वीं तक ये टीचर अब तक 300 से अधिक वीडियो बना चुके हैं। अलग-अलग जिलों के टीचर के अलावा पढ़ो पंजाब पढ़ाओ पंजाब की ओर से भी यह वीडियो ली गई। डीईओ ने उन्हें प्रशंसा पुरस्कार भी दिया।

मैथ पर 20 वीडियो बनाई और दूरदर्शन पर चली
सरकारी प्राइमरी स्कूल पीरूबंदा लुधियाना-2 की टीचर गगनप्रीत कौर तीसरी के बच्चों को पढ़ा रही हैं। उन्होंने मैथ विषय पर जिला स्तर के अलावा स्टेट स्तर पर 20 के करीब वीडियो बनाई और दूरदर्शन पर भी चलीं। वह अन्य विषय पर भी वीडियो तैयार कर रही हैं। जिसे यू-टयूब पर भी देखा जा सकता है। इसके अलावा विभाग की ओर से जो भी काम भेजा जाता है उसे आसान तरीके से खुद लिखकर फिर बच्चों को भेजती हैं। ताकि बच्चों को समझने में परेशानी न हो।

रविवार को स्टूडेंट्स के घर जाकर कराई पढ़ाई
सरकारी स्कूल जंडियाली के टीचर नरिंदर सिंह के 52 बच्चों में से 32 के पास ही एंड्रॉयड फोन था। कुछ बच्चे वेहड़े में रहते तो कई मोबाइल शेयर करते थे। 20-25 बच्चों को फोन भी इस दौरान रिचार्ज करवाकर दिए, ताकि उनकी पढ़ाई न छूटे। साथ ही जिन बच्चों के पास फोन नहीं, ऐसे छह बच्चों को घर जाकर पढ़ाया और सिलेबस भी पूरा करवाया। इसमें उनके साथ एक और टीचर ने सहयोग दिया।

एक टीचर और स्टूडेंट्स 103, लॉकडाउन में 178 हुए
सरकारी प्राइमरी स्कूल कूमकलां के हर टीचर के पीछे 103 स्टूडेंट्स थे, जोकि लॉकडाउन में बढ़कर 178 हो गए। मगर फिर भी उन्हें वॉट्सएप ग्रुप बना पढ़ाया गया। टीचर सरबजीत कौर के मुताबिक उनके स्कूल में ज्यादातर बच्चे गरीब परिवारों से हैं। 10% के पास फोन तक नहीं। कई बच्चे फ्रूट, करियाना की दुकान और खेतों में काम करते हैं। गुरुद्वारों में घोषणा करवा स्टूडेंट्स को विभाग की स्कीमों के बारे में बताया जा रहा है।

दिव्यांग बच्चों के लिए वीडियो बना यू-ट्यूब पर डाल रहे, 800 सब्सक्राइब भी
इंक्लूसिव एजुकेशन फाॅर डिसएबल के कोऑर्डिनेटर गुलजार शाह ने बताया कि इन बच्चों के लिए स्पेशल वीडियो बनवाई। इसमें बताया कि बच्चों को किस तरह से एक्टिविटीज करवानी है। इसके लिए यू-टयूब चैनल बना अपलोड किया गया।

इसके अलावा हर शनिवार को पेरेंट्स के साथ जूम के जरिेए मीटिंग की जाती है। हर बार अलग स्टूडेंट्स की कैटेगरी को रखा जाता है। जैसे ब्लाइंड स्टूडेंट्स के पेरेंट्स को बताया जाता है कि किस तरह बच्चों को घर पर एक्टिविटी, पढ़ाई करवानी है। इसके लिए ऑडियो क्लिप शेयर की जाती है। फिजियोथैरेपी किस तरह फायदेमंद है। पेरेंट्स घर पर किस तरह बच्चों को एक्टिविटी करवा सकते हैं, ताकि परेशानी न हो। यू-टयूब चैनल 800 लोग सब्सक्राइब कर चुके हैं।

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