जाली जमानत देने वाला मुंशी साथियों समेत काबू:वकील का मुंशी और पटवारी का कर्मी मिलकर बनाते थे फर्जी कागजात, देते थे जमानत 9 काबू

लुधियाना13 दिन पहले
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पकड़े गए गिरोह संबंधी जानकारी देते हुए डीसीपी सिमरतपाल ढींडसा एवं एडीसीपी रुपिंदर कौर - Dainik Bhaskar
पकड़े गए गिरोह संबंधी जानकारी देते हुए डीसीपी सिमरतपाल ढींडसा एवं एडीसीपी रुपिंदर कौर

अदालत में फर्जी कागजात लगाकर अपराधियों को जमानत दिलाने वाले 9 अपराधियों को पुलिस ने काबू किया है। इनमें अदालत में प्रेक्टिस करते एक वकील का मुंशी भी शामिल है। यह लोग पटवारी से जाली फर्द बनवाते थे और आधार कार्ड बनाकर जाली जमानत देते थे। पुलिस ने इनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर उनसे पूछताछ शुरू कर दी है। जानकारी देते हुए डीसीपी सिमरतपाल सिंह ढींडसा ने बताया कि सीआईए 3 प्रभारी यशपाल शर्मा ने सूचना के आधार पर रजिंदर कुमार सूद निवासी भोला कालोनी मानकवाल, मनदीप सिंह निवासी शिमलापुरी को काबू किया था। जिनसे पूछताछ में पता चला है कि यह लोग जमीन की फर्द हासिल करते थे और उस व्यक्ति का जाली आधार कार्ड बनाकर इसे अदालत में लगाकर आपराधियों की जमानत देते थे और वह बाद में अदालत में पेश ही नहीं होते थे। पुलिस ने इनमें पास से 32 आधार कार्ड, जमीन की 12 फर्द और 1वोटर कार्ड बरामद किया है। पुलिस ने इन दोनों के साथ भुपिंदर सिंह निवासी सतगुरू नगर, बबर मैक, रविंदर सिंह, गुरप्रीत सिंह, मनप्रीत सिंह और विजय कुमार को भी काबू किया है।

जाली जमानत देने वाले अरोपियों को लेकर जाती हुई पुलिस।
जाली जमानत देने वाले अरोपियों को लेकर जाती हुई पुलिस।

फोटो व नाम चेंज कर कुछ ही समय में बना देते थे आधार कार्ड
इनमें से रजिंदर कुमार सूद काफी शातिर है, वह एक साफटवेयर की सहायता से आधार कार्ड की फोटो और नंबर बदलने का माहिर है और कुछ ही समय में आधार कार्ड बना देता है। बाकी लोगों की फोटो का इस्तेमाल कर उन्हें अदालत में पेश किया जाता था और इस पर जमानत दे दी जाती थी। इनके गिरोह में अब तक दर्जनों लोगों को जमानत दिलाई है।
अदालत में चल रहे केसों की जांच करवाएगी पुलिस
डीसीपी सिमरतपाल सिंह ढींडसा ने बतााया कि वह बरामद हुए 32 अवैध आधार कार्ड के माध्यम से अदालत में चल रहे केसों की जांच करवाई जाएगी। जितने भी केसों में इनकी ओर जमानत करवाई गई है सभी को रद्द करवाया जाएगा। इन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी ताकि पता लगाया जा सके कि इनके साथ अदालत के कर्मचारी तो नहीं मिले हुए हैं।

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