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ऑनलाइन स्टडी इफेक्ट:रोशनी नापसंद, बच्चों के चश्मों का बढ़ रहा नंबर, ओपीडी में 20% मरीज बच्चे, 7-8 साल के बच्चों में भी आ रही समस्या

लुधियानाएक महीने पहले
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(रागिनी कौशल)
कोरोना के कारण अधिकतर बच्चों की क्लासेस ऑनलाइन लग रही हैं। सरकार द्वारा फिलहाल 9वीं से 12वीं के स्टूडेंट्स के लिए ऑप्शन के तौर पर क्लासेस की शुरुआत तो कर दी है। लेकिन 80-90 फीसदी पेरेंट्स द्वारा अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा रहा है। वहीं, नर्सरी से 8वीं क्लास के स्टूडेंट्स के लिए पहले की ही तरह ऑनलाइन क्लासेस लग रही हैं। वहीं, बच्चों द्वारा क्लासेस के अलावा भी अपना समय मोबाइल या स्क्रीन के सामने बिताने के कारण आंखों की समस्या गंभीर हो रही है। अब बच्चों द्वारा रोशनी को पसंद नहीं किया जा रहा। लॉकडाउन के पहले आंखों की ओपीडी में 4-5 ही बच्चे मरीज होते थे। वहीं, अब 20% मरीज बच्चे हैं। इसमें 7-8 साल के बच्चे भी शामिल हैं।

सलाह : पेरेंट्स बच्चों को हर 20 मिनट बाद ब्रेक लेने के लिए कहते रहें
डिजिटल आई स्ट्रेन के कारण बच्चों को ये समस्या आ रही है। ओपीडी में भी बच्चों की संख्या बढ़ रही है। जोकि 25-30 फीसदी ज्यादा है। 20-20-20 का नियम अपनाना चाहिए। यानि हर 20 मिनट के बाद 20 सेकेंड के लिए 20 फीट दूर देखें। वहीं, स्क्रीन या मोबाइल को अपने से ज्यादा से ज्यादा दूर रखें। पेरेंट्स कोशिश करें कि छोटी स्क्रीन के बजाए बड़ी स्क्रीन को प्राथमिकता दें। - डॉ. रमेश, आई स्पेशलिस्ट ,डॉ. रमेश सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल

बच्चे ज्यादा समय मोबाइल या स्क्रीन के सामने गुजार रहे हैं। जिसके कारण बच्चे अब कह रहे हैं कि उन्हें अंधेरे में ही रहने दिया जाए। लाइट से बच्चों की आंखों में चुभन होती है। वहीं, जिन्हें पहले से ऐनक लगी है। उनके नंबर में भी इजाफा हो रहा है। पेरेंट्स को भी ध्यान देगा होगा और बच्चों को भी स्क्रीन के बजाए फिजिकल एक्टिविटी में भी समय देना होगा। लंबे समय तक मोबाइल के आगे बच्चों को न बैठने दें। उन्हें ब्रेक लेने के लिए कहें। - डॉ. बरजिंदर राणा, आई स्पेशलिस्ट, राणा हॉस्पिटल

इस समय बच्चे ऑनलाइन क्लासेस के अलावा गेम्स और एंटरटेनमेंट के लिए भी मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल कर रहे हैं। लगातार स्क्रीन के सामने बैठने पर मसल स्पाज्म की समस्या हो जाती है, जिससे कि दूर का धुंधला दिखाई देना शुरू कर देता है। अगर शुरुआत में ही डॉक्टर को दिखा लिया जाएगा तो दवाइयों से इसे ठीक किया जा सकता है। लेकिन देरी करने पर भेंगेपन की समस्या हो सकती है। - डॉ. प्रियंका अरोड़ा, एसोसिएट प्रोफेसर, ऑफ्थलमोलॉजी विभाग, डीएमसी

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