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तालिबान आने से सिलाई मशीन इंडस्ट्री को करोड़ों का घाटा:लुधियाना में ऑर्डर रुके; चीन की व्हाइट मशीन ने भी कारोबार पर डाला असर, संसद में भी उठा मुद्दा

लुधियाना13 दिन पहले
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तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर किए गए कब्जे का असर सिलाई मशीन इंडस्ट्री पर भी पड़ने लगा है। इससे सिलाई मशीन इंडस्ट्री को करोड़ों रुपए का घाटा पड़ा है। हालात यह हैं कि वहां से प्रत्येक वर्ष आने वाला आर्डर अब नहीं आ रहा और इसे लेकर व्यापारी चिंतित नजर आ रहे हैं। दूसरा सबसे बड़ा असर कोरोना की तीसरी संभावित वेव ने भी डाला है। पिछले संसदीय सत्र में भी व्यापारियों को हो रहे नुकसान का मुद्दा उठ चुका है, लेकिन अभी समाधान नहीं हो सका है। व्यापारी लगातार सरकार से राहत की मांग कर रहे हैं।

लुधियाना की सिलाई मशीन इंडस्ट्री एसोसिएशन के प्रधान जगबीर सिंह सोखी बताते हैं कि इस समय के दौरान जब त्यौहार आने का समय रहता है, तो अफगानिस्तान से व्यापारी यहां पर सिलाई मशीन की खरीद करने आते हैं। वह लोग कैश पर सिलाई मशीन और इसके पुर्जे खरीदते हैं और वापस चले जाते हैं। इसके अलावा उनके लोकल ट्रेडर के माध्यम से प्रत्येक वर्ष अकेले अफगानिस्तान से डेढ़ लाख मशीन का कारोबार पाकिस्तान या फिर दुबई के माध्यम से होता है। इस कारण इंडस्ट्री को करोड़ों का घाटा झेलना पड़ रहा है। जगबीर सिंह सोखी खुद भी सिलाई मशीन बनाते हैं। वह कहते हैं कि उनके खुद के कई ग्राहक इस वर्ष नहीं आए हैं।

फोन पर हुई बातचीत में सोखी ने कहा कि अभी तो यही नहीं पता कि अफगानिस्तान का भविष्य क्या है। लोगों को खाने के लाले पड़े हुए हैं। ऐसे में कपड़ों की जरूरत पर उनका ध्यान ही नहीं है। इसलिए अभी इंतजार करना होगा। सोखी कहते हैं कि पहले ही कोरोना की पहली और दूसरी लहर के कारण कारोबार बिल्कुल ठप है। इस बीच अब अफगानिस्तान में कारोबार बंद होने के कारण इसका असर और भी बढ़ सकता है।

चीन की व्हाइट मशीन ने भी डाला है असर
सोखी बताते हैं कि चाइना की तरफ से व्हाइट कलर की मशीनें बनाई जा रही हैं, जो गुणवता में तो कम हैं , लेकिन उनका मूल्य भी कम है। इसका असर उनकी इंडस्ट्री पर पड़ा है। वह कहते हैं कि वह पिछले लंबे समय से इसकी मांग करते आ रहे हैं कि जल्दी ही कलस्टर बनाया जाए और वहां पर शोध होने चाहिए। अब इमारत बनकर तैयार हो गई है, तो उमीद जताई जा सकती है कि वहां पर काम भी शुरू हो जाएगा। अगर हम उसे मात देने में कामयाब रहे, तो भी मंदी से उभरने का मौका मिल सकता है।

संसद में भी उठ चुका है मुद्दा
इस बार के संसदीय सत्र में भी यह मुद्दा उठ चुका है। एक सवाल के जवाब में एमएसएमई विभाग की तरफ से जवाब देने से पहले हमारी इंडस्ट्री से पूछा था कि उन्हें कितना नुकसान हुआ है। पहली वेव के दौरान इमरजेंसी क्रेडिंग गारंटी लाइन खोली गई थी। अब भी वह उसकी मांग कर चुके हैं। मगर इसका फायदा होता दिख नहीं रहा है। वह सरकार से मांग कर रहे हैं कि सरकार को उनकी तरफ ध्यान देना चाहिए ताकि डूब रही इंडस्ट्री को बचाया जा सके।

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