लुधियाना के गांव उटालां में नेताओं को 'नो एंट्री':प्रवेशद्वार पर लगाया बोर्ड, चेतावनी- किसी भी पार्टी का उम्मीदवार हो या नेता, सवालों के जवाब देकर ही घुस सकेंगे गांव में

लुधियानाएक महीने पहले
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गांव के एंट्री प्वाइंट पर लगाया गया चेतावनी बोर्ड। - Dainik Bhaskar
गांव के एंट्री प्वाइंट पर लगाया गया चेतावनी बोर्ड।

रैलियों में सवाल पूछने जा रहे किसानों पर लाठियां भांजी जा रही हैं। नेता किसानों को अपने आस-पास आने तक नहीं देते। ऐसे में गांवों के लोगों ने भी नया रास्ता अपना लिया है। ग्रामीणों ने चुनाव में वोट मांगने आने वाले नेताओं से सवाल पूछने के लिए बाकायदा बोर्ड लगा दिए हैं। जिले के गांव उटालां निवासियों ने यह पहल की है। उनकी तरफ से गांव की एंट्री पर बोर्ड लगा दिया गया है। इस पर 11 सवाल या वह बातें लिखी गई हैं, जिसका जवाब उनकी तरफ से मांगा जा रहा है।

इन सवालों और बातों का जवाब जिस किसी भी पार्टी के नेता या उमीदवार के पास होगा, वह ही इस गांव में घुस सकता है। वरना उसकी एंट्री बैन रहेगी। यह फैसला पंचायत की तरफ से सर्वसम्मति से लिया गया है। गांव के युवा सरपंच प्रेमवीर सद्दी कहते हैं कि पिछले कुछ समय के दौरान गांव का विकास बिलकुल भी नहीं हुआ है। हालात यह है कि यहां पर न तो अच्छा शिक्षण संस्थान है और न ही अस्पताल में सुविधाएं हैं। यही कारण है कि हमने चुनाव का बायकॉट कर दिया है।

गांव के सरपंच प्रेमवीर सिंह सद्दी का फाइल फोटो।
गांव के सरपंच प्रेमवीर सिंह सद्दी का फाइल फोटो।

5 हजार आबादी के लिए डिस्पेंसरी, लेकिन डॉक्टर नहीं
गांव उटालां की आबादी 5000 है और यहां पर 2700 वोट है। यहां का स्कूल मिडिल स्कूल तक ही है और इसे अपग्रेड करने की मांग की जा रही है। गांव के सरपंच प्रेम पहलवान का कहना है कि यहां पर डिस्पेंसरी तो है, मगर वहां पर न दवा मिलती है और न ही डाक्टर ही बैठता है। एक बार तो कोरोना के इंजेक्शन लगा रहे डाक्टर ने महिला को दवा देने से ही मना कर दिया। जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया था। यहां की सड़कों के भी हालात ज्यादा बढ़िया नहीं हैं। वह कहते हैं कि गांव में बायकाट ही इस लिए किया गया है, क्योंकि उनकी सुनवाई करने वाला ही कोई नहीं है।

बोर्ड पर लिखा हमारे सवालों के जवाब- दो गांव में एंट्री पाओ
गांव के एंट्रेंस पर लगे बार्ड पर लिखा है कि पिछले 74 सालों से पंजाब के लोगों का खून चूस रही राजनीतिक पार्टियों का पूर्ण बायकॉट। श्री गुरु तेग बहादुर जी की बेअदबी पर किसी भी पार्टी ने स्टैंड क्यों नहीं लिया? केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए कृषि बिलों की हिमायत राजनीतिक पार्टियों ने क्यों की और किसानों से गद्दारी क्यों की? सरकारी आदारों में आम लोगों से लूट क्यों? पिछले 20 साल से विधानसभा क्षेत्र समराला की सड़कों की बुरी हालत क्यों है? समराला विधानसभा क्षेत्र में खेल अकादमी क्यों नहीं बनाई गई? इलाके में नशा बेचने वाले और रेत माइनिंग करने वालों को शह कौन दे रहा है? जैसे 11 सवाल लिखकर इनके जवाब मांगे गए हैं।

गांव के सरपंच ने विरोध किया तो यूनियन अध्यक्ष पद से हटाया
सरपंच प्रेमवीर सिंह सद्दी प्रदेश की सरपंच यूनियन के प्रधान भी थे। उनका कहना है कि उन्हें गांव के लिए सवाल उठाने का पहला इनाम यह मिला है कि उन्हें यूनियन के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है। जब इस पर विधायक से जवाब मांगा गया तो वह कहने लगे कि उनकी सरकार है और वह कुछ भी कर सकते हैं। सरपंच कहते हैं कि यह फैसला उनका अकेले का नहीं है, पूरी पंचायत और गांववासियों की सहमति से लिया गया फैसला है। उनका गांव विकास की लिहाज से बेहद पिछड़ा हुआ है और वह इसी की बात कर रहे हैं।

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