कप प्लेट पर चुनाव लड़ेंगे किसान ?:चढ़ूनी के चुनाव चिन्ह पर इलेक्शन लड़ने को तैयार ज्यादा नेता, लेकिन राजेवाल ग्रुप तैयार नहीं

लुधियानाएक वर्ष पहलेलेखक: दिलबाग दानिश
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गुरनाम सिंह चढूनी की संयुक्त संघर्ष पार्टी को मिले चाय कप के चिन्ह को मशीन पर दरसाया गया है। - Dainik Bhaskar
गुरनाम सिंह चढूनी की संयुक्त संघर्ष पार्टी को मिले चाय कप के चिन्ह को मशीन पर दरसाया गया है।

कृषि कानूनों को वापिस कराने के बाद चुनाव लड़ रहे संयुक्त समाज मोर्चा के चुनाव चिन्ह को लेकर पेंच फंसा हुआ है। ज्यादातर उम्मीदवार गुरनाम चढ़ूनी की पार्टी के चुनाव चिन्ह कप प्लेट पर चुनाव लड़ने को तैयार हैं, मगर राजेवाल समर्थक एक ग्रुप इस पर तैयार नहीं है। चुनाव आयोग की तरफ से अभी तक संयुक्त समाज मोर्चा को चुनाव चिन्ह नहीं दिया गया है, जो संयुक्त संघर्ष मोर्चा के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहा है। दोनों ही पार्टियों की तरफ से 102 उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया गया है, मगर यह उम्मीदवार इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि आखिर वह किस पार्टी का नाम लिखकर नामांकन दाखिल करें।

आज ही लेना होगा SSM को फैसला

अब जब चुनाव आयोग की तरफ से चुनाव चिन्ह अलॉट नहीं हो रहा है तो संयुक्त समाज मोर्चा और संयुक्त संघर्ष मोर्चा को आज यह फैसला लेना होगा कि वह किस चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ रहे हैं। मोर्चा के समक्ष दो विकल्प हैं, या तो वह चढ़ूनी के चुनाव चिन्ह कप प्लेट पर चुनाव लड़ें या फिर आजाद। अगर आजाद लड़ते हैं तो सभी के पास अलग-अलग चुनाव चिन्ह होंगे। जो उम्मीदवार मंजूर नहीं कर रहे हैं। इसलिए ज्यादातर उम्मीदवार कप प्लेट पर ही चुनाव लड़ना चाहते हैं। इससे लोगों को समझाने में आसानी रहेगी।

फतेहगढ़ साहिब में उम्मीदवार के कार्यालय पर लगे बोर्ड पर लगाया गया कप प्लेट का निशान।
फतेहगढ़ साहिब में उम्मीदवार के कार्यालय पर लगे बोर्ड पर लगाया गया कप प्लेट का निशान।

सोमवार को नामांकन दाखिल करना जरूरी

उम्मीदवारों के पास नामांकन दाखिल करने के लिए दो ही दिन बचे हैं। सोमवार और मंगलवार को ही नामांकन दाखिल किए जा सकते हैं। सोमवार को नामांकन दाखिल करना इसलिए जरूरी हैं क्योंकि अगर कोई त्रुटी रहती है तो इसे दूर किया जा सके और मंगलवार इसके लिए आखिरी दिन होगा, अगर मंगलवार को दाखिल करवाए कागजों में त्रुटी रहती है तो इसे ठीक करने का समय नहीं मिलेगा।

मोर्चा ने देरी से फैसला लिया, चढ़ूनी पहले ही तैयार थे

चुनाव लड़ने पर दिल्ली में चल रहे संघर्ष के दौरान ही विचार विमर्श शुरू हो गया था। चुनाव लड़ने का सबसे पहले ऐलान करने वाले गुरनाम सिंह चढ़ूनी थे और उनकी तरफ से ही किसान संगठनों को चुनाव के लिए आगे आने का आह्वान किया था। इस पर विवाद हुआ और उन्हें संयुक्त किसान मोर्चा से बाहर कर दिया गया। वह पंजाब आए यहां पर राजनीतिक गतिविधियां शुरू कीं और अपनी पार्टी रजिस्टर्ड करवा ली और चुनाव चिन्ह भी अलॉट करवा लिया। पंजाब के संगठनों ने देरी से फैसला लिया, पार्टी देरी से बनाई और अब चुनाव चिन्ह नहीं मिल रहा है। जबकि चढ़ूनी के साथ ही सीट शेयरिंग की और अब कप प्लेट पर चुनाव लड़ने की चर्चा चल रही है।

हम कोर कमेटी मीटिंग में लेंगे फैसला: राजेवाल

राजेवाल ने कहा कि पंजाब में जब कभी भी किसी ग्रुप ने इकट्‌ठे होकर चुनाव लड़ा है तो चुनाव आयोग उस ग्रुप को एक चुनाव चिन्ह देता आया है, लेकिन हमें अभी तक चुनाव चिन्ह अलॉट नहीं हुआ है। इसे लेकर हमारे उम्मीदवार दुविधा में हैं और हम आज कोर कमेटी की मीटिंग कर इस पर फैसला लेंगे। हमारे पास कई विकल्प खुले हैं, उन पर विचार किया जा रहा है। चढ़ूनी के कप प्लेट पर चुनाव लड़ने पर वह कहते हैं कि इस पर कुछ नहीं कह सकता हूं।