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सिटी में डेवलपमेंट वर्क के लिए एफएंडीसीसी की मीटिंग आज:500 प्रस्तावों में से ज्यादातर पुराने, इस बार 25 फीसदी लागत बढ़ाकर फिर रखे जाएंगे

लुधियाना5 महीने पहले
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सिटी की डेवलपमेंट को लेकर एफएंडसीसी की मीटिंग मेयर कैंप ऑफिस में मेयर बलकार संधू की अगुवाई में आज शाम 4 बजे होने जा रही है। मीटिंग में 500 के करीब प्रस्ताव मंजूरी के लिए रखे जाएंगे, जो करीब 70 करोड़ तक के हैं।

इनमें बीएंडआर और ओएंडएम ब्रांच के सबसे ज्यादा कामों के प्रस्ताव रखे हैं। ये बात भी सामने आई है कि निगम की तरफ से फंड की कमी होने के कारण एफएंडसीसी में रखे गए प्रस्ताव को मंजूर करते हुए डेवलपमेंट के काम लोन लेकर करवाए जाएंगे। जबकि रिकवरी की बात करें तो वाे बहुत ही कम की जा रही है। हैरानी की बात ये है कि इस बार मीटिंग में फिर से ज्यादातर वही प्रस्ताव रखे हैं, जो पिछली बार हो चुकी एफएंडसीसी मीटिंग में रखे गए थे। उस समय एक जनहित याचिका पर हाईकोर्ट की फटकार के चलते टेंडर लगाने पर रोक लगाई गई थी।

हाईकोर्ट के आदेश के चलते नहीं लगे थे टेंडर
हाईकोर्ट के आदेश थे कि काॅन्ट्रेक्टरों की जब तक पुरानी पेमेंट क्लियर नहीं की जाएगी, तब तक नए टेंडर नहीं लगाए जा सकेंगे। ऐसे में समय बीतने के बाद अब कामों की लागत 25 फीसदी ज्यादा बढ़ने के चलते बीएंडआर और ओएंडएम के रखे गए प्रस्ताव को दोबारा से बदल कर मीटिंग में टेंडर लगाने के लिए मंजूरी को रखे हैं। इस मीटिंग में निगम कमिश्नर प्रदीप कुमार सभ्रवाल, सीनियर डिप्टी मेयर शाम सुंदर मल्होत्रा, डिप्टी मेयर सर्बजीत कौर और निगम के सभी ब्रांचा प्रमुख और चारों जोन के जोनल कमिश्नर मौजूद रहेंगे।

फिर आए 80 के करीब ट्यूबवेल के प्रस्ताव
निगम की हर बार हुई एफएंडसीसी मीटिंग में फेल ट्यूबवेल के अंगेस्ट नए ट्यूबवेल लगाने समेत अन्य कई प्रस्ताव रखे जा रहे हैं। आज होने वाली मीटिंग में रखे गए 500 प्रस्ताव में से 80 के करीब फिर से फेल ट्यूबवेल के अगेंस्ट नए ट्यूबवेल लगाने के प्रस्ताव हैं। हैरानी की बात ये है कि एक तरफ हजार करोड़ रुपए से ज्यादा पैसे खर्च करके नहरी पानी योजना लाने की तैयारी की जा रही है, जबकि दूसरी तरफ शहर के 95 वाॅर्डों में फेल ट्यूबवेल के बदले नए ट्यूबवेल लगाने का खेल जारी है।

विडंबना ये है कि आज तक निगम यह सुनिश्चित नहीं कर पाया है कि किस नंबर का ट्यूबवेल कौन से इलाके में किस जगह पर लगा हुआ है। बिना नंबरिंग के फेल ट्यूबवेल के अंगेस्ट नए ट्यूबवेल लगाने का खेल चल रहा है, जबकि हर ट्यूबवेल पर 15 से 20 लाख लागत आ रही है। पिछली मीटिंग में ये कहा गया था कि हर ट्यूबवेल कि पहले वेरिफिकेशन होगी, उसके बाद ही प्रस्ताव मंजूर किए जाएंगे। लेकिन मीटिंग में किए जाते दावे सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं।

450 करोड़ से ज्यादा रिकवरी पेंडिंग, 25% भी रिकवरी कर लें तो लोन की नहीं पड़े जरूरत
निगम में रिकवरी न होने से फंड की कमी है। ऐसे में डेवलपमेंट कामों पर फंड की कमी का ज्यादा असर पड़ रहा है। निगम की प्राॅपर्टी टैक्स, पानी-सीवरेज टैक्स, रेंट, बिल्डिंग ब्रांच की तरफ से 450 करोड़ से ज्यादा की रिकवरी करनी बाकी है। ऐसे में अगर निगम की ब्रांचों की तरफ से गंभीरता से इस पेंडिंग रिकवरी में से 25 फीसदी की रिकवरी भी कर ली जाए तो निगम को नए डेवलपमेंट के कामों को करवाने के लिए लोन लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

क्योंकि मेयर बलकार संधू पहले ही अनाउंस कर चुके हैं कि सिटी में डेवलपमेंट के लिए 100 करोड़ का लोन लिया जा रहा है। इससे यही अंदाजा लगाया जा रहा है कि एफएंडसीसी मीटिंग में रखे गए करीब 500 प्रस्तावों को 100 करोड़ के लोन पर ही निर्भर किया गया है।

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