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रेन वॉटर हारवेस्टिंग:मंगलवार को 163 एमएम बारिश यानी 2600 करोड़ ली. पानी रिचार्ज करते तो 2.5 लाख लोग एक साल करते यूज

लुधियाना3 दिन पहले
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  • नक्शा पास कराते समय रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लागू कराने को प्रॉपर्टीज से निगम वसूलता है 50 हजार तक, बिल्डिंग ब्रांच नहीं करता इंप्लीमेंटेशन, नाले में बह रहे बरसात के पानी की एक्सपर्ट से समझिए अहमियत

सिटी का भू-जल स्तर हर साल लगातार 1 मीटर गिर रहा है। इस समय 27 मीटर पर पानी मिलता है। अगर ट्यूबवेल लगाना पड़े तो उसके लिए कम से 600 फीट का बोर करना पड़ रहा है। भू-जल के गिरते स्तर को बचाने के लिए एक मात्र रास्ता ये है कि बारिश का पानी सीधे जमीन में रिचार्ज किया जाए।

हैरानी की बात ये है कि निगम का 159 किलोमीटर स्कवेयर एरिया इस समय लगभग पूरी तरह से कंक्रीट का जंगल बन चुका है। दूसरा यहां पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम ही सही से लागू नहीं है। हालात ये हैं कि जिन सरकारी अदारों की शहर में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को पूरी तरह से लागू करने की जिम्मेदारी है जाए, उनमें ही ये सिस्टम नहीं लग पाए हैं।

नतीजा ये है कि शहर में होने वाली बारिश का पानी जमीन में रिचार्ज होने की जगह सीवरेज में बह कर बर्बाद हो रहा है। एक्सपर्ट केे मुताबिक मंगलवार को 163 एमएम बारिश को 159 किलोमीटर स्कवेयर एरिया से कैलकुलेट किया जाए तो 2600 करोड़ लीटर पानी 2.50 लाख आबादी एक साल तक इस्तेमाल कर सकती है। इस पर निगम की गंभीरता अभी तक नजर नहीं आ रही।

एक्सपर्ट व्यू : बारिश का पानी रिचार्ज न किया तो 2030 तक 42 मीटर नीचे मिलेगा भूजल
पंजाब वाटर रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी के मैंबर डाॅ. सुरिंदर सिंह कुक्कल ने बताया कि उनकी तरफ से बारिश पर पूरी स्ट्डी की है।

मंगलवार को शहर में 163 मिलीमीटर बारिश हुई। अगर इस बारिश को हार्वेस्ट करके रिचार्ज कर लिया जाता तो ये शहर की 2.5 लाख आबादी को प्रति मैंबर 300 लीटर प्रति दिन के हिसाब से पूरे एक साल तक पानी की पूर्ति करता। ऐसे में पूरे साल की बारिश काे हार्वेस्ट करके रीयूज कर लिया जाए तो भू-जल निकालने की नामात्र जरूरत पड़ेगी।

उन्होंने ये भी संकेत दिया है कि इस समय 27 मीटर तक भू-जल की औसत गहराई है। अगर अभी भी बरसातों के पानी काे रीचार्ज नहीं किया गया तो, भू-जल 2030 तक 42 मीटर तक पहुंच जाएगा। इसका असर ये देखने को मिलेगा कि पानी अभी 600 फीट के बोर करने पर आता है, तब 1000 फीट से ज्यादा का बोर करने पर पानी मिलेगा।

रेन हार्वेस्टिंग के 50 करोड़ वसूले, जिनसे लग सकते थे 10 हजार सिस्टम
निगम के रिकाॅर्ड मुताबिक सालाना औसत 2 हजार के करीब नक्शे पास होते हैं, जिसमें 200 से 499 वर्ग गज तक के और 500 वर्ग गज तक के शामिल हैं। बिल्डिंग बायलॉज के तहत 200 से 499 वर्ग गज तक के रिहायशी, कमर्शियल और इंडस्ट्रियल इमारतों के नक्शा पास करवाने पर 25 हजार रुपए सिक्योरिटी ली जाती है, जो रिफंडेबल है। हालांकि ये राशि तभी वापस होती है, जब नक्शा पास करवाने वाले व्यक्ति द्वारा रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया होगा। इसी तरह 500 वर्ग गज से ऊपर वाली इमारताें से निगम नक्शा पास करते समय 50 हजार रुपए सिक्योरिटी लेता है।

हालात ये देखने में आए हैं कि पैसोें की वसूली तो हो रही है, लेकिन इंप्लीमेंट बिल्डिंग ब्रांच आज तक नहीं करवा पाया। साल 2010 की पॉलिसी के मुताबिक रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य है। अगर 11 सालों की बात करें तो निगम के पास 50 करोड़ से ज्यादा पैसे तो सिक्योरिटी के जमा हो चुके हैं, जिनके जरिए 10 हजार से ज्याद रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाए जा सकते हैं। निगम के रिकाॅर्ड के मुताबिक पिछले 11 सालों में किसी ने भी सिक्योरिटी वापस नहीं ली, मतलब किसी ने भी हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगवाया है और न ही निगम ने कोई कार्रवाई की।

सिर्फ इन्हें चिंता
पीएयू ने 20 से ज्यादा इमारतों, पुराने कुएं आदि में रीचार्ज सिस्टम लगाएं, गडवासू, गलाडा ऑफिस, खालसा काॅलेज फॉर वुमन, गवर्नमेंट काॅलेज फॉर गर्ल्स, प्रमुख मॉल्स, वर्धमान मिल, हंबड़ा रोड की निजी फैक्टरी में चार, प्रकाश काॅलोनी, प्रिंस हॉस्टल के पास पुराना कुआं, गुज्जरांवाला गुरु नानक खालसा काॅलेज, बीआरएस नगर की निजी काॅलोनियां, निजी स्कूलों, इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की तरफ से लेयर वैली और तीन के करीब अन्य पार्कों में रीचार्ज वैल बनाए हैं।
निगम कारगुजारी पर सवाल

  • निगम के 900 पार्क में से मात्र 10 फीसदी में ही हार्वेस्टिंग सिस्टम लगे।
  • निगम के चारों जोनों में अभी इसे इम्प्लीमेंट ही नहीं किया।
  • निगम हद में आती सभी सरकारी इमारतों में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का प्रस्ताव तो लाया गया, लेकिन प्रस्ताव ठंडे बस्ते में।
  • शहर में एक हजार ट्यूबवेल रोजाना 9 घंटे चलते हैं और प्रति ट्यूबवेल प्रति सेकेंड 40 लीटर भू-जल निकालता है।

जिम्मेदारी तय करेंगे
हार्वेस्टिंग सिस्टम की कमी है। बिल्डिंग ब्रांच से सभी इमारतों का सर्वे करवाया जाएगा और बॉयलाज मुताबिक ही अब नक्शा पास हाेने पर जिम्मेदारी अफसरों की तय करवाई जाएगी। सभी सरकारी इमारतों में हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए स्मार्ट सिटी के तहत बने प्रपोजल को जल्द मंजूरी दिलाने के लिए सीईओ से कहेंगे।
-बलकार संधू, मेयर

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