पैसों की बर्बादी:2011 में सेहत मंत्री की ओर से सिविल अस्पताल को दी गई 42 लाख की मशीन का लोगों को नहीं मिल पा रहा लाभ

लुधियाना2 महीने पहलेलेखक: रागिनी कौशल
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यहां बंद पड़ी है मशीन। - Dainik Bhaskar
यहां बंद पड़ी है मशीन।
  • सिविल अस्पताल में 4 साल से बंद पड़ी है एफेरेसिस मशीन, अगर चले तो डेंगू के मरीजों को प्राइवेट से आधे रेट में मिल सकते हैं एसडीपी प्लेटलेट्स

लुधियाना के सिविल हॉस्पिटल में महंगी मशीनरी और सुविधा की कितनी बेकद्री होती है इस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 42 लाख की एफेरेसिस मशीन को पिछले 4 सालों से इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। 2011 में सेहत मंत्री लक्ष्मी कांता चावला द्वारा ये मशीन लुधियाना सहित चार अन्य जिलों के लिए दी थी।

जनता के पैसे का इस्तेमाल कर मशीन तो उपलब्ध हो गई लेकिन उस खर्चे का आम जनता को लाभ नहीं मिल रहा। इसका नतीजा ये है कि लोगों को एसडीपी प्लेटलेट्स के लिए प्राइवेट हॉस्पिटल्स या लैब से 12-14 हजार के एसडीपी(सिंगल डोनर प्लेटलेट) लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

किट के 7500, प्रोसेसिंग चार्ज 1500, ब्लड बैंक में सीबीसी भी नहीं
सिविल हॉस्पिटल से एसडीपी प्लेटलेट्स के लिए मरीज को किट के 7500 और प्रोसेसिंग चार्ज 1500 देना होता है। ऐसे में 9000 में उन्हें प्लेटलेट्स मिल जाते हैं। वहीं, प्राइवेट हॉस्पिटल में लगभग दोगुने रेट चुकाने पड़ते हैं। अधिकतर हॉस्पिटल्स द्वारा मरीजों के लिए एसडीपी प्लेटलेट्स ही चढ़ाने की बात कही जाती है।

वहीं, सिविल हॉस्पिटल में आरडीपी(रेंडम डोनर प्लेटलेट्स) 150 रुपये में मिलते हैं। ऐसे में मरीज यही लेकर चले जाते हैं। आरडीपी में एक व्यक्ति के 350 मिली. रक्त की हुई प्रोसेसिंग में जितने प्लेटलेट्स मिलते हैं वो इस्तेमाल किए जाते हैं। जबकि एसडीपी में कम से कम 2 लीटर रक्त की प्रोसेसिंग कर उसमें से प्लेटलेट्स निकाले जाते हैं।

यही नहीं सिविल हॉस्पिटल के ब्लड बैंक में सीबीसी की जांच के लिए भी मशीन नहीं है। सूत्रों के मुताबिक एसडीपी के लिए डेढ़ घंटे का प्रोसेस होता है। इतना लंबा प्रोसेस करने के लिए सिविल अस्पताल का स्टाफ तैयार ही नहीं होता है। इसलिए एफेरेसिस मशीन को बंद कर दिया गया है और मजबूरन लोगों को प्राइवेट अस्पताल जाना पड़ता है।

इधर, डेंगू के 7 नए केस, एक शकी मौत
वीरवार को जिले में डेंगू के 7 नए मरीज मिले हैं। सभी लुधियाना से संबंधित हैं। वहीं, 10 साल की बच्ची की डीएमसी में मौत हुई है। आशंका जताई जा रही है कि बच्ची मौत डेंगू से हुई है लेकिन अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

  • एसडीपी के लिए मरीज को कम से कम 9000 का खर्चा करना पड़ता है। जबकि आरडीपी लगभग मुफ्त है। हॉस्पिटल में गरीब मरीज आते हैं वो खर्चा नहीं उठा पाते। ऐसे में एसडीपी का इस्तेमाल नहीं हो पाता और डिमांड भी नहीं आती। वहीं, हम प्लेटलेट्स को बहुत ज्यादा दिन भी स्टोर कर नहीं रख सकते। - डॉ. गुरिंदरदीप ग्रेवाल, इंचार्ज, सिविल हॉस्पिटल ब्लड बैंक
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