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संवेदनहीनता की कहानी:गर्भवती 10 दिन से काट रही सीपी आॅफिस-थाने के चक्कर, 5 घंटे बैठाने के बाद कर्मी कहते, बाद में आना

लुधियाना6 महीने पहले
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पति व ससुराली उसके साथ मारपीट करते हैं और उनके बेटे को अगवा करवाने की कोशिश भी की गई। - Dainik Bhaskar
पति व ससुराली उसके साथ मारपीट करते हैं और उनके बेटे को अगवा करवाने की कोशिश भी की गई।
  • महीनों पुरानी मार्क की शिकायतों पर सुनवाई नहीं

कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए पब्लिक डीलिंग पर पुलिस ने पाबंदी लगा दी। लेकिन, लोगों की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हो रही और न उन्हें बताया जा रहा है कि उनकी शिकायतों का क्या बना? ऐसे में परेशान लोग सीपी, एडीसीपी और थानों के चक्कर लगाने को मजबूर है। लेकिन वहां भी उन्हें घंटों बैठाने के बाद वापस भेजा जा रहा है।

आकंड़ों की बात करें तो सीपी ऑफिस और थानों में रोज 70 से ज्यादा शिकायतें आती हैं। जिन्हें अब ऑनलाइन मंगवाया जा रहा। जिसके दो-दो दिन बाद उन्हें शिकायत पर रिवर्ट आ रहा है, कई शिकायतों में तो कंप्लेंटेंट की गलत डिटेल भरी जा रही है। दूसरी परेशानी ये है कि शिकायत लेने के बाद भी उनका कोई समाधान नहीं है, बल्कि उन्हें घंटों तक बैठाकर परेशान अलग से किया जा रहा है।

ससुरालियों के साथ चल रहा विवाद

केस 1 : रुचिका ने बताया कि उसका ससुरालियों के साथ विवाद चल रहा है। जिसकी शिकायत उसने पुलिस कमिश्नर ऑफिस में दी। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि उसका पति व ससुराली उसके साथ मारपीट करते हैं और उनके बेटे को अगवा करवाने की कोशिश भी की गई। जिसकी फुटेज उनके पास है। उक्त मामले की शिकायत एडीसीपी 1 को मार्क की गई थी, जिन्होंने आगे थाना डिविजन 3 की पुलिस को सौंप दी। लेकिन एसएचओ छुट्टी पर चली गई। तब से अब तक वो सिर्फ अधिकारियों के दफ्तर व थानों के चक्कर लगा रहीं है। वो गर्भवती हैं, इस बात का तरस भी नहीं खाया जा रहा, बल्कि उन्हें घंटों बैठाने के बाद कल आने की बात कह भेजा है। पुलिस पर सियासी दबाव है, जिससे उन्हें व उनके परिवार को तंग किया जा रहा है। जबकि उनके पास सारे सबूत है।

केस 2: विनोद कौड़ा ने बताया कि उनके साथ ऑनलाइन साढ़े 3 लाख की ठगी हुई थी। जिसके बाद पिछले एक साल से कभी सीपी आफिस के चक्कर लगा रहा हूं तो कभी साइबर सैल के, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हो रही। अब ऑनलाइन भी शिकायत कर ली, मगर वहां से भी हल नहीं हुआ।

दफ्तरों में शिकायतों के ढेर, रोज बढ़ रही: बता दें कि पुलिस के सभी विभागों में 1500 से ज्यादा मामलों की पेंडेंसी पड़ी है। उसके ऊपर से रोज की रोज शिकायतें आ रहीं है। जिसकी वजह से पेंडेंसी का पहाड़ और भी बड़ा होता जा रहा है। लेकिन शिकायतें सिर्फ एक टेबल से दूसरे पर घूमती जा रहीं है। पुलिस का जोर सिर्फ कोविड नियमों की उल्लंघना करने वालों पर ज्यादा फोकस है।

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