सरकार के खिलाफ कच्चे मुलाजिमों का हल्ला बोल:बोले- सरकार मांगों पर ध्यान नहीं दे रही, इसलिए संघर्ष तेज करना पड़ रहा

लुधियाना2 महीने पहले
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सरकार से ठेकेदारी सिस्टम को बंद करने की मांग करते हुए मुलाजिम। - Dainik Bhaskar
सरकार से ठेकेदारी सिस्टम को बंद करने की मांग करते हुए मुलाजिम।

पंजाब के लुधियाना में बुधवार को अलग-अलग विभागों के कच्चे मुलाजिमों ने सरकार के खिलाफ हल्ला बोला। आधा दर्जन से भी ज्यादा विभागों के अधिकारी और कर्मचारी हड़ताल पर रहे और रोष धरने दिए।। पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (PAU) के अध्यापकों ने धरना देने के साथ साथ भूख हड़ताल शुरू कर दी है। नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के अधीन काम करने वाले कर्मचारियों ने सिविल सर्जन कार्यालय में प्रदर्शन किया गया है, PAU के अलग-अलग विभागों में काम करने वाले कच्चे मुलाजिमों की तरफ से PAU में मार्च किया गया। इसके अलावा पावर कॉर्पोरेशन के अधीन काम करते मुलाजिमों ने भी फिरोजपुर रोड़ स्थित पावर कॉर्पोरेशन के ग्रिड के बाहर रोष धरना दिया है। सभी संगठनों की तरफ से चन्नी सरकार पर आरोप लगाया जा रहा है कि बिना वजह ऐलान किए जा रहे हैं, जबकि हो कुछ भी नहीं रहा है।

PAU के थापर हॉल में धरना देते हुए अध्यापक।
PAU के थापर हॉल में धरना देते हुए अध्यापक।

PAU के थापर हॉल में अध्यापकों ने शुरू की भूख हड़ताल

पीएयू के अध्यापकों ने थापर हॉल में बड़ी रैली की। पंजाब फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज टीचर्स ऑर्गेनाइजेशन द्वारा मंगलवार को चंडीगढ़ में रैली आयोजित की गई। जिसके बाद बुधवार को फिर यूनिवर्सिटी के अध्यापकों की तरफ से थापर हॉल में रोष धरना दिया गया। रोजाना 2-2 अध्यापक भूख हड़ताल पर बैठने की घोषणा की गई है। PAU अध्यापक यूनियन के प्रधान डॉ. हरमीत सिंह किंगरा ने बताया कि सरकार हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही, इसलिए संघर्ष तेज करना पड़ रहा है। डॉ. किंगरा ने कहा कि पंजाब के अलावा सभी राज्यों में 7वें पे स्केल को लागू कर दिया गया। यूजीसी के सातवें पे कमीशन को लागू न करके अध्यापकों के साथ अन्याय किया जा रहा है।

PAU के कच्चे मुलाजिम रोष रैली करते हुए।
PAU के कच्चे मुलाजिम रोष रैली करते हुए।

हड़ताल के कारण काम प्रभावित

पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (PAU) के कच्चे मुलाजिमों ने PAU में रोष मार्च निकाला है। यहां के अलग अलग विभागों में तैनात 500 के करीब कच्चे मुलाजिमों की तरफ से प्रदर्शन में हिस्सा लिया गया है। मुलाजिमों ने कहा कि लंबे समय से अपनी मांगें पूरी करवाने के लिए बात रख रहे हैं, लेकिन अब तक कोई हल नहीं निकला है। पीएयू कांट्रेक्ट एंड डीपीएल वर्कर एसोसिएशन के प्रधान जगविंदरजीत सिंह ग्रेवाल ने कहा कि अब अगर हमारी मांगों पर कोई विचार नहीं किया जाएगा तो हर रोज अलग ढंग से प्रदर्शन किया जाएगा। एसोसिएशन के महासचिव इंद्रपाल सिंह ने कहा कि सरकार ने पिछले 10 सालों से काम कर रहे मुलाजिमों को जल्द पक्का करने का वायदा किया था। जो अब तक अधूरा है। मगर सरकार ने अपने किसी भी वादे को पूरा नहीं किया। यहां तक की सरकार ने बोर्ड और कॉरपोरेशन को इस स्कीम से बाहर कर दिया है। अगर सरकार हमारी मांगों को नहीं मानती है तो जरूरत पड़ने पर मुलाजिम भूख हड़ताल करेंगे।

सिविल सर्जन कार्यालय में हड़ताल करते हुए NHM कर्मचारी।
सिविल सर्जन कार्यालय में हड़ताल करते हुए NHM कर्मचारी।

NHM मुलाजिमों की सिविल सर्जन कार्यालय में हड़ताल

नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के अधीन काम करने वाले मुलाजिमों की तरफ से आज सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर धरना दिया गया है। यह मुलाजिम पिछले एक माह से हड़ताल पर चल रहे हैं और रोष जाहिर कर रहे हैं। यूनियन के नेता अमित कुमार का कहना है कि सरकार की तरफ से उनकी मांगें नहीं मानी जा रही है। पंजाब की चन्नी सरकार की तरफ से अलग-अलग विभागों के कच्चे मुलाजिमों को पक्के करने का ऐलान किया हुआ है। मगर उनकी तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जबकि वह पिछले 15-20 साल से सरकार के पास काम कर रहे हैं। कोरोना के बेहद बुरे दौर के दौरान उनकी तरफ से काम किया गया और उसका इनाम तो क्या मिलना बल्कि दूसरे विभागों के मुलाजिमों को पक्का कर उनका मनोबल गिराया जा रहा है।

पावर कार्पोरेशन ग्रिड के बाहर रोष धरना देते हुए मुलाजिम
पावर कार्पोरेशन ग्रिड के बाहर रोष धरना देते हुए मुलाजिम

बिजली बोर्ड मुलाजिमों का ग्रिड के समक्ष धरना

पावर कॉर्पोरेशन के अधीन काम करने वाले मुलाजिमों ने भी सरकार के खिलाफ अपना रोष जाहिर किया है। यहां पर धरना दे रहे मुलाजिमों का कहना है कि सरकार ने पावर कॉर्पोरेशन के मुलाजिमों के साथ भद्दा मजाक किया है। हालात तो यह है कि सरकार उनके लिए कुछ भी नहीं कर रही है। जबकि हाई रिसक पर वह काम कर रहे हैं, पक्के मुलाजिमों को अगर काम के दौरान कोई नुकसान होता है तो उन्हें कई तरह के फायदे दिए जाते हैं, मौत होने पर उनके परिवारों को नौकरी भी मिलती है। मगर जब हमारा नुकसान होता है तो कोई सुनवाई करने वाला नहीं होता है।

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