डॉक्टर्स डे स्पेशल / कोरोना को हराने में दिन-रात एक कर रहे तमाम डॉक्टरों, मेडिकल स्टाफ को सैल्यूट

डॉ. अनमोल रत्न व डॉ. मीनल गुप्ता डॉ. अनमोल रत्न व डॉ. मीनल गुप्ता
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डॉ. अनमोल रत्न व डॉ. मीनल गुप्ताडॉ. अनमोल रत्न व डॉ. मीनल गुप्ता

  • पति आइसोलेशन में तैनात, पत्नी माइक्रोबायोलॉजिस्ट दोनों लड़ रहे कोरोना से जंग
  • 97 दिन से ड्यूटी कर रहीं डॉ. कौर, परिजनों से दूर रहती हैं

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

लुधियाना. धरती पर भगवान का रूप। यानी डॉक्टर्स और मेडिकल स्टाफ। तीन महीने से ये कोरोना से जंग लड़ रहे हैं। फर्क बस इतना है कि वर्दी का रंग इस बार खाकी नहीं, ब्लू एंड व्हाइट है। बिना रुके, बिना थके लगातार ड्यूटी कर रहे हैं।

घर-परिवार की जिम्मेदारियों के साथ कोरोना पॉजिटिव मरीजों को जांचने, उन्हें सकारात्मक रखने और स्वस्थ कर घर भेजने में जुटे हैं।

एक ही लक्ष्य है, इस महामारी को हराना है। आज डॉक्टर्स डे के मौके पर भास्कर ऐसे ही तमाम डॉक्टरों, मेडिकल स्टाफ को सलाम करता है।

सभी के सहयोग से आगे बढ़कर काम करने की हिम्मत मिलती है

सिविल अस्पताल के ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. अनमोल रत्न आइसोलेशन वॉर्ड में शुरुआत से ही तैनात हैं। वो हर रोज सैंपल लेते हैं। अपने 4 साल के बेटे से मिल नहीं पाते। उनकी पत्नी डॉ. मीनल गुप्ता डीएमसी में माइक्रोबायोलॉजिस्ट हैं।

कोरोना सैंपल्स की जांच में योगदान दे रही हैं। डॉ. रत्न ने बताया कि बेटा छोटा है। कई बार उसे समझाना मुश्किल हो जाता है। पारिवारिक जिम्मेदारियां भी हैं। इसलिए हम पति-पत्नी बैलेंस बनाकर चल रहे हैं।

माता-पिता का बहुत योगदान रहा है। जब शक होता है तो गेस्ट हाउस में रहता हूं, ताकि परिजनों को खतरा न हो। साथी डॉक्टर्स, सिविल सर्जन और एसएमओ का सहयोग है।

हमें आगे बढ़कर काम करने की हिम्मत मिलती है। लोगों से आग्रह है कि नियमों पालन करें, ताकि हम सब सुरक्षित रहें।

97 दिन से ड्यूटी कर रहीं डॉ. कौर, परिजनों से दूर रहती हैं

सिविल अस्पताल की मेडिसिन स्पेशलिस्ट डॉ. अमनप्रीत कौर आइसोलेशन वॉर्ड बनने से ही सेवाएं दे रही हैं। तकरीबन 97 दिन से। उन्होंने कहा कि इस महामारी से लड़ने में हर स्तर पर सहयोग की जरूरत है।

डॉ. कौर ने बताया कि उनकी सास, पति और बेटी हैं। परिजन सुरक्षित रहें, इसलिए वो छुट्टी वाले दिन ही घर लौटती हैं। बाकी गेस्ट हाउस में रहती हैं। उनके पति की भी आइसोलेशन वॉर्ड में ड्यूटी लग चुकी हैं।

वह कहती हैं, ‘परिवार के सहयोग के बिना काम करना संभव नहीं है। सिंप्टोमेटिक मरीज जब स्वस्थ होकर घर लौटता है तो उससे ज्यादा सुकून और कहीं नहीं है। जुकाम, खांसी या बुखार के लक्षण पर डॉक्टर से संपर्क करें, ताकि स्थिति को शुुरुआत में ही कंट्रोल में किया जा सके।’

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