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शुरुआत:आज यूरोप, जापान, ऑस्ट्रेलिया, कोरिया में जा रहे ब्यूस्केप फार्म्स के बीज

लुधियानाएक महीने पहले
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  • बिना इंटरनेट व फोन के समय शुरू किया विदेशों में फूलों के बीज बेचने का काम

(रागिनी कौशल) ‘मैंने पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी से एमएससी फ्लोरीकल्चर की है। क्लास के दौरान प्रोफेसर डॉ. गिल हमेशा हमें कहते थे कि हमारे यहां के बीज भी बाहर जाने चाहिए। जिससे कि यहां के बारे में विदेशों में भी पता चले। मैंने 1985 में काम शुरू किया उस समय इंटरनेट और न ही फोन था। कुरियर की भी सुविधा नहीं थी। यहां तक कि बीजों के एक्सपोर्ट के मामले में भारत का नाम भी नहीं था।

मैंने विदेशों में जाकर यात्रा करनी शुरू की, इंटरनेशनल एसोसिएशन की जिसमें इंटरनेशनल सीड फेडरेशन, एशिया एंड पेसिफिक सीड एसोसिएशन(एसपा) की बी-टू-बी(िबजनेस टू बिजनेस) काॅन्फ्रेंस में हिस्सा लेना शुरू किया। वहां पर अपने संपर्क बनाए और अपने बीजों के बारे में जानकारी दी। जिसके बाद मैं अपना काम शुरू कर सका।

हमारे फार्म के बीज देश में कहीं नहीं जाते। सभी विदेश में ही जाते हैं। अब तो इंटरनेट और फोन ने काम आसान कर दिया है। लेकिन उस समय खुद जाकर संपर्क बनाने पड़ते थे। शुरुआत के 3-4 साल काफी मुश्किल रहे। जिसमें 1988 और 89 में बाढ़ आ गई। लेकिन हमने हिम्मत नहीं हारी और मेहनत जारी रखी।

सर्टिफिकेशन के लिए भी मैंने काफी मेहनत की। फूलों के बीजों का काम सही चलने लगा तो हमने सब्जियों के बीज भी एक्सपोर्ट करने शुरू किए। आज सारे यूरोप, जापान, अॉस्ट्रेलिया, कोरिया, ताइवान, नॉर्थ अमेरिका में हमारे फूलों के बीज एक्सपोर्ट हो रहे हैं। सब्जियों के बीज ज्यादा देशों में जाते हैं।’ ये कहना था ब्यूस्केप फार्म्स के संस्थापक अवतार सिंह ढींढसा का। -ये कहना था ब्यूस्केप फार्म्स के संस्थापक अवतार सिंह ढींढसा का।

3.5 एकड़ से शुरू कर आज 1500 एकड़ में है काम

अवतार ढींढसा ने बताया कि उन्होंने 3.5 एकड़ में अपना काम शुरू किया था। आज फूलों का काम 1500 एकड़ में है। जोकि पंजाब, कर्नाटक और एमपी में फैला हुआ है। बाहर से बीज लाना यहां से भेजना और एक्सपोर्ट का काम करना चुनौती भरा है। विदेशों में क्वालिटी का खास ख्याल रखा जाता है। जो हमने कभी कम नहीं होने दी।

ब्यूटीफुल लैंडस्केप से ब्यूस्केप फार्म्स का नाम हमने निकाला। नाभा मलेरकोटला रोड लांगड़ियां गांव में हमारा फार्म है। हम 187 जातियों के 650 से भी ज्यादा किस्में बेच रहे हैं। शुरुआत कोरियोप्सीस, ग्लाडिया, वायोला जैसे फूलों से शुरू किया। अवतार ढींढसा एशिया एंड पेसिफिक सीड एसोसिएशन के प्रेसिडेंट भी रह चुके हैं।

इसके अलावा नेशनल और स्टेट अवॉर्ड भी हासिल कर चुके हैं। पीएयू के बोर्ड मेंबर्स में भी रह चुके हैं। वर्तमान में पंजाब एग्री एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन के वाइस चेयरमैन के तौर पर अपनी सेवाएं निभा रहे हैं। ढींढसा ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान एक्सपोर्ट में परेशानी तो आई लेकिन उन्होंने परेशानियों पर ध्यान देने के बजाए उनके हल और काम पर ध्यान दिया।

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