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कृषि कानूनों के विरोध में SAD का संसद कूच:सुखबीर बादल समेत पार्टी के कई नेता हिरासत में लिए; गुरुद्वारा रकाबगंज के पास चल रहा अकालियों का धरना समाप्त

लुधियानाएक महीने पहले
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कृषि बिलों को लेकर दिल्ली में काला दिवस मनाने पहुंचे शिरोमणि अकाली दल बादल के प्रधान सुखबीर बादल समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। उसके बाद वहां धरना समाप्त हो गया। SAD ने संसद तक मार्च का ऐलान किया था। गुरुद्वारा साहिब से अरदास के बाद शुरू हुआ मार्च दो मीटर दूर ही रोक दिया गया। यहां पर पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने सख्त बैरिकेडिंग कर रखी थी। बैरकेडिंग के कारण गुरुद्वारा साहिब के पास ही उन्हें रोका गया तो अकालियों ने वहीं प्रदर्शन शुरू कर दिया।

खुली गाड़ी पर खड़े पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल, प्रो प्रेम सिंह चंदूमाजरा, बलविंदर सिंह भूंदड़, हरसिमरत कौर बादल समेत अन्य नेताओं ने यहां कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। अकाली नेताओं ने कहा है कि शिरोमणि अकाली दल ने हमेशा ही किसानी और पंजाबियत के लिए संघर्ष किया है। हम शंतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करना चाहते थे और यही होगा। ऐलान किया कि किसानी को लेकर संघर्ष जारी रहेगा। जैसे ही धरने के बाद पार्टी नेताओं ने संसद की तरफ कूच करने का ऐलान किया तो पुलिस ने सुखबीर सिंह बादल, हरसिमरत कौर बादल और अन्य नेताओं को हिरासत में लिया। उसके बाद प्रदर्शन समाप्त हो गया। मार्च से पहले सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि केंद्र सरकार ने पार्टी वर्करों को रोकने का प्रयास किया। इसके बावजूद कार्यकर्ता जगह-जगह पर की गई बैरिकेडिंग भेद कर मोटरसाइकिल, कारों और रिक्शे के माध्यम से दिल्ली पहुंचे।

दिल्ली में गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब के पास प्रदर्शन करते SAD नेता और कार्यकर्ता।
दिल्ली में गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब के पास प्रदर्शन करते SAD नेता और कार्यकर्ता।

SAD ने कृषि कानूनों को लागू करने का एक साल पूरा होने पर 17 सितंबर को काला दिवस के तौर पर मनाते हुए गुरुद्वारा श्री रकाबगंज से संसद तक मार्च निकालने का एलान किया है। लोक सभा में पिछले साल 17 सितंबर को ही नए कृषि कानून पास हुए थे। दिल्ली पुलिस ने मार्च निकालने की मंजूरी नहीं दी है, मगर SAD ने एलान किया है कि वह फिर भी मार्च निकालेंगे।

SAD के मार्च को लेकर दिल्ली में जगह-जगह बैरिकेड लगाए गए हैं।
SAD के मार्च को लेकर दिल्ली में जगह-जगह बैरिकेड लगाए गए हैं।

इजाजत नहीं फिर भी निकालेंगे मार्च
इससे पहले शिरोमणि अकाली के प्रवक्ता और सीनियर नेता दलजीत सिंह चीमा का कहना है कि दिल्ली पुलिस ने हमें मार्च निकालने की इजाजत नहीं दी है। हम फिर भी यह मार्च निकालकर रहेंगे। केंद्र सरकार किसानों के पक्ष में उठने वाली आवाज को दबाना चाहती है। यह हरगिज़ नहीं होने दिया जाएगा। उनका कहना है कि हमें रोकने के प्रयास होंगे, लेकिन हम इससे डरने वाले नहीं हैं। हम मार्च निकालकर रहेंगे। यह संघर्ष हम अपने भाइयों, अपने पंजाब के लिए कर रहे हैं। ताकि आने वाली पीढ़ी को बचाया जा सके। इसलिए इसे रोका जाना कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

रास्ते में बैरिकेड लगाकर कार्यकर्ताओं को रोका
हरियाणा और दिल्ली के बॉर्डर पर किसानों को रोक लिया गया था। इसके बाद अकाली वर्कर वहीं पर बैठकर रोष जाहिर करने लगे थे। अकाली वर्करों ने पूरी रात वहीं पर रोष प्रदर्शन किया। इस पर पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि देश में लोकतंत्र है और हर किसी को अपनी बात रखने की आजादी है, लेकिन उनकी इस आजादी को दबाया जा रहा है। शिरोमणि अकाली दल का 100 साल पुराना संघर्ष का ही इतिहास है। वह इसे बरकरार रखते हुए इसे आगे तक लेकर जाएंगे।

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