भाजपा के वोट बैंक पर सुखबीर बादल की नजर:खूब उमड़ रहा शिअद अध्यक्ष का हिंदू प्रेम; 7 दिन में दो बार लुधियाना का दौरा, शहर से 3 सीटों पर चुनाव लड़ता है अकाली दल

लुधियाना4 महीने पहले
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1996 के बाद भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल बादल विधानसभा चुनाव 2022 अलग-अलग लड़ने जा रहे हैं। 25 साल में भारतीय जनता पार्टी ने अपना जनाधार बनाया है। भाजपा के पास अब अपना अच्छा खासा वोट बैंक भी है, जिस पर अब शिरोमणि अकाली दल बादल की नजर है और इसी को हथियाने के लिए ही सुखबीर सिंह बादल लगातार लुधियाना दौरा कर रहे हैं। वह पिछले 7 दिन में दूसरी बार लुधियाना पहुंचे हैं और हिंदू वोट बैंक की बात करके गए हैं। उनका मंदिर प्यार और हिंदू समाज के कार्यक्रमों में जाना साफ करता है कि वह हिंदू शहरी वोट को अपने पक्ष में करना चाहते हैं। इसी कारण वह लुधियाना के प्राचीन संगला वाला शिवाला के अलावा जैन समाज के मंदिर और राम दरबार मंदिर में माथा टेक चुके हैं। उनका ज्यादा फोकस उन्हीं एरिया में है, जहां से भाजपा चुनाव लड़ती रही है।

चंडीगढ़ रोड स्थित सेक्टर 39 स्थित राम दरबार मंदिर में माथा टेकने के बाद सुखबीर बादल।
चंडीगढ़ रोड स्थित सेक्टर 39 स्थित राम दरबार मंदिर में माथा टेकने के बाद सुखबीर बादल।

लुधियाना में तीन सीटों पर चुनाव लड़ती है भाजपा

पिछला 2017 का विधानसभा चुनाव शिरोमणि अकाली दल बादल ने भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर लड़ा था। शहर के तीन विधानसभा हलकों वेस्ट, नॉर्थ और सेंट्रल से भारतीय जनता पार्टी के उमीदवारों ने चुनाव लड़े। वेस्ट से भारत भूषण आशु के खिलाफ कमल जेटली ने चुनाव लड़ा, जिन्हें 22 हजार 620 वोट पड़े और वह तीसरे नंबर पर रहे थे। यह कांग्रेस उमीदवार से आधे भी नहीं थे। अब कमल चेटली शिरोमणि अकाली दल में शामिल हो गए हैं। इसके अलावा नॉर्थ से प्रवीन बंसल को 39 हजार 732 वोट मिले थे और वह राकेश पांडे से हारे थे और दूसरे नंबर पर रहे। इसी तरह सेंट्रल से गुरदेव शर्मा देवी को 27 हजार 391 वोट मिले थे और वह भी दूसरे नंबर पर रहे थे। भले इसमें अकाली दल के वोट भी हैं, मगर भाजपा यहां पर अच्छी स्थिति में है। कारण यह भी है कि ज्यादातर शहरी वोट या तो भाजपा या फिर कांग्रेस को पड़ती हैं और ग्रामीण वोट हमेशा अकाली दल को ही पड़ी हैं। यही कारण है कि अकाली दल शहर में अपनी पकड़ मजबूत करने में लगा है।

चंडीगढ़ रोड पर सुखबीर बादल का विरोध करते कांग्रेसी।
चंडीगढ़ रोड पर सुखबीर बादल का विरोध करते कांग्रेसी।

शहर में किसान आंदोलन का प्रभाव भी कम

कृषि कानूनों को लेकर भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल बादल दोनों ही बैकफुट पर हैं। मगर शहर में इसका प्रभाव कम है। भारतीय जनता पार्टी के तमाम कार्यक्रम लुधियााना में होते हैं और किसान इतने बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन नहीं करते हैं। अश्वनी शर्मा के शहर में आने पर 8 में से 2 बार ही विरोध हुआ है। मगर अकाली दल बादल को गांवों में भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। यही कारण है कि सुखबीर सिंह बादल की नजर शहरी वोट पर है और वह इसे अपने हक में साधने का हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।

पंजाब में मजबूत होकर निकलेगी पार्टी

भारतीय जनता पार्टी के सीनियर नेता अनिल सरीन कहते हैं कि अकेले शहर में ही नहीं बल्कि हम गांवों में भी अच्छा प्रदर्शन करेंगे। शहर में तीन हलकों पर ही नहीं, बल्कि सभी सीटों पर भाजपा का वोट बैंक है। हम अकाली दल को हमेशा से जिताते आए हैं, मगर कुछ जगहों पर हमें साथ नहीं मिला है। मगर अब भाजपा चुनाव लड़ रही है जो हम इसमें जीत भी हासिल करेंगे।

बैकफुट पर नहीं हैं हम, अकाली दल का अच्छा खासा वोट बैंक

शिरोमणि अकाली दल बादल के नेता महेश इंद्र सिंह गरेवाल का कहना है कि हम बैकफुट पर नहीं है। शहर में अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। पार्टी अध्यक्ष का काम है कि वह सभी को साथ लेकर चलें और हम भाईचारक सांझ के लिए ही हिंदू, सिख, मुस्लिम को साथ लेकर चल रहे हैं। हां, पिछली बार हमारे हाथ बड़ी सफलता हाथ नहीं लगी थी, इसलिए प्रधान साहिब लुधियाना पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।

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