लखीमपुर हिंसा का जायजा लेने UP जाएगा SAD का डेलीगेशन:चंदूमाजरा की अगुवाई में पार्टी लेगी हालात का जायजा, सुखबीर बोले- PM मोदी जिद छोड़ देते तो नहीं जाती इतने किसानों की जान

लुधियानाएक वर्ष पहले
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उत्तरप्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा का जायजा लेने के लिए शिरोमणि अकाली दल बादल का डेलीगेशन यूपी जा रहा है। इसकी अगुवाई प्रेम सिंह चंदूमाजरा कर रहे हैं। ये दल वहां जाकर पूरे हालात का जायजा लेगा और पार्टी को स्थिति की जानकारी देगा। शिरोमणि अकाली दल की तरफ से इसके लिए कोर कमेटी की इमरजेंसी बैठक बुलाई जा रही है जिसमें आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।

शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जिद छोड़कर कृषि कानून रद्द कर देने चाहिए। अगर वह अपनी जिद पर अड़े न होते तो न किसानों के धरने होते और न इतने लोगों की मौत होती। हालात बेहद बिगड़ रहे हैं और किसानों की जान जा रही हैं। उनकी ओर से इस मामले की जांच करने की मांग की है। उनका कहना है कि पार्टी से ऊपर उठकर किसानों को इंसाफ मिलना चाहिए।

राम दरबार मंदिर में सुखबीर सिंह बादल।
राम दरबार मंदिर में सुखबीर सिंह बादल।

सरकार आई तो यहां बैठे हो वहीं की रजिस्ट्री करवाकर देंगे

सुखबीर सिंह बादल की तरफ से राजीव गांधी कालोनी में जन सभा को संबोधित किया गया है। यहां पर उनकी ओर से एलान किया गया है कि यहां भी आप लोग बैठे हुए हैं, उसकी ही रजिस्ट्री आपको करवाकर देंगे। उनका कहना था कि शिरोमणि अकाली दल बादल की सरकार आना तय है और सरकार आते ही लोगों का फायदा किया जाएगा। इस बैठक में बड़ी संख्या प्रवासी मजदूरों की थी। सुखबीर सिंह बादल ने यह भी एलान किया है कि उनकी सरकार आते ही दो माह के आठ सौ यूनिट माफ किए जाएंगे। इसके बाद उनकी ओर से व्यापारियों से बैठक की गई और बाद कुछ अन्य जगहों पर वर्करों से छोटी छोटी बैठकें भी की हैं। किसानों के एलान के बावजूद शिरोमणि अकाली दल बादल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल लुधियाना पहुंचे हैं। उन्होंने सेक्टर-39 के राम दरबार मंदिर में मत्था टेका है।

लुधियाना में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते सुखबीर सिंह बादल।
लुधियाना में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते सुखबीर सिंह बादल।

किसानों के प्रदर्शन के बाद बंद की गई थीं रैलियां
सुखबीर बादल की तरफ से 100 दिन 100 विधानसभा क्षेत्र गल पंजाब दी के तहत अपनी जनसभाएं शुरू की गई थीं। मोगा में हुए विरोध और पुलिस लाठीचार्ज के बाद उनकी ओर से अपनी रैलियां बंद कर दी गईं। इसके बाद किसानों संगठनों ने सभी राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर कृषि कानून रद्द नहीं होने तक चुनाव रैलियां नहीं करने का सुझाव दिया था। इसके बाद अब सुखबीर ने फिर से रैलियां शुरू कर दी हैं।

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