दो बच्चों को अगवा करने का मामला:10 दिन इलाके में रेकी कर की थी वारदात गुमराह करने को बताते थे गोरखपुर निवासी

लुधियाना2 महीने पहले
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प्रिंस  और रवि - Dainik Bhaskar
प्रिंस और रवि
  • आरोपियों के जानकारों से पूछताछ

बिहारी कॉलोनी से 25 जून को दो बच्चों को अगवा करने के मामले में पुलिस द्वारा डेढ़ महीने की मशक्कत के बाद दंपति बिरजा देवी, राजा राम व उसकी बेटी अंजलि को सुल्तानपुर(यूपी) से गिरफ्तार किया था। तीन दिन के रिमांड के दौरान पुलिस द्वारा आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।

गौर हो कि अगवा बच्चे प्रिंस की मां गीता ने पुलिस को बताया कि आरोपी अंजिल ने खुद को गोरखपुर निवासी बताया था। जांच दौरान सामने आया कि वारदात के बाद पकड़ में न आएं इसलिए आरोपियों द्वारा खुद को गोरखपुर निवासी बताते थे जबकि असल में वे सुल्तानपुर के रहने वाले हैं।

पुलिस ने आरोपियों को मोबाइल लोकेशन से ट्रेस कर काबू किया, जो वहां झोपड़ी में रह रहे थे। आरोपियों ने बताया कि वह पिछले चार साल से लुधियाना में रह रहे थे। जिसके चलते 7-8 अलग अलग स्थानों पर रहे। लेकिन उन्हें बच्चे नहीं मिल पा रहे थे। आरोपियों ने बताया कि वह दोबारा गांव चले गए। जिसके बाद तीन महीने पहले लुधियाना वापस आए और ढंडारी कलां में किराए पर कमरा लेकर रहने लगे।

वारदात से पांच दिन पहले ही पीड़ितों के कमरे के पास रहने लगे आरोपी
आरोपियों के अनुसार वह बच्चा ढूंढने के लिए वारदात से 10 दिन पहले बिहारी कॉलोनी में घूम रहे थे। इस दौरान वह रवि और प्रिंस के वेहड़े में पहुंचे। वहां पर उनकी नजर प्रिंस पर पड़ी। बच्चा पसंद आने पर अंजलि ने उसी दिन उसकी मां गीता से काफी समय तक बातें कर उसे अपनी बातों में उलझा लिया और उसे भाभी कहने लगी। लेकिन वहां कमरा खाली न होने के कारण वहां से चली और और फिर वहां चक्कर लगाती रही।

जिसके बाद पांच दिन पहले कमरा खाली होते ही अंजलि ने उसी वेहड़े में कमरा लेकर वारदात की। हालाकि आशंका है कि आरोपियों के जानकारों द्वारा उनका इस वारदात में साथ दिया गया हो। जिसके चलते पुलिस उनसे पूछताछ करेगी। सब इंस्पेक्टर जसवीर कौर अनुसार आरोपियों ने पूछताछ के दौरान कई स्थानों के बारे में बताया है। जहां पर वह रह रहे थे। जिसके चलते वहां पर जाकर जांच की जाएगी। आरोपियों से पूछताछ कर पता लगाया जाएगा कि किसी और ने उनका इस वारदात में साथ दिया था या नहीं।

इधर, शहर से लापता 150 से अधिक बच्चों का नहीं लगा सुराग
वहीं शहर में 150 से अधिक बच्चे लापता हैं। जिनका अभी तक कोई सुराग नहीं लग सका है। हालांकि जिला प्रशासन द्वारा बच्चों को ढूंढने के लिए कई यूनिट भी बनाए गए हैं। लेकिन फिर भी कई सालों से लापता चल रहे बच्चों का कुछ पता नहीं चल सका है।

जबकि पुलिस विभाग की ओर से हाल ही में गुमशुदा एप तैयार की है। जिसके चलते कई लापता बच्चे मिले। मगर अभी भी कई माता पिता अपने बच्चों के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। हर महीने लापता बच्चों की 8 से 10 शिकायतें पुलिस के पास पहुंच रही हैं। लगातार इस तरह बच्चे लापता होना चिंता का विषय है।

13 साल की बच्ची हुई लापता
हैबोवाल की जस्सियां रोड पर एक 13 साल की बच्ची मुन्नी 14 जुलाई को अचानक घर से लापता हो गई। हालाकि बच्ची के परिवार का आरोप है कि उसे किसी ने अवैध हिरासत में रखा हुआ है। थाना हैबोवाल की पुलिस ने पिता राम दयाल की शिकायत पर मामला दर्ज किया है। राम दयाल का कहना है कि उनकी ओर से बच्ची को कई जगह ढूंढा गया। मगर 24 दिन बाद भी सुराग नहीं मिल सका है।

9 माह से गायब बच्चा
फोकल पाॅइंट के जीवन नगर इलाके में चार साल का बच्चा विकास 12 अक्टूबर को लापता हो गया था। थाना फोकल पाॅइंट की पुलिस ने भगवती की शिकायत पर मामला दर्ज किया है। भगवती के अनुसार उसकी ओर से कई जगह बच्चे को ढूंढा गया, मगर कुछ पता नहीं चल सका।​​​​​​​

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