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भगवान गणेश की भक्ति में रंगा लुधियाना का हैबोवाल:बीस फीट रोड पर विराजे 20 फीट के गणपति, बाबा के भजनों के साथ भक्तिरस में डूबे श्रद्धालु

लुधियाना10 दिन पहले
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लुधियाना में गणेश चतुर्थी के समागम में यहां 20 फीट रोड पर बीस फीट के गणपति बाबा विराजमान हैं। - Dainik Bhaskar
लुधियाना में गणेश चतुर्थी के समागम में यहां 20 फीट रोड पर बीस फीट के गणपति बाबा विराजमान हैं।

पंजाब के लुधियाना में प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी हजारों श्रद्धालु गणपति जी की भक्ति में रंगे हुए हैं। कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला शहर के हैबोवाल इलाके में। यहां श्री गणेश सेवा परिवार की तरफ से करवाए जा रहे गणेश चतुर्थी के समागम में यहां 20 फीट रोड पर बीस फीट के गणपति बाबा विराजमान हैं। गणपति जी की सुंदर मूर्ति यहां पर स्थापित की गई है और रोजाना रात को यहां पर बाबा के भजनों पर लोग झूमते हुए भक्तिरस का आनंद लेते हैं। पंडाल की सुंदरता देखते ही बनती है और पंडाल को सुंदर फूलों और डेकोरेशन से सजाया गया है। करीबन 30 हजार की आबादी वाले इस एरिया में गणेज चतुर्थी लोग मिलजुल मनाते हैं और 8 दिन यहां भक्ति का सागर बहता है और लोग इसका आनंद उठा रहे हैं।

लुधियाना के हैबोवाल में भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु।
लुधियाना के हैबोवाल में भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु।

कोरोना ने फीकी किए थे भक्ती के रंग, अब भी रख रहे प्रकोशन
श्री गणेश सेवा परिवार के संस्थापक कुमाार गौरव बताते हैं कि वह कई वर्ष से सेवा कार्य में लगे हुए हैं और कोरोना के कारण पिछले साल फीके गुजरे हैं, मगर इस बार बाबा की कृपा बरस रही है और हम इसका आनंद ले पा रहे हैं। इस बार हमने कोरोना के खतरे को मद्देनजर रखते हुए सभी तरह के प्रबंध किए हुए हैं। यहां पर लोगों को शारीरिक दूरी बनाकर बैठने को कहा जाता है। हम कोशिश करते हैं कि लोग भगवान की मूर्ति और दूसरे सामान को हाथ नहीं लगाएं और यहां समागम शुरू होने से पहले और बाद में सेनेटाइजेशन करवाई जाती है।

लुधियाना का हैबोवाल भगवान गणेश की भक्ति में डूबा नजर आया।
लुधियाना का हैबोवाल भगवान गणेश की भक्ति में डूबा नजर आया।

7 दिन गुणगान के बाद विसर्जित होंगे गणपति जी
संस्था के प्रधान हैप्पी गुलाटी और सदस्यों लक्की जैन और गोलडी सिंगला ने बताया कि 11 सितंबर से 18 सितंबर तक रोजाना रात साढे 8 बजे से हम गणपति जी की अराधना करते हैं। अलग-अलग भजन मंडलियां यहां आकर भजन गायन करती हैं और भक्त जन उनकी महिमा का आनंद लेते हैं। 18 सितंबर को ढोल-ढमाके के साथ आरती की जाएगी और इसमें बड़ी संख्या लोग शामिल होते हैं।

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