सुखबीर ने 6 और सीटों पर उतारे कैंडीडेट:अकाली दल में मलूका को दरकिनार कर बराड़ को दी मौड़ मंडी से टिकट, मालवा में तलवंडी साबो, कोटकपूरा, मुक्तसर, फरीदकोट व जैतों से भी उम्मीदवार घोषित

लुधियाना10 महीने पहले
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सीनियर नेता सिकंदर सिंह मलूका की मांग को दरकिनार कर शिरोमणि अकाली दल ने मौड़ मंडी से जगमीत सिंह बराड़ को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। इसके अलावा शिअद ने मालवा की कई अहम सीटों पर भी उम्मीदवारों का ऐलान किया है। जिसमें तलवंडी साबो से जीत महेंद्र सिद्धू, कोटकपूरा से मनतार सिंह बराड़, श्री मुक्तसर साहिब से रोजी बरकंदी, फरीदकोट परमबंस सिंह बंटी रोमाणा, जैतों से सूबा सिंह बादल को उम्मीदवार घोषित किया गया है। यह सभी सीटें फरीदकोट लोकसभा क्षेत्र की हैं। यहां से केंद्रीय मंत्री रहते हुए सुखबीर सिंह बादल को जगमीत सिंह बराड़ ने ही हरा दिया था। चुनाव में भले साढ़े 5 माह का समय है, मगर शिअद ने इस बार सभी दलों से पहले सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान करना शुरू कर दिया है।

सुखबीर बादल को करना पड़ सकता है मलूका के विरोध का सामना
बता दें कि सिकंदर सिंह मलूका को रामपुरा फूल से कैबिनेट मंत्री गुरप्रीत सिंह कांगड़ के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा गया है। मलूका का कहना है कि उस विधानसभा क्षेत्र में उनकी इतनी पकड़ नहीं है। इसलिए उन्हें मौड़ मंडी से टिकट दी जाए। मगर इसके बावजूद जगमीत बराड़ को वहां से चुनाव मैदान में उतार दिया गया है। जगमीत बराड़ की शिअद में एंट्री के बाद से ही पार्टी के कई सीनियर नेता इसका विरोध जता चुके हैं। इस तरह सीनियर नेता की मांग ठुकरा जगमीत को टिकट देने से विरोध का सामना करना पड़ सकता है।

चुनाव जीतने का दम रखते हैं जगमीत बराड़
जगमीत सिंह बराड़ कुछ ही समय में चुनाव समीकरण बदलने का दम रखते हैं। वह सुखबीर सिंह बादल को केंद्रीय मंत्री रहते हुए फरीदकोट लोकसभा क्षेत्र से हरा चुके हैं। यही नहीं कोटकपुरा विधानसभा क्षेत्र से 15 दिन पहले उनके भाई रिपजीत बराड़ को टिकट मिली थी और उन्होंने 15 दिन में चुनाव जीता था। अब वह मौड़ मंडी से पार्टी के लिए क्या कर सकते हैं यह देखने वाली बात होगी।

जानिए मालवा की 6 अहम सीटों पर घोषित उम्मीदवारों का कैसा है सियासी सफरः-

स्टूडेंट पॉलिटिक्स से उठे बराड़, बादल परिवार रहा टारगेट पर
जगमीत सिंह बराड़ ने राजनीतिक सफर स्टूडेंट लीडर के तौर पर शुरू किया था। वह 1979 से 1980 के दरमियान एक साल जेल में भी रहे। उन्होंने उस समय किसान मूवमेंट में हिस्सा लिया था। श्री मुक्तसर साहिब से होने के कारण उनका ज्यादातर राजनीतिक सफर बादल परिवार के खिलाफ ही रहा है। प्रकाश सिंह बादल हमेशा उनके निशाने पर रहे हैं। वह लोकसभा चुनाव तब जीते, जब प्रकाश सिंह बादल प्रदेश के मुख्यमंत्री थे और सुखबीर सिंह बादल केंद्रीय कैबिनेट मंत्री। 1992 के चुनाव के बाद वह कांग्रेस के बड़े चेहरे के तौर पर प्रदेश की राजनीतिक में देखे जाने लगे थे। 2015 में उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़ी और तृणमूल कांग्रेस में चले गए। 2017 चुनाव में कुछ उमीदवार भी उतारे मगर हार गए। 2019 में तृणमूल छोड़कर अकाली दल में शामिल हो गए।

जीतमहिंदर सिद्धू भी कांग्रेसी, कैपटन के नजदीकी रहे
जीतमहिंदर सिंह सिद्धू भी कांग्रेस के ही सीनियर नेता रहे हैं। वह 2014 में कांग्रेस पार्टी के तलवंडी साबो से ही विधायक थे और विधायक पद से इस्तीफा देकर अकाली दल में शामिल हुए थे। वह एक बार अकाली दल की सीट से चुनाव जीत चुके हैं और एक बार हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस में रहते हुए वह कैप्टन अमरिंदर सिंह के काफी नजदीकी रहे हैं। कांग्रेस के लिए तब बेहद दुविधा भरी स्थिति थी, जब जीत महिंदर सिद्धू, जोगिंदरपाल जैन, अवतार सिंह बराड़ जैसे बड़े चेहरे पार्टी छोड़ चुके थे। जीत महिंदर सिंह सिद्धू कांग्रेस पार्टी में अच्छा खासा कद रखते थे। अचानक कैप्टन अमरिंदर सिंह से दूरियां बढ़ीं और वह पार्टी छोड़कर अकाली दल में शामिल हो गए।

सूबा सिंह बादल पूर्व केंद्रीय मंत्री के बेटे और पुराने नेता
सूबा सिंह बादल, शिरोमणी अकाली दल के दलित चेहरा रहे गुरदेव सिंह बादल के बेटे हैं। गुरदेव सिंह प्रकाश सिंह बादल के नजदीकी रहे हैं। गुरदेव सिंह बादल पहले विधानसभा क्षेत्र रहे पंजग्राईं से चुनाव लड़ते रहे हैं। इसके बाद यह विधानसभा क्षेत्र समाप्त कर विधानसभा क्षेत्र जैतों बनाया गया था। इसके बाद इस परिवार को यहां से टिकट नहीं दी गई और पार्टी को दो बार यहां से हार का सामना करना पडा। इस बार पुराने टकसाली नेता गुरदेव सिंह बादल के बेटे को यहां से टिकट देकर पार्टी नया दांव खेल रही है।

परमबंस सिंह बंटी रोमाणा यूथ का चेहरा
सुखबीर सिंह बादल की तरफ से फरीदकोट से परमबंस सिंह बंटी रोमाणा को टिकट दी है। वह इस समय यूथ अकाली दल बादल के प्रदेश अध्यक्ष हैं। वह पिछली बार भी यहां से चुनाव लड़ चुके हैं और हार का सामना करना पड़ा था। रोमाणा को अकाली दल छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए कुशलदीप सिंह किक्की ढिल्लों की जगह पर पार्टी ने खड़ा किया है। वह पिछले 10 साल से पार्टी के लिए शहर में काम कर रहे हैं। पिछले 5 साल में पूरे पंजाब में पार्टी के लिए की मेहनत की वजह से सुखबीर सिंह बादल और बिक्रम सिंह मजीठिया के काफी नजदीक हुए हैं। उन्हें पिछली बार कांग्रेस के नेता अवतार सिंह बराड़ का भी साथ मिला था।

मनतार बराड़ पुराने टकसाली, दो बार हार चुके चुनाव
मनतार सिंह बराड़ पुराने टकसाली परिवार से हैं। उनके पिता अकाली दल में कैबिनेट मंत्री रहे हैं। उन्हें जगमीत सिंह बराड़ के भाई रिपजीत सिंह बराड़ से हार का सामना करना पड़ा था और इसके बाद एक चुनाव वह जीत भी चुके हैं। पिछला चुनाव उन्हें आम आदमी पार्टी के नेता कुलतार सिंह संधवां से हारना पड़ा था। वह लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं और इस समय शिरोमणी अकाली दल के जिला जत्थेदार भी हैं।

कंवलजीत सिंह रोजी बरकंदी यूथ नेता, सुखबीर के नजदीकी
कंवलजीत सिंह रोजी बरकंदी श्री मुक्तसर साहिब में अकाली दल के विधायक हैं और यहां का बड़ा चेहरा हैं। उन्होंने श्री मुक्तसर साहिब से सीनियर नेता करण कौर बराड़ को हराया था। वह यूथ अकाली दल के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं और ट्रक यूनियन का अध्यक्ष रहते हुए वह सुखबीर सिंह बादल के काफी नजदीक हुए थे। श्री मुक्तसर साहिब प्रकाश सिंह बादल का गृह जिला है और यह सीट पार्टी के लिए काफी मायने रखती है। पार्टी ने यूथ चेहरे को यहां से मौका दिया है और उम्मीद जताई जा रही है कि वह चुनाव जीत जाएंगे।

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