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  • The Result Of The Meeting Was Delayed, The Construction Work Of 100 Roads Got Stuck, Even If The Approval Was Received, Winter Would Become A Hindrance.

सूबे के सबसे बड़े निगम के देखिए हाल:देरी से मीटिंग का नतीजा 100 सड़कों का निर्माण कार्य अटका, मंजूरी मिली भी तो सर्दी बनेगी रोड़ा

लुधियाना23 दिन पहले
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रोज गार्डन में लगे फव्वारे की मरम्मत के प्रस्ताव को भी मंजूरी का इंतजार। - Dainik Bhaskar
रोज गार्डन में लगे फव्वारे की मरम्मत के प्रस्ताव को भी मंजूरी का इंतजार।
  • इस साल अब तक जालंधर और अमृतसर में 20 से ज्यादा हुईं एफएंडसीसी मीटिंगें, हमारे यहां मात्र 5 हुईं

शहर के विकास के लिए जनता ने नगर निगम चुनाव में जिन नुमाइंदों को चुना था, वह लोगों के काम तो दूर समय पर निगम हाउस की मीटिंग तक नहीं करवा पा रहे। 4 महीने होने को आए हैं, अभी तक हाउस की मीटिंग नहीं हुई, जबकि म्युनिसिपल एक्ट के मुताबिक हर महीने ये मीटिंग होना लाजिमी है। हाउस मीटिंग से पहले निगम की वित्त एवं ठेका कमेटी (एफएंडसीसी) मीटिंग तो महीने में कम से कम दो बार बुलाने की बजाए, नगर निगम के मेयर बलकार सिंह संधू दो-दो माह बीत जाने के बावजूद भी मीटिंग बुलाने में देरी करते जा रहे हैं। इससे शहर की डेवलपमेंट पर सीधा असर पड़ता नजर आ रहा है। क्योंकि एफएंडसीसी मीटिंग में ही नए टेंडर लगने और जिनके टेंडर लग चुके हैं, उनके वर्क ऑर्डर जारी करने की फाइनल मंजूरी कमेटी की सहमति के बाद दी जाती है।

कमेटी की मीटिंग पिछले दो महीनों से न होने के चलते शहर की उधड़ चुकी सड़कों पर दोबारा प्रीमिक्स डालने के काम अभी मीटिंग के चलते पेंडिंग चल रहे हैं, जबकि अब आगे मौसम भी प्रीमिक्स बिछाने के लिए अनुकूल नहीं माना जाता है। अब जिन इलाकों की सड़कें उधड़ी हुई हैं और वहां पर प्रीमिक्स नहीं डल पाएगा तो इसके लिए सीधे तौर पर जिम्मेदारी नगर निगम की कमेटी की मीटिंग न हो पाना माना जा सकता है। कहने को तो सूबे का सबसे बड़ा नगर निगम लुधियाना है। यहां 95 वॉर्ड हैं और सालाना बजट भी 900 से 1 हजार करोड़ तक का बनता है। हैरानी की बात ये है कि इस साल अब तक जालंधर और अमृतसर निगम एफएंडसीसी मीटिंगों के मामले में लुधियाना से काफी आगे हैं। दोनों जिलों में 20-20 मीटिंगे हो चुकी हैं। अगर लुधियाना निगम की बात करें तो मेयर बलकार सिंह संधू की अगुवाई में महज 5 बार ही एफएंडसीसी मीटिंगें हो पाई हैं।

हर मीटिंग में रखे जाते 500 प्रस्ताव, आनन-फानन में मंजूर प्रस्ताव से क्वालिटी पर पड़ता असर

शहर के चारों जोनों को मिलाकर करीब 100 सड़कों से जुड़े कामों की फाइलों को मंजूरी मिलना अभी बाकी है। जबकि इन कामों की फाइलें तो पिछले दो महीनों से अटकी हुई हैं। कारण यही है कि एफएंडसीसी की मीटिंग समय पर बुलाई ही नहीं गई। इन कामों में कुछ के अभी टेंडर तक लगने बाकी हैं, जबकि जिनके टेंडर लग चुके हैं, उनके वर्क ऑर्डर जारी होने बाकी हैं। ऐसे में भले ही अगर मेयर संधू अगले सप्ताह मीटिंग बुलाकर कामों की मंजूरी दे दें। लेकिन 10 से 15 दिन तो काम शुरू करने में लग जाएंगे, तब तक सर्दी और बढ़ने से हॉट मिक्स प्लांट बंद हो जाएंगे। वहीं, पंजाब निर्माण योजना और एमएलए कोटे के तहत लगने वाले कामाें के टेंडरों की मंजूरी होनी बाकी है, जो 100 करोड़ से ज्यादा के हैं। हर मीटिंग में 500 प्रस्ताव पेश कर दिए जाते हैं, जिनको पढ़ने में तीन दिन लगते हैं। आनन-फानन में मंजूर किए प्रस्ताव क्वालिटी के लिए भी खतरा साबित होते हैं। बता दें कि पिछली मीटिंगों में पास हुए कई प्रस्तावों के काम अभी तक पेंडिंग चल रहे हैं। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि एफएंडसीसी में पास हुए प्रस्तावों पर भी निगम का रवैया गंभीर नहीं रहता है। अब होने वाली मीटिंग में रोज गार्डन के फव्वारा की मरम्मत समेत कई प्रस्ताव अभी मंजूर होने बाकी हैं।

विरोधी दल के नेता जसपाल ग्यासपुरा की मेयर से अपील, समय पर बुलाएं मीटिंगें

निगम में विरोधी दल के नेता और पार्षद जसपाल सिंह ग्यासपुरा ने मेयर बलकार संधू से अपील करते हुए कह दिया है कि जब से हाउस का गठन हुआ है, तब से लेकर आज तक एफएंडसीसी का कोरम ही पूरा नहीं किया जा रहा है। कृपया दो मेंबर और रखकर कोरम को पूरा करें। दूसरी बात ये है कि एफएंडसीसी की प्रथा के अनुसार विपक्ष का मेंबर रखें ताकि वह विपक्ष का मेंबर भी अपनी बात रख सके। जबकि कम से कम एक महीने में 3 बार मीटिंग बुलाएं ताकि एजेंडों पर सही से विचारा जा सके। अभी हालात ये हैं कि देरी से होनी वाली मीटिंग में 500 एजेंडे आने पर उनको सही से पढ़ा नहीं जा सकता है। जल्दबाजी में पढ़े जाते एजेंडे के कारण डेवलपमेंट के कामों में क्वालिटी नहीं आ पा रही है।

मेयर बलकार सिंह संधू,

जालंधर-अमृतसर में 20 से ज्यादा मीटिंगें हो गई, हमारी कम क्यों?
-चेक करवा लें, हमने भी ज्यादा मीटिंगें की हैं।
आपकी तो एक मीटिंग तीन दिन चलती है, उसे मिलाकर ज्यादा हैं क्या?
-कोई बात नहीं हम आगे से समय पर मीटिंगे बुलाएंगे।
आपकी मीटिंग में एक साथ 500 प्रस्ताव क्यों रखे जाते हैं?
-हम एक साथ पूरे शहर में डेवलपमेंट करवाने के लिए ऐसा करते हैं।
देरी से मीटिंग बुलाने पर तो कामों में देरी हो जाती होगी?
-मैं पहले ही इन एंटीसिपेशन करके प्रस्तावों को पास कर देता हूं।

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